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प्रदेश में सबसे ज्यादा साइबर ठगी गोरखपुर में
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भारतीय रिजर्व बैंक, बैकिंग लोकपाल कार्यालय कानपुर द्वारा शहर के एक स्थानी रेस्टोरेंट में आयोजि
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प्रदेश में सबसे ज्यादा साइबर ठगी गोरखपुर में
गोरखपुर। प्रदेश में सबसे ज्यादा साइबर ठगी के शिकार गोरखपुर के लोग हो रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बैंकिंग लोकपाल कार्यालय कानपुर को प्राप्त आंकड़े बैंकिंग से जुड़े अधिकारियों के लिए चिंता के सबब बने हुए हैं। इसको देखते हुए आरबीआई बैंकिंग लोकपाल कार्यालय ने गोष्ठी का आयोजन कर शहर को लोगों को साइबर अपराध से बचने संबंधी जानकारी दी।
सिटी माल रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डीजीएम व सचिव बैंकिंग लोकपाल एसके दास ने कहा कि अब ऑनलाइन बैंकिंग के दौर में कई तरह की चुनौतियां और खतरे भी हैं। बैंकिंग संबंधी गुप्त जानकारियां साझा कर लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। सहायक सचिव बैंकिंग लोकपाल कार्यालय राजेश पुरी ने बताया कि पूरे प्रदेश में साइबर ठगी के सबसे ज्यादा मामले गोरखपुर में हुए हैं। कोशिश है कि जागरूकता कार्यक्रम के जरिए यहां के ज्यादा से ज्यादा लोगों को साइबर ठगी से बचने का उपाय बताया जाए। पूर्वांचल में कई अन्य स्थानों पर भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस दौरान भारतीय स्टेट बैंक गोरखपुर के डीजीएम पीसी बरोड़, क्षेत्रीय प्रबंधक मयंक शेखर ठाकुर, गौरव श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
गेमिंग एप भी बन रहे हैं ठगी का जरिया
एसके दास ने कहा कि साइबर ठगों की ओर से इस्तेमाल में लाए जा रहे नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। ‘एनी डेस्क’ एप बहुत ही खतरनाक है। इसके जरिए साइबर अपराधी बैंकिंग संबंधी डाटा हैक कर लेते हैं। अब तो गेमिंग एप भी साइबर अपराधियों के लिए मुफीद हो गए हैं। गूगल के जरिए किसी ब्राउजर को लॉग-इन न करें। बताया कि कोई भी बैंक या आरबीआई खाताधारक से बैंकिंग संबंधी गुप्त जानकारी नहीं मांगता है। इसलिए मोबाइल या टेलीफोन पर फोन करके बैंकिंग संबंधी जानकारी मांगने वालों को कोई जानकारी न दें। शाखा प्रबंधक से जाकर मिलें।
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बैंकिंग लोकपाल में इन मामलों की कर सकते हैं शिकायत
चेक, ड्राफ्ट, बिल, आवक प्रेषणों, बैंकर्स चेक जारी करने में असाधारण विलंब होने और वसूली करने या
बिना किसी वैध कारण खाता खोलने या बंद करने से इंकार करने पर
एटीएम, पीओएस द्वारा राशि नहीं निकलने के बावजूद खाते से पैसे कट जाने पर
ऑनलाइन भुगतान या निधि से पैसे निकालने में देरी या विफलता पर
जीवन भर के लिए निशुल्क जारी किए गए कार्ड पर वार्षिक शुल्क लगने पर
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गोरखपुर। प्रदेश में सबसे ज्यादा साइबर ठगी के शिकार गोरखपुर के लोग हो रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बैंकिंग लोकपाल कार्यालय कानपुर को प्राप्त आंकड़े बैंकिंग से जुड़े अधिकारियों के लिए चिंता के सबब बने हुए हैं। इसको देखते हुए आरबीआई बैंकिंग लोकपाल कार्यालय ने गोष्ठी का आयोजन कर शहर को लोगों को साइबर अपराध से बचने संबंधी जानकारी दी।
सिटी माल रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डीजीएम व सचिव बैंकिंग लोकपाल एसके दास ने कहा कि अब ऑनलाइन बैंकिंग के दौर में कई तरह की चुनौतियां और खतरे भी हैं। बैंकिंग संबंधी गुप्त जानकारियां साझा कर लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। सहायक सचिव बैंकिंग लोकपाल कार्यालय राजेश पुरी ने बताया कि पूरे प्रदेश में साइबर ठगी के सबसे ज्यादा मामले गोरखपुर में हुए हैं। कोशिश है कि जागरूकता कार्यक्रम के जरिए यहां के ज्यादा से ज्यादा लोगों को साइबर ठगी से बचने का उपाय बताया जाए। पूर्वांचल में कई अन्य स्थानों पर भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस दौरान भारतीय स्टेट बैंक गोरखपुर के डीजीएम पीसी बरोड़, क्षेत्रीय प्रबंधक मयंक शेखर ठाकुर, गौरव श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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गेमिंग एप भी बन रहे हैं ठगी का जरिया
एसके दास ने कहा कि साइबर ठगों की ओर से इस्तेमाल में लाए जा रहे नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। ‘एनी डेस्क’ एप बहुत ही खतरनाक है। इसके जरिए साइबर अपराधी बैंकिंग संबंधी डाटा हैक कर लेते हैं। अब तो गेमिंग एप भी साइबर अपराधियों के लिए मुफीद हो गए हैं। गूगल के जरिए किसी ब्राउजर को लॉग-इन न करें। बताया कि कोई भी बैंक या आरबीआई खाताधारक से बैंकिंग संबंधी गुप्त जानकारी नहीं मांगता है। इसलिए मोबाइल या टेलीफोन पर फोन करके बैंकिंग संबंधी जानकारी मांगने वालों को कोई जानकारी न दें। शाखा प्रबंधक से जाकर मिलें।
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बैंकिंग लोकपाल में इन मामलों की कर सकते हैं शिकायत
चेक, ड्राफ्ट, बिल, आवक प्रेषणों, बैंकर्स चेक जारी करने में असाधारण विलंब होने और वसूली करने या
बिना किसी वैध कारण खाता खोलने या बंद करने से इंकार करने पर
एटीएम, पीओएस द्वारा राशि नहीं निकलने के बावजूद खाते से पैसे कट जाने पर
ऑनलाइन भुगतान या निधि से पैसे निकालने में देरी या विफलता पर
जीवन भर के लिए निशुल्क जारी किए गए कार्ड पर वार्षिक शुल्क लगने पर