{"_id":"5d8fc0ac8ebc3e93af0f5359","slug":"dr-arvind-flat-issues-gorakhpur-city-news-gkp323522182","type":"story","status":"publish","title_hn":"44 लाख हड़पने के आरोपी डॉ. अरविंद की जमानत खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
44 लाख हड़पने के आरोपी डॉ. अरविंद की जमानत खारिज
विज्ञापन
44 लाख हड़पने के आरोपी डॉ. अरविंद की जमानत खारिज
गोरखपुर। फ्लैट देने के नाम पर 44 लाख रुपये हड़पने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कुमार प्रशांत ने तिवारी कांप्लेक्स छात्र संघ चौराहा कालेपुर निवासी डॉ अरविंद तिवारी की जमानत अर्जी अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज कर दी।
कोर्ट में जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एडीजीसी अजीत शाही का कथन था कि कैंट थाना क्षेत्र के बेतियाहाता निवासी वादी अमित गोयल को आरोपी डॉ. अरविंद तिवारी ने बताया कि सिविल लाइन गोरखपुर मोहल्ला बिलंदपुर में खाली जमीन है जिसके मालिक पारसनाथ मिश्रा है। वे उस जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनवा रहे हैं । वादी आरोपी की बातों पर विश्वास करके उस बन रहे भवन में एक फ्लैट लिखित इकरारनामा पर बुक किया। वादी और आरोपी से कुल 55 लाख रुपये में बात हुई, जिसमें से विभिन्न किस्तों चेक और नगद के माध्यम से कुल 44 लाख रुपये वादी ने आरोपी को दे दिया । जिसकी रसीद आरोपी ने वादी को दिया और कहा कि शेष रुपये मिल जाने पर आपके पक्ष में बैनामा करा दूंगा। बाद में आरोपी ने बिना वादी को बताएं वह फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति को बैनामा करा दिया। जानकारी होने पर जब वादी ने उससे रुपये वापस मांगे तो वादी ने देने से इंकार कर दिया और आरोपी उसे जान से मारने की धमकी भी दी कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
गोरखपुर। फ्लैट देने के नाम पर 44 लाख रुपये हड़पने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कुमार प्रशांत ने तिवारी कांप्लेक्स छात्र संघ चौराहा कालेपुर निवासी डॉ अरविंद तिवारी की जमानत अर्जी अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज कर दी।
कोर्ट में जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एडीजीसी अजीत शाही का कथन था कि कैंट थाना क्षेत्र के बेतियाहाता निवासी वादी अमित गोयल को आरोपी डॉ. अरविंद तिवारी ने बताया कि सिविल लाइन गोरखपुर मोहल्ला बिलंदपुर में खाली जमीन है जिसके मालिक पारसनाथ मिश्रा है। वे उस जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनवा रहे हैं । वादी आरोपी की बातों पर विश्वास करके उस बन रहे भवन में एक फ्लैट लिखित इकरारनामा पर बुक किया। वादी और आरोपी से कुल 55 लाख रुपये में बात हुई, जिसमें से विभिन्न किस्तों चेक और नगद के माध्यम से कुल 44 लाख रुपये वादी ने आरोपी को दे दिया । जिसकी रसीद आरोपी ने वादी को दिया और कहा कि शेष रुपये मिल जाने पर आपके पक्ष में बैनामा करा दूंगा। बाद में आरोपी ने बिना वादी को बताएं वह फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति को बैनामा करा दिया। जानकारी होने पर जब वादी ने उससे रुपये वापस मांगे तो वादी ने देने से इंकार कर दिया और आरोपी उसे जान से मारने की धमकी भी दी कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी निरस्त कर दिया।
विज्ञापन