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फर्जी लाइसेंस : बिचौलिया गोपी और दरोगा का बेटा विकास गिरफ्तार

Tue, 27 Aug 2019 02:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 27 Aug 2019 02:27 AM IST
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fake license story
फर्जी लाइसेंस : बिचौलिया गोपी और दरोगा का बेटा विकास गिरफ्तार
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गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदने के मामले में सोमवार को पुलिस ने असलहा बनवाने में बिचौलिया का काम करने वाले गोपी उर्फ शमशेर आलम और महिला दरोगा के पुत्र व मेडिकल स्टोर संचालक विकास तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। गोपी के पास से पिस्टल, फर्जी लाइसेंस, कारतूस बरामद हो गया है, जबकि विकास के पास से सिर्फ लाइसेंस ही मिला है। पुलिस का कहना है कि उसने असलहा नहीं खरीदा था। पुलिस, गोपी को इस फर्जीवाड़े की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है और विकास को उसका साथी। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के बाद इनसे कई अहम सुराग हाथ लगे है, जिन पर एसआईटी काम कर रही है।
एएसपी बोत्रे रोहन प्रमोद ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि गोपी का फर्जी लाइसेंस शाहपुर के तपन गांगुली के नाम से बनी डीबीबीएल गन के यूनीकोड नंबर पर जारी किया गया था। जिसके आधार पर उसने पिस्टल खरीद ली थी। एसएसपी ने बताया कि फर्जी लाइसेंस की जांच में लगी एसआईटी को पता चला कि गोपी और विकास साथ में है और शहर छोड़कर भागने वाले हैं। इंस्पेक्टर कैंट रवि राय ने पुलिस टीम के साथ दोनों को रोडवेज तिराहे के पास से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उनकी पहचान पचपेड़वा निवासी गोपी और शाहपुर के राप्तीनगर फेज चार निवासी विकास के रूप में हुई। विकास इस प्रकरण में नामजद आरोपी था।
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गोपी के फर्जी लाइसेंस पर दर्ज है 2004 की तारीख
पुलिस ने गोपी के पास से जो फर्जी लाइसेंस बरामद किया है उस पर 2004 की तारीख दर्ज है। एएसपी ने बताया कि शाहपुर के तपन गांगुली के यूनीकोड पर लाइसेंस जारी हुआ है। तपन के नाम पर 1995 में डीबीबीएल गन का लाइसेंस जारी हुआ है। वर्तमान में उनके पास गन भी है। अवैध पिस्टल मिलने पर पुलिस ने गोपी पर आर्म्स एक्ट की धारा भी लगाई है।
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पच नहीं रहा विकास के पास असलहा ना होना
मेडिकल स्टोर संचालक विकास ने करीब दो लाख रुपये खर्च कर लाइसेंस बनवाया था। इतने रुपये खर्च करने के बाद भी उसका असलहा ना खरीदना समझ से परे है। हालांकि पुलिस का कहना है कि असलहा नहीं खरीदा था। फर्जी लाइसेंस होने की वजह से ही उसकी गिरफ्तारी की गई है। गोपी के साथ मिलकर उसने कई लोगों के असलहे भी बनवाए थे।

पहले गोपी को मान रहे थे मास्टरमाइंड
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस गोपी को मास्टरमाइंड मान रही थी। उसके पकड़ में आने के बाद कई अहम सुराग भी हाथ लगे है। लेकिन पुलिस की जांच में पता चला है कि असल मास्टरमाइंड वह नहीं है। एएसपी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि वह इस पूरे गैंग का महत्वपूर्ण सदस्य है, लेकिन मास्टरमाइंड कहना ठीक नहीं होगा। वह बिचौलिया का काम किया करता था।
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