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एजेंट को दफ्तर में बंद भागे रीयल स्टेट कंपनी के कारिंदे
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 26 Apr 2016 01:27 AM IST
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अर्थ लैंड इंडिया डेवलपर्स लिमिटेड के दफ्तर में बंधक पंकज गुप्ता के पैर से रस्सी खोलती पुलिस।
- फोटो : shivharsh
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रीयल स्टेट और वित्तीय कामों में दखल रखने वाली निजी कंपनी के कारिंदों ने भुगतान लेने आए अपने ही एजेंट को हाथ-पैर और मुंह बांधकर दफ्तर में कैद कर लिया। पूरे दिन बहाने से दफ्तर में बैठाए रखने के बाद बंधक बनाकर दफ्तर में बाहर से ताला डालकर सभी कारिंदे भाग गए। बंधक शख्स ने किसी तरह 100 नंबर पर रिंग करके पुलिस को सूचना दी तो रात में ताला तोड़कर उसे करीब तीन घंटे बाद आजाद कराया जा सका।
घटनाक्रम तारामंडल रोड स्थित बुद्ध बिहार कॉलोनी में अर्थ क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी का दफ्तर है। इस कंपनी में बतौर एजेंट काम करने वाले अंबेडकरनगर के पैकोली निवासी पंकज गुप्ता के मुताबिक रीयल स्टेट और वित्तीय प्लान का काम करने वाली इस कंपनी से वह साल 2014 से जुड़ा है। अंबेडकर नगर, फैजाबाद आदि में 100 से ज्यादा लोगों के जरिए उसने 30 लाख रुपये से अधिक के इन्वेस्टमेंट प्लान कंपनी को दिलाए थे।
इनकी परिपक्वता पूरी हो जाने पर वह ग्राहकों के भुगतान की रकम के लिए कई दिनों से इस दफ्तर के चक्कर लगा रहा था। शनिवार को आने पर कैशियर विकास सिंह ने सोमवार को पेमेंट दिलाने के भरोसे पर उसे लौटा दिया था। सोमवार की सुबह आठ बजे वह फिर दफ्तर पहुंचा तो कैशियर विकास ने रात तक रकम उपलब्ध कराने के वादे के साथ रुकने की सलाह दी।
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रात आठ बजे के आसपास विकास रकम लेकर आने का भरोसा देकर दफ्तर से बाहर गए और कुछ देर बाद दो साथियों को लेकर वापस पहुंचते ही फिटिंग में इस्तेमाल होने वाले बिजली के तार से उसके हाथ-पैर बांधना शुरू कर दिए। चिल्लाने की कोशिश पर टेप चिपकाकर मुंह सील कर दिया। जेब से मोबाइल फोन निकालकर स्विच आफ किया और आलमारी में बंद कर दिया। हाथ-पांव बंध जाने से वह फर्श पर गिर पड़ा। इसके बाद सभी दफ्तर में बाहर से ताला डालकर चले गए।
घिसटते हुए वह दफ्तर में मौजूद पीएंडटी के फोन तक पहुंचा। इस बीच तारों की पकड़ ढीली होने से हाथ खोलने और मुंह से टेप हटाने में कामयाबी मिल गई तो फोन करके पुलिस को सूचना दी। रात करीब 11 बजे नायब तहसीलदार के साथ पहुंचे इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह वहां पहुंचे। पुलिस ने बंद शटर का ताला तुड़वाकर भीतर प्रवेश किया और उसे आजाद कराया।
पुलिस को दिए बयान में पंकज ने बताया है कि कंपनी के सीएमडी आलोक पांडेय बेलीपार मलाव में रहते हैं। गोरखपुर के अलावा फैजाबाद, लखनऊ, फतेहपुर, नौतनवां, आजमगढ़ और खटीमा में कंपनी की ब्रांच है। राजस्थान के जोधपुर में इसका मुख्य आफिस है। इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह ने बताया आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
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घटनाक्रम तारामंडल रोड स्थित बुद्ध बिहार कॉलोनी में अर्थ क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी का दफ्तर है। इस कंपनी में बतौर एजेंट काम करने वाले अंबेडकरनगर के पैकोली निवासी पंकज गुप्ता के मुताबिक रीयल स्टेट और वित्तीय प्लान का काम करने वाली इस कंपनी से वह साल 2014 से जुड़ा है। अंबेडकर नगर, फैजाबाद आदि में 100 से ज्यादा लोगों के जरिए उसने 30 लाख रुपये से अधिक के इन्वेस्टमेंट प्लान कंपनी को दिलाए थे।
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इनकी परिपक्वता पूरी हो जाने पर वह ग्राहकों के भुगतान की रकम के लिए कई दिनों से इस दफ्तर के चक्कर लगा रहा था। शनिवार को आने पर कैशियर विकास सिंह ने सोमवार को पेमेंट दिलाने के भरोसे पर उसे लौटा दिया था। सोमवार की सुबह आठ बजे वह फिर दफ्तर पहुंचा तो कैशियर विकास ने रात तक रकम उपलब्ध कराने के वादे के साथ रुकने की सलाह दी।
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रात आठ बजे के आसपास विकास रकम लेकर आने का भरोसा देकर दफ्तर से बाहर गए और कुछ देर बाद दो साथियों को लेकर वापस पहुंचते ही फिटिंग में इस्तेमाल होने वाले बिजली के तार से उसके हाथ-पैर बांधना शुरू कर दिए। चिल्लाने की कोशिश पर टेप चिपकाकर मुंह सील कर दिया। जेब से मोबाइल फोन निकालकर स्विच आफ किया और आलमारी में बंद कर दिया। हाथ-पांव बंध जाने से वह फर्श पर गिर पड़ा। इसके बाद सभी दफ्तर में बाहर से ताला डालकर चले गए।
घिसटते हुए वह दफ्तर में मौजूद पीएंडटी के फोन तक पहुंचा। इस बीच तारों की पकड़ ढीली होने से हाथ खोलने और मुंह से टेप हटाने में कामयाबी मिल गई तो फोन करके पुलिस को सूचना दी। रात करीब 11 बजे नायब तहसीलदार के साथ पहुंचे इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह वहां पहुंचे। पुलिस ने बंद शटर का ताला तुड़वाकर भीतर प्रवेश किया और उसे आजाद कराया।
पुलिस को दिए बयान में पंकज ने बताया है कि कंपनी के सीएमडी आलोक पांडेय बेलीपार मलाव में रहते हैं। गोरखपुर के अलावा फैजाबाद, लखनऊ, फतेहपुर, नौतनवां, आजमगढ़ और खटीमा में कंपनी की ब्रांच है। राजस्थान के जोधपुर में इसका मुख्य आफिस है। इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह ने बताया आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।