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बड़े सपने बुनने में कर्जदार हुए रमेश
Mon, 04 Feb 2019 12:29 AM IST
ajay Kumar
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: ajay Kumar
Updated Mon, 04 Feb 2019 12:29 AM IST
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राजघाट थाना क्षेत्र के लालडिग्गी में एक व्यवसाई परिवार के सामूहिक आत्महत्या के बाद रोते बिलखते परिजन।
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। रमेश गुप्ता बड़े सपने बुनने के चक्कर में कंगाल होते चले गए। नमकीन का कारोबार बढ़िया चला तो उन्होंने घी-तेल का भी कारोबार शुरू कर दिया। यहीं से उनकी मुसीबतें शुरू हो गईं। घी-तेल का कारोबार तो परवान नहीं चढ़ा, नमकीन का कारोबार भी बंद हो गया। घाटे से वह कर्ज में डूब गए। दस प्रतिशत ब्याज पर कर्ज इस उम्मीद पर लिया कि व्यापार रफ्तार पकड़ेगा और फिर कर्ज चुका देंगे। पर ऐसा नहीं हो सका। वह प्रापर्टी का भी काम करने लगे थे, इसमें भी झटका लगा।
रमेश गुप्ता की महेवा मंडी में विष्णु ट्रेडर्स नाम से दुकान थी। यहां वह बेटे रजत के साथ बैठते थे। व्यापार में घाटा होने पर बेटा गीडा में प्राइवेट फर्म में काम करने लगा। कर्ज से उबरने की कोशिश में शुरू किए गए प्रापर्टी के काम ने रमेश को और डूबो दिया। प्लास्टिक का कारोबार भी किया।
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रमेश गुप्ता की महेवा मंडी में विष्णु ट्रेडर्स नाम से दुकान थी। यहां वह बेटे रजत के साथ बैठते थे। व्यापार में घाटा होने पर बेटा गीडा में प्राइवेट फर्म में काम करने लगा। कर्ज से उबरने की कोशिश में शुरू किए गए प्रापर्टी के काम ने रमेश को और डूबो दिया। प्लास्टिक का कारोबार भी किया।
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घर से निकलते ही बेटे को किया फोन
बड़े बेटे रजत के पास रविवार की सुबह आठ बजे पिता रमेश का फोन आया। तब वह गीडा में था। रमेश ने कहा, वे जरूरी काम से कहीं जा रहे हैं, वह घर पहुंचे क्योंकि रचना की तबियत खराब है। रजत के मुताबिक जब वह घर पहुंचा तो कमरे में तीनों का शव पड़ा था और रचना अस्पताल में थी। पिता का फोन कॉल करने पर स्विच ऑफ मिला। इस बीच मालूम चला कि उनका शव रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा है।
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