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दो दिन ट्रेन में घूमती रही रेलवे कर्मचारी की लाश
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 29 Jan 2017 12:58 AM IST
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- फोटो : pti
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गोमती एक्सप्रेस में एक रेलवे कर्मचारी की रहस्यमयी हालात में मौत हो गई और दो दिन तक शव ट्रेन में ही पड़ा रहा। ट्रेन लखनऊ से गोरखपुर आई और वापस लखनऊ रवाना भी हो गई, मगर किसी की नजर शव पर नहीं पड़ी। आनंदनगर स्टेशन पहुंचने पर एक यात्री ने शव देखा तो उसने जीआरपी को सूचना दी। दो दिनों से कर्मचारी के घर आने का इंतजार कर रहे परिवार वालों को जब मौत की खबर मिली तो कोहराम मच गया।
चिलुआताल इलाके के मानीराम, सिक्टौर गांव के नारद रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। उनकी तैनाती लखनऊ जंक्शन पर थी। बुधवार शाम को गोमती एक्सप्रेस में वह गोरखपुर आने के लिए सवार हुए थे। रहस्यमय हालात में ट्रेन में ही उनकी मौत हो गई। इधर घरवाले उनके इंतजार में परेशान थे। बृहस्पतिवार की रात ट्रेन गोरखपुर से वापस लखनऊ लौट गई। जब आनंदनगर स्टेशन से ट्रेन आगे बढ़ी तब एक यात्री ने नारद के शव को देखा और बढ़नी रेलवे स्टेशन पहुंचकर रेलवे कर्मचारियों को सूचना दी।
शव को ट्रेन से उतारा जाता कि इस बीच ट्रेन तुलसीपुर स्टेशन पहुंच गई, जहां जीआरपी ने शव उतारकर तलाशी ली तो शर्ट की जेब में नारद का परिचय पत्र मिला। उसके आधार पर जीआरपी ने घरवालों को सूचना दी। शुक्रवार की सुबह मौत की खबर जब नारद के घर पहुंची तो कोहराम मच गया। एक बेटा और दो बेटियों के पिता नारद की मौत पर घरवाले यकीन ही नहीं कर पा रहे थे। पिता के निधन के बाद नारद को नौकरी मिली थी।
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चिलुआताल इलाके के मानीराम, सिक्टौर गांव के नारद रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। उनकी तैनाती लखनऊ जंक्शन पर थी। बुधवार शाम को गोमती एक्सप्रेस में वह गोरखपुर आने के लिए सवार हुए थे। रहस्यमय हालात में ट्रेन में ही उनकी मौत हो गई। इधर घरवाले उनके इंतजार में परेशान थे। बृहस्पतिवार की रात ट्रेन गोरखपुर से वापस लखनऊ लौट गई। जब आनंदनगर स्टेशन से ट्रेन आगे बढ़ी तब एक यात्री ने नारद के शव को देखा और बढ़नी रेलवे स्टेशन पहुंचकर रेलवे कर्मचारियों को सूचना दी।
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शव को ट्रेन से उतारा जाता कि इस बीच ट्रेन तुलसीपुर स्टेशन पहुंच गई, जहां जीआरपी ने शव उतारकर तलाशी ली तो शर्ट की जेब में नारद का परिचय पत्र मिला। उसके आधार पर जीआरपी ने घरवालों को सूचना दी। शुक्रवार की सुबह मौत की खबर जब नारद के घर पहुंची तो कोहराम मच गया। एक बेटा और दो बेटियों के पिता नारद की मौत पर घरवाले यकीन ही नहीं कर पा रहे थे। पिता के निधन के बाद नारद को नौकरी मिली थी।
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