{"_id":"5839e9dd4f1c1bd14d13b534","slug":"delivery-before-its-certain-time-is-dangerous","type":"story","status":"publish","title_hn":"समय से पहले प्रसव घातक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समय से पहले प्रसव घातक
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 27 Nov 2016 01:30 AM IST
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज में गायनी विभाग द्वारा आयोजित सेमिनार में उपस्थित लोग।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीआरडी मेडिकल कालेज में चल रहे तीन दिवसीय गायनोलॉजिस्ट सेमिनार के दूसरे दिन महिलाओं से जुड़े कई रोगों के बारे में बारह विशेषज्ञों ने नई तकनीक के बारे में से जानकारी दी। डॉक्टरों ने बताया कि समय से पहले प्रसव मां और बच्चे के लिए घातक है। इस मौके पर पीजी के लगभग 80 छात्रों ने शोध प्रस्तुत किया। देर शाम गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अशोक कुमार और डीजीएमई डॉक्टर वीएन तिवारी ने दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ रीना श्रीवास्तव ने बताया कि इस दौरान स्त्री व प्रसूता रोग विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। डॉ. एन राजा महेश्वरी ने बच्चेदानी को लेकर विशिष्ट आधुनिक विधि के बारे में जानकारी दी। डॉक्टर उमा सिंह ने बच्चेदानी के कैंसर के बारे में विस्तृत जानकारी दी। सेमीनार में केजीएमयू के गायनी विभाग की प्रो. पीएल शंखवार ने बताया कि करीब 15 फीसदी गर्भवतियों को समय पूर्व प्रसव होता है। इसमें जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा होता है। इस दौरान डॉ. प्रताप कुमार, डॉ. किरन पांडेय, डॉ. सुमित्रा पंडित, डॉ. आर जीना, डॉ. मधु गुलाटी, डॉ. सेठ. डॉ आराधना सिंह, डॉ. वाणी आदित्य आदि विशेषज्ञ मौजूद थे।
विज्ञापन
स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ रीना श्रीवास्तव ने बताया कि इस दौरान स्त्री व प्रसूता रोग विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। डॉ. एन राजा महेश्वरी ने बच्चेदानी को लेकर विशिष्ट आधुनिक विधि के बारे में जानकारी दी। डॉक्टर उमा सिंह ने बच्चेदानी के कैंसर के बारे में विस्तृत जानकारी दी। सेमीनार में केजीएमयू के गायनी विभाग की प्रो. पीएल शंखवार ने बताया कि करीब 15 फीसदी गर्भवतियों को समय पूर्व प्रसव होता है। इसमें जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा होता है। इस दौरान डॉ. प्रताप कुमार, डॉ. किरन पांडेय, डॉ. सुमित्रा पंडित, डॉ. आर जीना, डॉ. मधु गुलाटी, डॉ. सेठ. डॉ आराधना सिंह, डॉ. वाणी आदित्य आदि विशेषज्ञ मौजूद थे।
विज्ञापन