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अब कमजोर नजर वाले भी आसानी से पढ़ सकेंगे सुंदरकांड
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गीताप्रेस के ओर से प्रकाशित की गई सुंदरकांड वृहदाकार टाइप पुस्तक।
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अब कमजोर नजर वाले भी आसानी से पढ़ सकेंगे सुंदरकांड
अविनाश श्रीवास्तव
गोरखपुर। कमजोर नजर वालों की सहूलियत को ध्यान में रखकर गीताप्रेस ने वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू कर दिया है। इसमें बड़े और रंगीन शब्दों की छपाई की गई है जिससे कमजोर नजर वृद्ध या कोई और इसका पाठ आसानी से कर सकें। पहले सुंदरकांड के अक्षर छोटे होने से कई लोगों को इसे पढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ता था।
धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकों के प्रकाशन में गीताप्रेस नित्य नये प्रयोग करता रहा है। ये प्रयोग शत प्रतिशत सफल भी होते हैं। इसी क्रम में गीताप्रेस ने इस बार कमजोर नजर वालों के लिए वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू किया है। 60 पेज की इस पुस्तक में शब्दों का अंकित करने के लिए लाल, नीला, आसमानी एवं कत्थई रंगों का प्रयोग किया है। साथ ही राम दरबार एवं हुनमान जी के आकर्षक चित्र भी छापे गए हैं। पुस्तक की छपाई आर्ट पेपर पर की गई है। सुंदरकांड के साथ ही पुस्तक में हनुमान चालीसा, हनुमत स्तवन, श्रीराम स्तुति, हुनमान एवं श्री रामायण आरती है। प्रथम संस्करण में दस हजार पुस्तकों का प्रशासन किया गया है। सफल होने पर और भी पुस्तकों का प्रकाशन किया जाएगा।
आठ भाषाओं में होता है सुंदरकांड का प्रकाशन
गीताप्रेस से आठ भाषाओं में सुंदरकांड का प्रकाशन किया जाता है। जिसमें हिंदी, अंग्रजी, गुजराती, नेपाली, तेलगु, कन्नड़, बांग्ला, उड़िया भाषाएं शामिल हैं।
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तीन करोड़ के अधिक सुंदरकांड प्रकाशित
गीताप्रेस में अबतक हिंदी में तीन करोड़ 42 लाख से अधिक सुंदरकांड का प्रकाशन हो चुका है। जिसमें हिंदी के सचित्र सटीक सुंदरकांड, सुंदरकांड विशिष्ट, सुंदरकांड मूल एवं सुंदरकांड मूल गुटका शामिल हैं।
कोट
अक्षर छोटे होने के कारण सुंदरकांड का पाठ न कर पाने की शिकायत पाठकों से मिल रही थी। ऐसे में पाठकों को कोई परेशानी नहीं हो इस लिहाज से वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू किया गया है।
- लालमणि त्रिपाठी, उत्पाद प्रबंधक, गीता प्रेस
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अविनाश श्रीवास्तव
गोरखपुर। कमजोर नजर वालों की सहूलियत को ध्यान में रखकर गीताप्रेस ने वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू कर दिया है। इसमें बड़े और रंगीन शब्दों की छपाई की गई है जिससे कमजोर नजर वृद्ध या कोई और इसका पाठ आसानी से कर सकें। पहले सुंदरकांड के अक्षर छोटे होने से कई लोगों को इसे पढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ता था।
धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकों के प्रकाशन में गीताप्रेस नित्य नये प्रयोग करता रहा है। ये प्रयोग शत प्रतिशत सफल भी होते हैं। इसी क्रम में गीताप्रेस ने इस बार कमजोर नजर वालों के लिए वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू किया है। 60 पेज की इस पुस्तक में शब्दों का अंकित करने के लिए लाल, नीला, आसमानी एवं कत्थई रंगों का प्रयोग किया है। साथ ही राम दरबार एवं हुनमान जी के आकर्षक चित्र भी छापे गए हैं। पुस्तक की छपाई आर्ट पेपर पर की गई है। सुंदरकांड के साथ ही पुस्तक में हनुमान चालीसा, हनुमत स्तवन, श्रीराम स्तुति, हुनमान एवं श्री रामायण आरती है। प्रथम संस्करण में दस हजार पुस्तकों का प्रशासन किया गया है। सफल होने पर और भी पुस्तकों का प्रकाशन किया जाएगा।
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आठ भाषाओं में होता है सुंदरकांड का प्रकाशन
गीताप्रेस से आठ भाषाओं में सुंदरकांड का प्रकाशन किया जाता है। जिसमें हिंदी, अंग्रजी, गुजराती, नेपाली, तेलगु, कन्नड़, बांग्ला, उड़िया भाषाएं शामिल हैं।
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तीन करोड़ के अधिक सुंदरकांड प्रकाशित
गीताप्रेस में अबतक हिंदी में तीन करोड़ 42 लाख से अधिक सुंदरकांड का प्रकाशन हो चुका है। जिसमें हिंदी के सचित्र सटीक सुंदरकांड, सुंदरकांड विशिष्ट, सुंदरकांड मूल एवं सुंदरकांड मूल गुटका शामिल हैं।
कोट
अक्षर छोटे होने के कारण सुंदरकांड का पाठ न कर पाने की शिकायत पाठकों से मिल रही थी। ऐसे में पाठकों को कोई परेशानी नहीं हो इस लिहाज से वृहदाकार सुंदरकांड का प्रकाशन शुरू किया गया है।
- लालमणि त्रिपाठी, उत्पाद प्रबंधक, गीता प्रेस