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शक्तिपीठों पर उमड़ी आस्था, गूंजा जयघोष 

Sat, 01 Oct 2016 08:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sat, 01 Oct 2016 08:37 PM IST
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Devotees worshiped in temple on Navraatri
गोलघर स्थित काली मंदिर के बाहर लगी श्रद्धालुओं की लाइन। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
नवरात्र के पहले के पहले दिन शनिवार को देवी मंदिरों और शक्तिपीठों पर श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के वातावरण में विधि-विधान से मां भगवती की आराधना हुई। श्रद्धालुओें ने मां का दर्शन-पूजन कर मंगल कामना की। इस दौरान घंटा-घड़ियाल और जयघोष से वातावरण गुंजायमान रहा। उधर, घरों में लोगों ने परंपरागत ढंग से पूजा कर नवरात्र का उपवास शुरू किया।
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पहले दिन श्रद्धालु बड़े सबेरे उठे और स्नान-ध्यान के बाद तय मुहूर्त पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना कर नवरात्र व्रत का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने देवी मंदिरों और शक्तिपीठों पर पहुंचकर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया और मां के चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित की। शहर के विभिन्न हिस्सों में सज रहे मां दुर्गा पंडालों में भी आयोजकों ने विधि-विधान से कलश स्थापना की प्रक्रिया की।
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श्रद्धालुओं ने मां भगवती के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना की। बुढ़िया माई मंदिर, मां तरकुलहा देवी, गोलघर और दाउदपुर में मां काली मंदिर, तुर्कमानपुर, गोरखनाथ मंदिर समेत देवी मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन का तांता लगा रहा। मंदिर के बाहर लगी दुकानों से पूजा सामग्री और चुनरी खरीद मां के चरणों में चढ़ाया और नारियल फोड़ कर मां का आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिरों के आसपास मेले सा माहौल रहा। 
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डंका-मृदंग की धुन पर निकली कलश यात्रा

शारदीय नवरात्र के अवसर पर माता मातेश्वरी पंचपेड़वा गोरखनाथ से शनिवार को एक कलश यात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चों ने शिरकत की। बैंड, डंका, मृदंग, तुरही की धुन पर महिलाओं के द्वारा गाए गए मंगल गीत ने कलश यात्रा का आकर्षण बढ़ा दिया। यात्रा मातेश्वरी दरबार से निकलकर शहर के विभिन्न चौराहों से होते हुए वापस दरबार में जाकर संपंन हुई, जहां शंखनाद, पुष्प वर्षा और आरती के बीच कलश की स्थापना की गई। कलश स्थापना के बाद सदगुरु माता ने भारतीय संस्कार से विलुप्त हो रही परंपरा पर प्रकाश डाला और उसे विलुप्त होने से बचाने को कहा। इस दौरान अजय श्रीवास्तव, राजदेव जायसवाल, अरुण त्रिपाठी, सुनील, रामलखन, विनय कुमार वैश्य, गणेश शर्मा, फूलचंद शर्मा, रंजीत कुशवाहा, आलोक राय आदि मौजूद रहे। 
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