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माफिया विनोद उपाध्याय की जमानत अर्जी खारिज
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 15 Dec 2017 07:34 PM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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विशेष न्यायाधीश अवधेश कुमार ने हत्या के प्रयास के मामले में माफिया विनोद उपाध्याय की जमानत अर्जी खारिज कर दी। उस पर साथियों के साथ मिलकर संजीव सिंह पर फायरिंग कराने का आरोप है। कैंट थाने में पवन सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पत्रावली के आधार पर कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
कोर्ट में जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एडीजीसी संतोष कुमार यादव ने बताया कि घटना 19 सितंबर 2011 की शाम 5.30 बजे की है। वादी मुकदमा पवन सिंह ने तहरीर में आरोप लगाया था कि वह संजीव सिंह के साथ गोरखपुर स्थित आवास पर पैदल जा रहे थे, तभी विनोद उपाध्याय, मंतोष यादव तथा तीन अन्य लोग बाइक से आए और जान से मारने की नियत से संजीव सिंह को गोली मार दी। कोर्ट में विनोद उपाध्याय की तरफ से कहा गया कि उन्हें फर्जी ढंग से फंसाया गया है।
अभियोजन की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि अभियुक्त विनोद उपाध्याय का 38 मुकदमों का आपराधिक इतिहास है और इस माफिया की ओर से गवाहों को धमकाया जाता है। न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों के आधार पर जमानत अर्जी खारिज कर दी। विनोद उपाध्याय बस्ती जेल में बंद है। गोरखपुर पुलिस की ओर से बढ़ते दबाव में उसने पुराने मामले में संतकबीरनगर कोर्ट में जमानत रद्द कराकर जेल चला गया। विनोद उपाध्याय के कई साथी गोरखपुर जेल में बंद हैं।
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कोर्ट में जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एडीजीसी संतोष कुमार यादव ने बताया कि घटना 19 सितंबर 2011 की शाम 5.30 बजे की है। वादी मुकदमा पवन सिंह ने तहरीर में आरोप लगाया था कि वह संजीव सिंह के साथ गोरखपुर स्थित आवास पर पैदल जा रहे थे, तभी विनोद उपाध्याय, मंतोष यादव तथा तीन अन्य लोग बाइक से आए और जान से मारने की नियत से संजीव सिंह को गोली मार दी। कोर्ट में विनोद उपाध्याय की तरफ से कहा गया कि उन्हें फर्जी ढंग से फंसाया गया है।
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अभियोजन की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि अभियुक्त विनोद उपाध्याय का 38 मुकदमों का आपराधिक इतिहास है और इस माफिया की ओर से गवाहों को धमकाया जाता है। न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों के आधार पर जमानत अर्जी खारिज कर दी। विनोद उपाध्याय बस्ती जेल में बंद है। गोरखपुर पुलिस की ओर से बढ़ते दबाव में उसने पुराने मामले में संतकबीरनगर कोर्ट में जमानत रद्द कराकर जेल चला गया। विनोद उपाध्याय के कई साथी गोरखपुर जेल में बंद हैं।
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