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सोने के तमगे से चमकी यूनिवर्सिटी की मेधा

Sun, 11 Sep 2016 07:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sun, 11 Sep 2016 07:57 PM IST
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gold foil with univarsity medha uniforms
मदन मोहन मालवीय प्रोद्योगिकी यूनिवर्सिटी के प्रथम दीक्षान्त समारोह के अवसर पर सेण्टर फार मैनेजमेण्ट स्टडी भवन के प्रथम तल के लोकार्पण के अवसर पर राज्यपाल राम नाईक ,हाजी फरीद महफूज किदवई,प्रो अनिल डी सहस्रबुद्वे ,कुलपति प्रो. ओंकार सिंह व अन्य। - फोटो : ‌‌shivharsh
गोरखपुर। सिर पर वैसा ही साफा जो मालवीय जी पर फबता था। बदन पर उसी तरह का कुर्ता जो मालवीय जी की शान और पहचान था। इस परिधान के साथ चेहरे पर जो आत्मविश्वास होना चाहिए वह भी बखूबी मौजूद था। अगर यह कहा जाए कि रविवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर का माहौल मालवीयमय था तो गलत नहीं होगा। यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत में दीक्षित होने पहुंचे 236 मालवीयंस का यह रूप इस अवसर पर सभी को आकर्षित कर रहा था।
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दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने के लिए आगंतुकों के आने का सिलसिला सुबह 11 बजे से ही शुरू हो गया। तय समय एक बजे तक आयोजन स्थल यानी विश्वविद्यालय का बहुद्देशीय हाल खचाखच भर गया। आयोजन का समय होते ही सभी की आंखें हाल के उस गेट पर टिक गईं, जहां से राज्यपाल के साथ शैक्षणिक शोभायात्रा को प्रवेश करना था। समय से आधे घंटे की देरी से ज्यों ही शोभायात्रा हॉल में दाखिल हुई, सभी ने खड़े होकर उसका स्वागत किया। रंग-बिरंगे परिधान में मौजूद राज्यपाल राम नाईक, मुख्य अतिथि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के चेयरमैन अनिल डी. सहस्त्रबुद्धे और सूबे के प्राविधिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) फरीद महफूज किदवई उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। मंच पर दीप प्रज्ज्वलन और मालवीय जी के चित्र पर माल्यार्पण के बाद राज्यपाल की अनुमति से समारोह की शुरुआत हुई। 
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सबसे पहले कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने यूनिवर्सिटी की विकास यात्रा से आगंतुकों को रूबरू कराया। उसके बाद बतौर कुलाधिपति राम नाईक ने विद्यार्थियों को दीक्षापदेश दिया और फिर शुरू हुआ मेडल देने का सिलसिला। एक-एक कर नाम पुकारा जाता रहा और तालियों के बीच मेधावी राज्यपाल के हाथों मेडल और प्रशस्ति पत्र से नवाजे जाते रहे। तालियाें का सिलसिला तभी थमा जब मेधावियों के नामों की सूची पूरी हुई। मेडल कार्यक्रम के बाद सबसे पहले प्राविधिक शिक्षा राज्य मंत्री का विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाने वाला संबोधन हुआ और फिर मुख्य अतिथि अनिल सहस्त्रबुद्धे ने दीक्षांत भाषण की रवायती औपचारिकता पूरी की। अंत में कुलाधिपति का अध्यक्षीय संबोधन हुआ, जिसमें उन्होंने उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों को सफलता का मूल मंत्र बताया। मंच पर मौजूद अतिथियों को स्मृति चिन्ह देने और रजिस्ट्रार केपी सिंह के आभार ज्ञापन के बाद कुलाधिपति ने समारोह के समापन की औपचारिक घोषणा की। समूह फोटोग्राफी और राष्ट्रगान के बाद शैक्षणिक शोभा यात्रा का प्रस्थान हुआ और इसी के साथ हुआ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह का समापन। समारोह के संचालन की जिम्मेदारी डॉ. मुमताज खान और शिवानी अरोड़ा ने निभाई।
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