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पहले नहीं ली सुधि, पानी रिसाव पर दौड़े अफसर

Thu, 17 Aug 2017 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Thu, 17 Aug 2017 01:42 AM IST
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Flood comes in Gorakhpur
इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद सामान समेटने में जुटे लोग। - फोटो : Amar Ujala
बंधों और रेगुलेटर की मरम्मत आदि की समय रहते सिंचाई विभाग के अफसरों ने सुधि नहीं ली। मानीटरिंग करने वाले डीएम और कमिश्नर भी चूक गए। नतीजतन जैसे ही नदियों का जलस्तर बढ़ा, रोहिन ने कैंपियरगंज के मखनहां बांध में कटान शुरू कर दिया तो राप्ती के पानी से शहर में लगे तीन रेगुलेटर से रिसाव शुरू हो गया। कमिश्नर अनिल कुमार, डीएम राजीव रौतेला समेत सभी एडीएम, एसडीएम और सिंचाई विभाग के अफसर दिन भर बंधों पर डेरा डाले रहे। अगर अफसरों ने यह सक्रियता पहले दिखाई होती तो शायद आज इसकी नौबत ही नहीं आती। 
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पिछले महीने राप्ती का जलस्तर बढ़ने पर भी डोमिनगढ़, इलाहीबाग आदि रेगुलेटर बंद करने पड़े थे। पंपिंग स्टेशन से पानी वापस शहर में आने पर नगर निगम ने सिंचाई विभाग के अफसरों को पत्र लिखा था। उस समय भी अगर सिंचाई विभाग के अफसर सतर्कता दिखाते और रेगुलेटरों का गहनता से परीक्षण करते तो यह स्थिति नहीं सामने आती। 
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यही नहीं हर महीने होने वाली मंडलीय समीक्षा बैठक में भी पिछले दो महीने से संभावित बाढ़ से निपटने आदि को लेकर सिंचाई विभाग की तैयारियों के बारे में कमिश्नर पूछते रहे मगर उन्हें भी गुमराह किया गया। शासन को भी विभाग कागजों पर ‘फील गुड’ कराता रहा मगर जब परीक्षा की घड़ी आई तो सभी तैयारियों का सच सामने आ गया। 
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बाढ़ चौकियों पर भेजी गईं दवाएं
जिले में बाढ़ की दस्तक से स्वास्थ्य महकमा भी अलर्ट हो गया है। बुधवार को सीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम कैंपियरगंज के बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंची। पांच सर्वाधिक प्रभावित गांवों के लोगों को क्लोरीन की गोलियां और ब्लीचिंग पाउडर दिया गया। इसके साथ ही बाढ़ चौकियों पर बुखार और पेट से जुड़ी समस्याओं की दवाएं उपलब्ध कराईं।
सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि जिले में बनाई गईं 86 बाढ़ चौकियों पर सामान्य दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र की एएनएम और बेसिक हेल्थ वर्कर को संबंधित क्षेत्र की लागातार मानीटरिंग के लिए कहा गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सांपों का खतरा देखते हुए सभी सीएचसी और पीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था की गई है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम को कैंपियरगंज क्षेत्र के प्रभावित गांवों में भेजा गया था। सीएचसी, पीएचसी पर 600 और मुख्यालय पर 255 एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हैं।


दाह-संस्कार के लिए परेशान हुए लोग 
राप्ती नदी में पानी बढ़ने से दाह संस्कार के लिए परिजनों को काफी परेशान होना पड़ रहा है। चारो ओर पानी भरा होने से दाह संस्कार के लिए बने प्लेटफार्म का ही विकल्प ही बचा है। ऐसे में बुधवार को यहां पर दबाव काफी बढ़ गया। मोक्ष धाम में बड़ी संख्या में लोग दाह संस्कार को पहुंचे थे। सभी ने विकल्प के अभाव में वाहन राप्ती पुल पर खड़े कर दिए जिसकी वजह से यहां लंबा जाम लग गया और दो मिनट का सफर आधे घंटे में तय हुआ। आम तौर पर दाह संस्कार केे लिए पहुंचने वाले लोगों का प्रवेश वैकुंठ धाम से होता है। लोग अपने वाहनों को राप्ती नदी के तट तक आसानी से ले जाते हैं। लेकिन यहां पर बाढ़ का पानी भरा होने से लोगों ने राप्ती पुल के किनारे का रास्ता अपनाया। मोक्ष धाम के सामने गेट पर लकड़ियों से भरी ट्रालियां खड़ी थी। ऐसे में मोटरसाइकिल या अन्य वाहनों पर पहुंचे लोगों ने पुल पर वाहन खड़े कर दिए। एकाएक सैकड़ों वाहन खड़े होने और दूसरी ओर अवैध फल मंडी की वजह से सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए । वहीं इस दौरान ट्रैैफिक कर्मी की गैरमौजूदगी कोढ़ में खाज बन गई। 
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