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यूनिवर्सिटी में इंटर के बाद कर सकेंगे एलएलबी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 11 May 2016 12:30 AM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी
गोरखपुर यूनिवर्सिटी की विद्या परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इंटरमीडिएट के बाद विधि की पढ़ाई करने के लिए पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एलएलबी पाठ्यक्रम, बीएससी और बीकॉम के विद्यार्थियों को व्यक्तिगत परीक्षार्थी के रूप में एमए की पढ़ाई करने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई।
इसके अलावा दो वर्षीय बीपीएड पाठ्यक्रम और लंबे समय से अटके बैचलर आफ फिजियोथेरेपी और बीएससी एमएलटी कोर्स के नये स्वरूप को भी विद्या परिषद ने स्वीकृति दे दी है। अब 18 मई को कार्यपरिषद की बैठक में इस पर अंतिम फैसला होगा।
पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स शुरू होेने से कक्षा 12 वीं के बाद ही विद्यार्थी विधि की पढ़ाई शुरू कर सकेंगे। अभी स्नातक की पढ़ाई के बाद विधि का तीन साल का कोर्स करना पड़ता है। काफी लंबे समय से इस बदलाव की मांग उठ रही थी। जानकारों की माने तो कार्य परिषद अगर इसे मंजूरी देता है तो शैक्षणिक सत्र 2016-17 से ही नये कोर्स के तहत प्रवेश लिया जाएगा।
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वहीं बीएससी और बीकॉम की डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को एमए की पढ़ाई करने में काफी सहूलियत होगी। इसे भी नये सत्र से शुरू करने की तैयारी है। विद्या परिषद ने यूजीसी में अन्य पिछड़ा वर्ग के शोध छात्रों के लिए अर्हता में बदलाव करने, राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों का कार्यकाल दो साल बढ़ाने, मेडिकल कॉलेज में आयुर्वेद संकाय खोलने सहित कई और प्रस्ताव पर सहमति दी है।
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इसके अलावा दो वर्षीय बीपीएड पाठ्यक्रम और लंबे समय से अटके बैचलर आफ फिजियोथेरेपी और बीएससी एमएलटी कोर्स के नये स्वरूप को भी विद्या परिषद ने स्वीकृति दे दी है। अब 18 मई को कार्यपरिषद की बैठक में इस पर अंतिम फैसला होगा।
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पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स शुरू होेने से कक्षा 12 वीं के बाद ही विद्यार्थी विधि की पढ़ाई शुरू कर सकेंगे। अभी स्नातक की पढ़ाई के बाद विधि का तीन साल का कोर्स करना पड़ता है। काफी लंबे समय से इस बदलाव की मांग उठ रही थी। जानकारों की माने तो कार्य परिषद अगर इसे मंजूरी देता है तो शैक्षणिक सत्र 2016-17 से ही नये कोर्स के तहत प्रवेश लिया जाएगा।
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वहीं बीएससी और बीकॉम की डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को एमए की पढ़ाई करने में काफी सहूलियत होगी। इसे भी नये सत्र से शुरू करने की तैयारी है। विद्या परिषद ने यूजीसी में अन्य पिछड़ा वर्ग के शोध छात्रों के लिए अर्हता में बदलाव करने, राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों का कार्यकाल दो साल बढ़ाने, मेडिकल कॉलेज में आयुर्वेद संकाय खोलने सहित कई और प्रस्ताव पर सहमति दी है।