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तीमारदारों की सुविधा पर ‘बकाए’ का ताला
शिवम सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 06 Jun 2016 01:24 AM IST
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मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज परिसर में तीमारदारों की सुविधा के लिए बना आरोग्य भवन बेकार हो चुका है। बकाए में एक साल पहले कटी बिजली आज तक नहीं जोड़ी जा सकी और अब पानी की सप्लाई भी बंद हो चुकी है। ऐसे में तीमारदार यहां आते तो हैं मगर चंद घंटे रुकने के बाद ही दूसरी व्यवस्था करने में ही भलाई समझते हैं।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने 1991 में आरोग्य भवन का निर्माण कराया था। इसमें 30 कमरे बने हुए हैं। 100 रुपये एक दिन के किराए पर तीमारदारों को यहां कमरा उपलब्ध होता है। पहले आसानी से तीमारदार इसमें समय काट लेते थे मगर एक साल पहले बिजली काट दी गई। भवन के प्रभारी के मुताबिक 45 लाख रुपये का बिल बाकी है।
यह भवन जीडीए के अंडर में आता है, इस वजह से मेडिकल प्रशासन बिल नहीं भरता। वहीं बिजली न होने से यहां बने शौचालयों में अब पानी की सप्लाई भी बंद हो गई। ऐसे में कभी भूले भटके मरीज आ भी जाते हैं तो चंद घंटे बाद दूसरी व्यवस्था कर लेते हैं। इसे लेकर कॉलेज प्रशासन ने कमिश्नर को कई बार पत्र भी लिखा है मगर समाधान नहीं निकला।
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हाल को बना दिया मनोविकास केंद्र
भवन में कमरे के अलावा एक हाल भी बनाया गया था। इसमें तब 11 चारपाईयां डाली गई थीं। एक चारपाई के इस्तेमाल के लिए दस रुपये तीमारदार को देने होते थे। मगर कॉलेज प्रशासन ने इसके उपयोग को कम बताते हुए 2009 में इसमें मनोविकास केंद्र खोल दिया। इस केंद्र की बिजली भी उसी मीटर से जुड़ी है, जिससे कमरों की बिजली। ऐसे में जीडीए इसलिए भी बिल नहीं जमा कर रहा है, क्योंकि केंद्र का उपयोग मेडिकल कॉलेज करता है। बिजली कटने के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बिजली से केंद्र का काम चलाता है।
बकाया बिजली बिल जमा करने के लिए जीडीए को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। कमिश्नर से भी इसे लेकर पत्राचार किया गया है।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, प्रभारी एसआईसी
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने 1991 में आरोग्य भवन का निर्माण कराया था। इसमें 30 कमरे बने हुए हैं। 100 रुपये एक दिन के किराए पर तीमारदारों को यहां कमरा उपलब्ध होता है। पहले आसानी से तीमारदार इसमें समय काट लेते थे मगर एक साल पहले बिजली काट दी गई। भवन के प्रभारी के मुताबिक 45 लाख रुपये का बिल बाकी है।
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यह भवन जीडीए के अंडर में आता है, इस वजह से मेडिकल प्रशासन बिल नहीं भरता। वहीं बिजली न होने से यहां बने शौचालयों में अब पानी की सप्लाई भी बंद हो गई। ऐसे में कभी भूले भटके मरीज आ भी जाते हैं तो चंद घंटे बाद दूसरी व्यवस्था कर लेते हैं। इसे लेकर कॉलेज प्रशासन ने कमिश्नर को कई बार पत्र भी लिखा है मगर समाधान नहीं निकला।
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हाल को बना दिया मनोविकास केंद्र
भवन में कमरे के अलावा एक हाल भी बनाया गया था। इसमें तब 11 चारपाईयां डाली गई थीं। एक चारपाई के इस्तेमाल के लिए दस रुपये तीमारदार को देने होते थे। मगर कॉलेज प्रशासन ने इसके उपयोग को कम बताते हुए 2009 में इसमें मनोविकास केंद्र खोल दिया। इस केंद्र की बिजली भी उसी मीटर से जुड़ी है, जिससे कमरों की बिजली। ऐसे में जीडीए इसलिए भी बिल नहीं जमा कर रहा है, क्योंकि केंद्र का उपयोग मेडिकल कॉलेज करता है। बिजली कटने के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बिजली से केंद्र का काम चलाता है।
बकाया बिजली बिल जमा करने के लिए जीडीए को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। कमिश्नर से भी इसे लेकर पत्राचार किया गया है।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, प्रभारी एसआईसी