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जंगल में तस्करों ने वनकर्मियों पर की फायरिंग
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
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खोराबार इलाके के कुसम्ही जंगल के रामलखना बीट में मंगलवार की रात एक बजे के करीब कटान की सूचना पर लकड़ी तस्करों को पकड़ने गई वन विभाग की टीम पर तस्करों ने फायरिंग कर दी। अपने बचाव में जवाबी कार्रवाई करते हुए वन कर्मियों ने भी फायरिंग की। दोनों तरफ से आठ राउंड गोलियां चलीं। हालांकि अंधेरे का लाभ उठाकर तस्कर फरार हो गए।
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मंगलवार की रात मुखबिर की सूचना पर कुसम्ही जंगल के सूबा बीट के फारेस्टर ओमप्रकाश राय और वन दरोगा विनोद गौड़ लकड़ी तस्क रों को पकड़ने गए थे। वनकर्मियों ने घेराबंदी की तो सात से आठ की संख्या में मौजूद तस्करों ने टार्च की रोशनी देखकर पहले लकड़ी काटने वाले हथियार से हमला करने का प्रयास किया। फिर उन्होंने वनकर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। बचाव के लिए वनकर्मियों ने भी फायरिंग की।
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इस बीच सूचना पर खोराबार पुलिस और डायल 100 भी पहुंच गई, लेकिन तस्कर अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गए। फारेस्टर ने बताया कि तीन तस्करों की पहचान जंगल रामलखना निवासी गोपी, रामसिंह और महेंद्र पासवान के रूप में हुई है। बताया कि तीन नामजद और सात अज्ञात के खिलाफ खोराबार थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। एक वर्ष पूर्व भी रामलखना बीट में तस्करों और वनकर्मियों व पुलिस के बीच फायरिंग हुई थी। इसमें एक फारेस्टर घायल हो गए थे। तब पुलिस ने कई नामजद तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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अफसरों ने वनमंत्री को भी अंधेरे में रखा
पेड़ों की अवैध कटान और तस्करी का मामला ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया था। इसका संज्ञान भी वन मंत्री ने लिया था। उन्होंने जांच का आदेश देते हुए रिपोर्ट भी तलब की थी लेकिन अफसरों ने उन्हें अंधेरे में रखा और और रिपोर्ट भेज दी कि सब कुछ ठीक है। अब सूबा बीट में ही वन तस्करों ने फायरिंग कर दहशत फैला दी। इस मामले में बोलने से विभागीय अफसर बच रहे हैं। पहले की जांच रिपोर्ट पर लीपापोती क्यों की गई, इसका भी जवाब उनके पास नहीं है।