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जिला अस्पताल में मानसिक रोग का इलाज ठप

Tue, 07 Mar 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Tue, 07 Mar 2017 01:54 AM IST
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distict hospital.
जिला अस्पताल में उमड़ी भीड़ - फोटो : Shivharsh Dwivedi
 जिला अस्पताल में मानसिक रोगियों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। एक साल पहले मानसिक रोग के डॉक्टर का स्थानांतरण होनेे के बाद अब तक किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। आलम है कि जनपद समेत बाहरी इलाकों से आने वाले मानसिक रोगियों को निजी अस्पताल में इलाज कराने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
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गोरखपुर जिला चिकित्सालय में मानसिक रोग के इलाज के लिए दूरदराज से मरीज आते थे, लेकिन एक साल पहले जिला अस्पताल के मानसिक रोग के डॉ. सीपी मल्ल का स्थानांतरण दूसरे जनपद में हो गया। इसके बाद से अस्पताल के मानसिक रोग की ओपीडी ठप हो गई। जिला अस्पताल में आने वाले सामान्य मरीजों का इलाज तो जिला अस्पताल के फिजिशियन कर देते हैं, जबकि गंभीर रोगियों को मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। काफी संख्या में मरीज निजी अस्पताल चले जाते हैं। जिला अस्पताल प्रशासन की तरफ से कई बार शासन को मानसिक रोग के डॉक्टर की तैनाती के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन इस मामले में अब तक कोई पहल नहीं हुई।
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ईएनटी ओटी भी दो साल से है ठप

जिला अस्पताल में दो सालों से ईएनटी (नाक, कान और गला) के मरीजों को भी निराश लौटना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में संविदा पर तैनात ईएनटी विशेषज्ञ ओपीडी के मरीजों का ही इलाज कर पाते हैं। ईएनटी डॉक्टर के पैर में तकलीफ है जिससे वह ज्यादा देर तक खड़े नहीं रह पाते। यही वजह है कि ऑपरेशन नहीं हो पा रहा। लगभग दो साल से ईएनटी की ओटी पर ताला लगा हुआ है। 
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