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दूसरे चरण में फेल हुआ ‘ऑपरेशन स्माइल’
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Feb 2016 10:05 PM IST
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लापता बच्चों को ढूंढने के लिए चलाया गया ‘ऑपरेशन स्माइल’ का दूसरा चरण फेल हो गया है। गोरखपुर और बस्ती मंडल के सात जिलों के पुलिस अधिकारियों के ऑपरेशन में दिलचस्पी न लेने से अधिकारी नाराज हैं। आईजी ने सभी पुलिस कप्तानों को पत्र लिख लापता बच्चों को ढूंढने के लिए सीओ के साथ ही थानेदार की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी तक ‘ऑपरेशन स्माइल’ अभियान चलाया गया। गोरखपुर के साथ ही बस्ती मंडल के सातों जिलों के पुलिस अधिकारियों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। इसकी वजह से अभियान को आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिल पाई। इसके तहत वर्ष 2012 से लापता चल रहे गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर से लापता हुए 113 बच्चों में मात्र 10 का ही पता चल सका है। इसमें पांच अकेले गोरखपुर के हैं। अभियान पूरा होने के बाद सभी जिलों से भेजी गई रिपोर्ट से अधिकारी नाराज हैं।
आईजी एचआर शर्मा ने सभी पुलिस कप्तानों से लापता बच्चों के मामले को गंभीरता से लेने को कहा है। आईजी के निर्देश के बाद सीओ और एसओ से व्यक्तिगत रुचि लेकर लापता बच्चों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए कहा गया है।
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लापता बच्चों का विवरण
जिला ----- लापता --- बरामद ----- शेष
गोरखपुर ----- 32 ----- 05 ----- 27
देवरिया ----- 08 ----- 02 ----- 06
कुशीनगर ----- 04 ----- 00 ----- 04
महराजगंज ----- 01 ----- 00 ----- 01
बस्ती ----- 29 ----- 01 ----- 28
संतकबीरनगर --23 ----- 02 ----- 21
सिद्धार्थनगर ----- 16 ----- 00 ----- 16
ऑपरेशन स्माइल के दूसरे चरण का परिणाम सकारात्मक नहीं रहा है। सभी जिलों के पुलिस कप्तान से लापता बच्चों के मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर बरामदगी का प्रयास करने को निर्देश दिया है। - एचआर शर्मा, आईजी
परिवार ने छोड़ दी बेटी के मिलने की उम्मीद
घर से निकली कक्षा 11 की छात्रा साढ़े तीन साल पहले लापता हो गई थी। परिवार के लोगों ने रिश्तेदार, परिचितों के साथ ही आसपास के जिलों में उसकी तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चला। पिता ने बड़हलगंज थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया लेकिन कुछ पता नहीं चला। स्थानीय पुलिस ने भी मामले में दिलचस्पी नहीं ली। व्यवस्था से खिन्न परिवार के लोगों ने बेटी के मिलने की आस ही छोड़ दी है।
दूसरा मामला बड़हलगंज, महुलिया कोयल गांव का है। यहां के निवासी राजेंद्र प्रसाद मजदूरी करते हैं। कक्षा 11 में पढ़ने वाली उनकी 17 साल की बेटी नीलम अगस्त 2012 में घर से कॉलेज जाने के बाद वापस नहीं लौटी। परेशान परिवार के लोगों ने बेटी की तलाश रिश्तेदारों के साथ ही मऊ, आजमगढ़ जिले में की। न्याय की उम्मीद में पिता ने बड़हलगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। एसओ, सीओ के साथ ही एसपी के ऑफिस आकर परिवार के लोगों ने नीलम को बरामद करने का आग्रह किया लेकिन कुछ पता नहीं चला। साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी बेटी का कुछ पता न चलने पर परिवार के लोगों ने अब बेटी के मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी है।
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एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी तक ‘ऑपरेशन स्माइल’ अभियान चलाया गया। गोरखपुर के साथ ही बस्ती मंडल के सातों जिलों के पुलिस अधिकारियों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। इसकी वजह से अभियान को आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिल पाई। इसके तहत वर्ष 2012 से लापता चल रहे गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर से लापता हुए 113 बच्चों में मात्र 10 का ही पता चल सका है। इसमें पांच अकेले गोरखपुर के हैं। अभियान पूरा होने के बाद सभी जिलों से भेजी गई रिपोर्ट से अधिकारी नाराज हैं।
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आईजी एचआर शर्मा ने सभी पुलिस कप्तानों से लापता बच्चों के मामले को गंभीरता से लेने को कहा है। आईजी के निर्देश के बाद सीओ और एसओ से व्यक्तिगत रुचि लेकर लापता बच्चों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए कहा गया है।
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लापता बच्चों का विवरण
जिला ----- लापता --- बरामद ----- शेष
गोरखपुर ----- 32 ----- 05 ----- 27
देवरिया ----- 08 ----- 02 ----- 06
कुशीनगर ----- 04 ----- 00 ----- 04
महराजगंज ----- 01 ----- 00 ----- 01
बस्ती ----- 29 ----- 01 ----- 28
संतकबीरनगर --23 ----- 02 ----- 21
सिद्धार्थनगर ----- 16 ----- 00 ----- 16
ऑपरेशन स्माइल के दूसरे चरण का परिणाम सकारात्मक नहीं रहा है। सभी जिलों के पुलिस कप्तान से लापता बच्चों के मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर बरामदगी का प्रयास करने को निर्देश दिया है। - एचआर शर्मा, आईजी
परिवार ने छोड़ दी बेटी के मिलने की उम्मीद
घर से निकली कक्षा 11 की छात्रा साढ़े तीन साल पहले लापता हो गई थी। परिवार के लोगों ने रिश्तेदार, परिचितों के साथ ही आसपास के जिलों में उसकी तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चला। पिता ने बड़हलगंज थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया लेकिन कुछ पता नहीं चला। स्थानीय पुलिस ने भी मामले में दिलचस्पी नहीं ली। व्यवस्था से खिन्न परिवार के लोगों ने बेटी के मिलने की आस ही छोड़ दी है।
दूसरा मामला बड़हलगंज, महुलिया कोयल गांव का है। यहां के निवासी राजेंद्र प्रसाद मजदूरी करते हैं। कक्षा 11 में पढ़ने वाली उनकी 17 साल की बेटी नीलम अगस्त 2012 में घर से कॉलेज जाने के बाद वापस नहीं लौटी। परेशान परिवार के लोगों ने बेटी की तलाश रिश्तेदारों के साथ ही मऊ, आजमगढ़ जिले में की। न्याय की उम्मीद में पिता ने बड़हलगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। एसओ, सीओ के साथ ही एसपी के ऑफिस आकर परिवार के लोगों ने नीलम को बरामद करने का आग्रह किया लेकिन कुछ पता नहीं चला। साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी बेटी का कुछ पता न चलने पर परिवार के लोगों ने अब बेटी के मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी है।