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इंसेफेलाइटिस को लेकर सीएमओ पर सख्ती
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:57 AM IST
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कलेक्ट्रेट में बैठक करते कमिश्नर और डीएम।
- फोटो : Amar Ujala
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विकास कार्यों की मंडलीय समीक्षा बैठक के दौरान कमिश्नर अनिल कुमार का ज्यादा जोर इंसेफेलाइटिस की रोकथाम पर रहा। मरीजों के इलाज एवं सर्वाधिक प्रभावित गांवों के बारे में जानकारी लेने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य समेत विभिन्न विभागों के अफसरों को कई निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कई सालों से देखा जा रहा है कि इंसेफेलाइटिस मरीजों की प्राथमिक जांच किए बिना ही सीएचसी-पीएचसी के डॉक्टर उन्हें सीधे मेडिकल कॉलेज भेज देते हैं। कमिश्नर ने मंडल के सभी सीएमओ को हिदायत दी कि इंसेफेलाइटिस मरीजों का पहले जिले के संबंधित सीएचसी-पीएचसी पर प्राथमिक इलाज हो और फिर उसके बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जाए। अगर मरीज सीधे मेडिकल कॉलेज भेजे गए तो संबंधित जिलों के सीएमओ पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सीएमओ से इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) के सभी डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ का नाम व मोबाइल नंबर की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।
उन्होंने पंचायती राज महकमे को निर्देश दिया कि जिन गांवों से ज्यादा मरीज आएं, उन्हें चिह्नित कर जल्द से जल्द ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) किया जाए। इसी क्रम में मंडल में ओडीएफ योजना की सही जानकारी न दे पाने पर कमिश्नर ने डीडी पंचायत पर नाराजगी जताई। कमिश्नर ने जल निगम के अफसरों को निर्देश दिया कि वे इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में इंडिया मार्का हैंडपंप लगाएं। अगर बजट कम हो तो मांग की जाए। आबादी के बीच में बसे सूअर बाड़ों को हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई न करने पर कमिश्नर ने डीडी पशुपालन को भी फटकार लगाई।
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उन्होंने अफसरों को समय से दफ्तर पहुंचने और सुबह 10 से 12 बजे तक अनिवार्य तौर पर फरियादियाें की समस्या सुनने के साथ ही समय पर उनका गुणवत्तायुक्त निस्तारण करने का भी निर्देश दिया। बैठक के दौरान ही कमिश्नर ने मंडल के सभी अधिकारियों और अपने कार्यालय के कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई। इस दौरान डीएम सन्ध्या तिवारी, डीएम महराजगंज वीके सिंह समेत सभी सीडीओ और मंडलीय अफसर मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि कई सालों से देखा जा रहा है कि इंसेफेलाइटिस मरीजों की प्राथमिक जांच किए बिना ही सीएचसी-पीएचसी के डॉक्टर उन्हें सीधे मेडिकल कॉलेज भेज देते हैं। कमिश्नर ने मंडल के सभी सीएमओ को हिदायत दी कि इंसेफेलाइटिस मरीजों का पहले जिले के संबंधित सीएचसी-पीएचसी पर प्राथमिक इलाज हो और फिर उसके बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जाए। अगर मरीज सीधे मेडिकल कॉलेज भेजे गए तो संबंधित जिलों के सीएमओ पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सीएमओ से इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर (ईटीसी) के सभी डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ का नाम व मोबाइल नंबर की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।
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उन्होंने पंचायती राज महकमे को निर्देश दिया कि जिन गांवों से ज्यादा मरीज आएं, उन्हें चिह्नित कर जल्द से जल्द ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) किया जाए। इसी क्रम में मंडल में ओडीएफ योजना की सही जानकारी न दे पाने पर कमिश्नर ने डीडी पंचायत पर नाराजगी जताई। कमिश्नर ने जल निगम के अफसरों को निर्देश दिया कि वे इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में इंडिया मार्का हैंडपंप लगाएं। अगर बजट कम हो तो मांग की जाए। आबादी के बीच में बसे सूअर बाड़ों को हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई न करने पर कमिश्नर ने डीडी पशुपालन को भी फटकार लगाई।
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उन्होंने अफसरों को समय से दफ्तर पहुंचने और सुबह 10 से 12 बजे तक अनिवार्य तौर पर फरियादियाें की समस्या सुनने के साथ ही समय पर उनका गुणवत्तायुक्त निस्तारण करने का भी निर्देश दिया। बैठक के दौरान ही कमिश्नर ने मंडल के सभी अधिकारियों और अपने कार्यालय के कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई। इस दौरान डीएम सन्ध्या तिवारी, डीएम महराजगंज वीके सिंह समेत सभी सीडीओ और मंडलीय अफसर मौजूद रहे।