{"_id":"57fe3b734f1c1bc67b28f025","slug":"emersion-of-durga-statue","type":"story","status":"publish","title_hn":"जयघोष के साथ विसर्जित की गईं मां शेरावाली की प्रतिमाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जयघोष के साथ विसर्जित की गईं मां शेरावाली की प्रतिमाएं
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 12 Oct 2016 07:02 PM IST
विज्ञापन
राजघाट पुल से विसर्जन के लिए लेकर जाते दूर्गा प्रतिमा।
- फोटो : Rajesh Kumar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूजा पंडालों में स्थापित मां भगवती की प्रतिमाओं का श्रद्धालुओं ने मंगलवार और बुधवार को गाजे-बाजे के साथ विसर्जन किया। शोभायात्रा में शामिल लोग अबीर-गुलाल उड़ाते हुए राप्ती नदी के राजघाट समेत अन्य घाटों पर बने अस्थाई पोखरों और नदी तक पहुंचे और नम आंखों से मां को विदा किया। विसर्जन प्रक्रिया को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी पूरी मुस्तैदी से घाट और मुख्य चौराहे पर जमे रहे।
शारदीय नवरात्र को लेकर पिछले नौ दिनों से चल रही पूजा-अर्चना की प्रक्रिया के थम जाने से और पंडालों से मां की विदाई हो जाने से शहर में सन्नाटा छा गया। पंडाल खाली हो गया तो उसमें बज रहे लाउडस्पीकर भी शांत हो गए। हालांकि शहर में फैली इस खामोशी की सारी कसर विसर्जन के लिए निकली शोभायात्रा ने पूरी कर दी। शोभा यात्रा में श्रद्धालु भक्ति धुन पर नाचते-गाते और उल्लास के साथ जयघोष करते चल रहे थे। अखाड़ा दल के लोगों का करतब सभी को आकर्षित कर रहा था। लोग उसे अचरज भरी नजरों से देख रहे थे।
विसर्जन को लेकर दुर्गाबाड़ी से लेकर राजघाट तक मां दुर्गा प्रतिमाओं की लंबी कतार लगी रही। मोहद्दीपुर, कूड़ाघाट, इंजीनियरिंग कॉलेज क्षेत्र की प्रतिमाएं पैडलेगंज राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए राजघाट पहुंचीं। काफी संख्या में प्रतिमाओं का विसर्जन एकला और मेहसरा ताल में किया गया। ट्रकों और ट्रालियों से मां की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए घाट और विसर्जन स्थल तक पहुंचने का जो सिलसिला मंगलवार की सुबह से शुरू हुआ व बुधवार की देर रात तक चलता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
शारदीय नवरात्र को लेकर पिछले नौ दिनों से चल रही पूजा-अर्चना की प्रक्रिया के थम जाने से और पंडालों से मां की विदाई हो जाने से शहर में सन्नाटा छा गया। पंडाल खाली हो गया तो उसमें बज रहे लाउडस्पीकर भी शांत हो गए। हालांकि शहर में फैली इस खामोशी की सारी कसर विसर्जन के लिए निकली शोभायात्रा ने पूरी कर दी। शोभा यात्रा में श्रद्धालु भक्ति धुन पर नाचते-गाते और उल्लास के साथ जयघोष करते चल रहे थे। अखाड़ा दल के लोगों का करतब सभी को आकर्षित कर रहा था। लोग उसे अचरज भरी नजरों से देख रहे थे।
विज्ञापन
विसर्जन को लेकर दुर्गाबाड़ी से लेकर राजघाट तक मां दुर्गा प्रतिमाओं की लंबी कतार लगी रही। मोहद्दीपुर, कूड़ाघाट, इंजीनियरिंग कॉलेज क्षेत्र की प्रतिमाएं पैडलेगंज राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए राजघाट पहुंचीं। काफी संख्या में प्रतिमाओं का विसर्जन एकला और मेहसरा ताल में किया गया। ट्रकों और ट्रालियों से मां की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए घाट और विसर्जन स्थल तक पहुंचने का जो सिलसिला मंगलवार की सुबह से शुरू हुआ व बुधवार की देर रात तक चलता रहा।
विज्ञापन