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जगमग हुआ शहर, लोग बोले हैप्पी दिवाली
gorakhpur
Updated Sun, 30 Oct 2016 05:36 PM IST
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शहर में दिवाली की खूब रौनक रही।
- फोटो : shivharsh
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जलाओ दीये पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए... इसी उद्देश्य के साथ रविवार को दिवाली शहर में धूमधाम से मनाई गई। घर की छतों के मुंडेर के साथ स्वागत द्वार पर दीपों की सुंदर कतार व टिमटिमाती रंग-बिरंगी लाइटों ने जहां रोशनी बिखेरी, वहीं आतिशबाजी की रंगीन चकाचौंध से महानगर गुलजार रहा। देर रात तक उत्सव व उमंग का माहौल छाया रहा। लोगों ने एक दूसरे को मुंह मीठा कराते हुए दीपावली की शुभकामनाएं दी।
लंका विजय के बाद भगवान राम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाने वाले इस पर्व के प्रति लोगों का उत्साह चरम पर था। दिन भर की साफ-सफाई के बाद शाम ढलते ही घरों और प्रतिष्ठानों में समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी व शुभ के देवता भगवान गणेश का पूरे विधि-विधान के साथ आह्वान किया गया। उसके बाद शुरू हुआ दीपों को सजाने का सिलसिला, जो देर शाम तक चलता रहा। हालांकि पटाखों की गूंज दोपहर से सुनाई देने लगी लेकिन पूजन के बाद इसमें तेजी आ गई। देर रात तक पटाखों की ध्वनि नगर में गूंजती रही। आसमान मेें एक साथ छूटते सैकड़ों राकेट, अनार, घिरनी, फुलझड़ियां माहौल को खुशनुमा बना रहे थे। शहर के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पूजा-अर्चना कर व्यवसाइयों ने कामना की कि वर्ष भर उनके यहां ग्राहकों की रुझान उनकी ओर बना रहे। उपहार देकर बधाई देने का क्रम भी देर रात तक चलता रहा।
शाम तक चलती रही खरीदारी
दिवाली के दिन भी श्हर के बाजार सुबह से ही सज गए। खरीदारों भी सुबह से बाजार मेें निकलने शुरू हो गए और यह क्रम शाम तक चलता रहा। रविवार को सर्वाधिक भीड़ लाइ-गट्टा, मिठाई व पटाखों की दुकानों पर देखने को मिली। सूखी मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स और बेसन व मोतीचूर के लड्डू के प्रति लोगों का विशेष रुझान दिखा।
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लंका विजय के बाद भगवान राम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाने वाले इस पर्व के प्रति लोगों का उत्साह चरम पर था। दिन भर की साफ-सफाई के बाद शाम ढलते ही घरों और प्रतिष्ठानों में समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी व शुभ के देवता भगवान गणेश का पूरे विधि-विधान के साथ आह्वान किया गया। उसके बाद शुरू हुआ दीपों को सजाने का सिलसिला, जो देर शाम तक चलता रहा। हालांकि पटाखों की गूंज दोपहर से सुनाई देने लगी लेकिन पूजन के बाद इसमें तेजी आ गई। देर रात तक पटाखों की ध्वनि नगर में गूंजती रही। आसमान मेें एक साथ छूटते सैकड़ों राकेट, अनार, घिरनी, फुलझड़ियां माहौल को खुशनुमा बना रहे थे। शहर के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पूजा-अर्चना कर व्यवसाइयों ने कामना की कि वर्ष भर उनके यहां ग्राहकों की रुझान उनकी ओर बना रहे। उपहार देकर बधाई देने का क्रम भी देर रात तक चलता रहा।
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शाम तक चलती रही खरीदारी
दिवाली के दिन भी श्हर के बाजार सुबह से ही सज गए। खरीदारों भी सुबह से बाजार मेें निकलने शुरू हो गए और यह क्रम शाम तक चलता रहा। रविवार को सर्वाधिक भीड़ लाइ-गट्टा, मिठाई व पटाखों की दुकानों पर देखने को मिली। सूखी मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स और बेसन व मोतीचूर के लड्डू के प्रति लोगों का विशेष रुझान दिखा।
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