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कैंसर विभाग में भिड़े दो डॉक्टर, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 10 Sep 2016 07:37 PM IST
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मेडिकल कालेज।
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मेडिकल कॉलेज के रेडियो आंकोलॉजी (कैंसर) विभाग में शनिवार को विभागाध्यक्ष और असिस्टेंट प्रोफेसर के बीच बंद कमरे में जमकर विवाद हुआ। इसके चलते मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। बताया जा रहा है कि बीते छह दिनों से विभाग की ओपीडी चल ही नहीं रही थी। इसी बात को लेकर विभागाध्यक्ष डॉ. एमक्यू वेग ने डॉ. राकेश रावत से जवाब मांगा तो दोनों में विवाद हो गया।
शनिवार सुबह डॉ. राकेश रावत ओपीडी में बैठे थे और मरीजों की लाइन लगी थी। विभागाध्यक्ष डॉ. एमक्यू वेग उसी समय डॉ. राकेश के पास पहुंचे और बीते दिनों बिना बताए छुट्टी पर जाने की वजह पूछने लगे। इसी बात पर दोनों में बहस शुरू हो गई। इसकी खबर पाकर पहुंचे सीनियर डॉक्टरों ने मामले को शांत कराया। विवाद के डॉ. वेग ने बिना बताए छुट्टी पर जाने को लेकर डॉ. राकेश को नोटिस दिया है। इसके पहले डॉ. वेग ने बिना बताए छुट्टी पर गए डॉक्टर को गैरहाजिर कर दिया था। उधर, डॉ. राकेश की मानें तो बिना बात पर ही विभागाध्यक्ष दबाव बना रहे थे। वह खुद छुट्टी पर थे, जिससे छुट्टी का प्रार्थना पत्र उन्हें नहीं दे सका। इसके चलते शनिवार को भी अधिकतर मरीज लौट गए। कैंसर विभाग में यही दो डॉक्टर हैं और दोनों के न रहने से तीन से नौ सितंबर तक ओपीडी ठप रही थी।
तीन से नौ सितंबर तक लखनऊ में एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल होेने के लिए मैं गया था। नौ की शाम को आया तो मुझे मालूम हुआ कि तीन सितंबर से ही डॉ. राकेश भी नहीं आ रहे हैं और ओपीडी नहीं चल रही थी। इस बारे में पूछने पर वह अचानक उखड़ गए। कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे बिना बताए छुट्टी पर जाने की वजह पूछी गई है। शनिवार को भी मरीज के सामने बहस करने लगे तो मैंने मना किया। फिर ओपीडी भी छोड़कर जा रहे थे मगर मैंने मरीज देखने को कहा तो लौट आए। यही नहीं सोशल मीडिया पर भी इस बात को डॉक्टर द्वारा पोस्ट किया गया है जो कानूनी अपराध है, क्योंकि किसी भी सरकारी कार्यप्रणाली को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है।
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- डॉ. एमक्यू वेग, विभागाध्यक्ष, रेडियो आंकोलॉजी
एक सितंबर को फोन पर ही मैंने छुट्टी की जानकारी दे दी थी। इसके बाद प्रार्थना पत्र भी भेजा था। मगर विभागाध्यक्ष ने मुझे गैरहाजिर कर दिया। शनिवार को ओपीडी में मरीज देख रहा था तभी वह आए और उलझ गए। कमरा बंद कर मुझे मारने का भी प्रयास किया और मरीजों को भी भगा दिया। मेरा मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
-डॉ. राकेश रावत, असिस्टेंट प्रोफेसर
मामला बेहद गंभीर है। मामले की जांच कर दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य
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शनिवार सुबह डॉ. राकेश रावत ओपीडी में बैठे थे और मरीजों की लाइन लगी थी। विभागाध्यक्ष डॉ. एमक्यू वेग उसी समय डॉ. राकेश के पास पहुंचे और बीते दिनों बिना बताए छुट्टी पर जाने की वजह पूछने लगे। इसी बात पर दोनों में बहस शुरू हो गई। इसकी खबर पाकर पहुंचे सीनियर डॉक्टरों ने मामले को शांत कराया। विवाद के डॉ. वेग ने बिना बताए छुट्टी पर जाने को लेकर डॉ. राकेश को नोटिस दिया है। इसके पहले डॉ. वेग ने बिना बताए छुट्टी पर गए डॉक्टर को गैरहाजिर कर दिया था। उधर, डॉ. राकेश की मानें तो बिना बात पर ही विभागाध्यक्ष दबाव बना रहे थे। वह खुद छुट्टी पर थे, जिससे छुट्टी का प्रार्थना पत्र उन्हें नहीं दे सका। इसके चलते शनिवार को भी अधिकतर मरीज लौट गए। कैंसर विभाग में यही दो डॉक्टर हैं और दोनों के न रहने से तीन से नौ सितंबर तक ओपीडी ठप रही थी।
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तीन से नौ सितंबर तक लखनऊ में एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल होेने के लिए मैं गया था। नौ की शाम को आया तो मुझे मालूम हुआ कि तीन सितंबर से ही डॉ. राकेश भी नहीं आ रहे हैं और ओपीडी नहीं चल रही थी। इस बारे में पूछने पर वह अचानक उखड़ गए। कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे बिना बताए छुट्टी पर जाने की वजह पूछी गई है। शनिवार को भी मरीज के सामने बहस करने लगे तो मैंने मना किया। फिर ओपीडी भी छोड़कर जा रहे थे मगर मैंने मरीज देखने को कहा तो लौट आए। यही नहीं सोशल मीडिया पर भी इस बात को डॉक्टर द्वारा पोस्ट किया गया है जो कानूनी अपराध है, क्योंकि किसी भी सरकारी कार्यप्रणाली को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है।
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- डॉ. एमक्यू वेग, विभागाध्यक्ष, रेडियो आंकोलॉजी
एक सितंबर को फोन पर ही मैंने छुट्टी की जानकारी दे दी थी। इसके बाद प्रार्थना पत्र भी भेजा था। मगर विभागाध्यक्ष ने मुझे गैरहाजिर कर दिया। शनिवार को ओपीडी में मरीज देख रहा था तभी वह आए और उलझ गए। कमरा बंद कर मुझे मारने का भी प्रयास किया और मरीजों को भी भगा दिया। मेरा मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
-डॉ. राकेश रावत, असिस्टेंट प्रोफेसर
मामला बेहद गंभीर है। मामले की जांच कर दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य