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सीओ और महिला दरोगा पर जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 08 Jun 2016 01:13 AM IST
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दहेज
- फोटो : demo pic
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विवाहिता की शिकायत पर कार्रवाई न करने वाले सीओ और महिला दारोगा पर जुर्माना लगाया गया गया है। मानवाधिकार आयोग ने इस मामले की जांच में पुलिस वालों को दोषी पाया हैं। अपनी रिपोर्ट में आयोग ने कहा है कि दोषी पुलिसकर्मियों अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया। बाद में संदिग्ध हालत में विवाहिता की मौत हो गई।
मामला तीन साल पुराना हैं। चौरीचौरा क्षेत्र की संजू ने थाने में दहेज उत्पीड़न की शिकायत की। मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उसने महिला थाने में भी शिकायत की थी। तब शीला यादव प्रभारी थीं और उन्होंने भी महिला की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। खुद के प्रताड़ना की शिकायत लेकर महिला भटकती रही। इसी बीच संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई।
महिला के पिता ने सूचना दी मगर पुलिस ने इस बार भी कोई कार्रवाई नहीं की और मामले को मैनेज कराने में जुटी रही। पुलिस ने जब इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो पीड़ित पिता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने ससुराल वालों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया था।
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विवेचना के दौरान यह सामने आया है कि महिला की हत्या की गई थी। पिता ने मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की थी। शिकायत के बाद आयोग की ओर से जांच की गई तो तत्कालीन सीओ विजय शंकर पांडेय, दारोगा शीला यादव, ज्ञान प्रकाश पाठक दोषी पाए गए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि यदि शिकायत को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की गई होती जो महिला की जान बच सकती थी। आयोग ने डीजीपी को रिपोर्ट भेजकर आर्थिक जुर्माने की वसूली कर पीड़ित परिवार को देने और पुलिस वालों पर विभागीय कार्रवाई करने को कहा है।
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मामला तीन साल पुराना हैं। चौरीचौरा क्षेत्र की संजू ने थाने में दहेज उत्पीड़न की शिकायत की। मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उसने महिला थाने में भी शिकायत की थी। तब शीला यादव प्रभारी थीं और उन्होंने भी महिला की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। खुद के प्रताड़ना की शिकायत लेकर महिला भटकती रही। इसी बीच संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई।
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महिला के पिता ने सूचना दी मगर पुलिस ने इस बार भी कोई कार्रवाई नहीं की और मामले को मैनेज कराने में जुटी रही। पुलिस ने जब इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो पीड़ित पिता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने ससुराल वालों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया था।
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विवेचना के दौरान यह सामने आया है कि महिला की हत्या की गई थी। पिता ने मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की थी। शिकायत के बाद आयोग की ओर से जांच की गई तो तत्कालीन सीओ विजय शंकर पांडेय, दारोगा शीला यादव, ज्ञान प्रकाश पाठक दोषी पाए गए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि यदि शिकायत को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की गई होती जो महिला की जान बच सकती थी। आयोग ने डीजीपी को रिपोर्ट भेजकर आर्थिक जुर्माने की वसूली कर पीड़ित परिवार को देने और पुलिस वालों पर विभागीय कार्रवाई करने को कहा है।