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शौचालय: बेलघाट, कैंपियरगंज, खजनी, खोराबार ब्लॉक में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
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शौचालय: बेलघाट, कैंपियरगंज, खजनी, खोराबार ब्लॉक में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
गोरखपुर। पंचायतीराज विभाग की अब तक की कार्रवाई भी यह बयां करती है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में सबसे ज्यादा गड़बड़ी और लूट बेलघाट, कैंपियरगंज, खजनी और खोराबार ब्लॉक में हुई है। इन ब्लॉकों के कई गांवों के प्रधान और सचिवों पर रकम वसूलने के साथ ही उनपर एफआईआर तक दर्ज कराई जा चुकी है।
पंचायतीराज विभाग पर अब भी लाभार्थियों की 24 करोड़ रुपये की देनदारी है। इनमें ज्यादा दूसरी किस्त का धन है, तो कुछ बेस लाइन सर्वे 2012 के आधार पर शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन अभियान के बाद छूटे रह गए लाभार्थियों के शौचालय निर्माण का। फंड नहीं होने पर विभाग ने लाभार्थियों को इस आश्वासन के साथ शौचालय निर्माण शुरू कराने के लिए प्रोत्साहित किया था कि फंड मिलते ही उन्हें प्रोत्साहन राशि की रकम दे दी जाएगी। डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर का कहना है कि अब कुछ ही लाभार्थियों के प्रोत्साहन राशि की रकम बाकी रह गई है। प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं। जैसे-जैसे फंड मिलता है, धनराशि जारी की जाती है।
बेलघाट: शौचालयों के छत-दरवाजे गायब
शौचालय निर्माण की सबसे खराब स्थिति बेलघाट में हैं। तमाम गांवों में शौचालयों के प्रोत्साहन राशि की रकम सचिव और प्रधान खा गए तो कई गांवों में शौचालय जर्जर स्थिति में हैं। ब्लॉक के सिसवा बाबू गांव के अकाली बेबी, रमाक ांत चौधरी, शंभू शरण, रामाश्रय के शौचालयों में न तो फाटक है और न ही पक्की छत। लकड़ी और फूस से छत बनाई गई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो में तहसील स्तर अधिकारी यह स्वीकार कर रहे हैं कि सबसे खराब हालत बेलघाट ब्लॉक की है। वहां काम ही नहीं कराया गया और रुपये निकाल लिए गए।
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(धीरेंद्र दुबे)
खोराबार: ब्लॉक दफ्तर के सामने का गांव बदहाल
खोराबार ब्लॉक मुख्यालय के सामने का गांव जंगल सिकरी भी बदहाल है। गांव की सुदामी देवी पत्नी शम्भू गुप्ता, असरफ ी पत्नी पिन्टू, मिनातून, केतरी पत्नी गुड्डू के शौचालय 2017-2018 में प्रधान ने बनवाए गए थे। मगर अभी तक किसी के भी शौचालय में दरवाजा और टाइल्स नही लग सका। वहीं, अनीता पत्नी बिंदु ने अपने खर्च से दरवाजा लगवाया, मगर टाइल्स नही लगवा सकीं। गांव के ही दहलु ने पांच हजार रुपये कर्ज लेकर टाइल्स-दरवाजा लगाया। सभी का आरोप है कि खाते से उनके हक का रुपया प्रधान और सचिव ने निकाल लिया और काम भी पूरा नहीं कराया। इस संबंध में ग्राम प्रधान के पति मुन्ना का कहना हैं कि आरोप बेबुनियाद है। जल्द शौचालयों में दरवाजा लगवा दिया जाएगा। वहीं, ब्लॉक के ही डुमरी गांव के बखरिया टोले में कुछ लाभार्थियों के घर के सामने महीनों से सोकपिट के लिए गड्ढा खोद कर छोड़ा गया था जिसे बाद में उन्होंने गुस्से में पाट दिया। रायगंज के खखरा टोला आदि गांव में भी शौचालय का काम अधूरा है।
(गंगाशरण त्रिपाठी)
चिल्लूपार: शौचालयों के भीतर गोइठा, कूडा- झाड़ी
चिल्लूपार क्षेत्र के कई गांवों के शौचालयों से दरवाजे गायब हैं। कई बहुत जर्जर स्थिति में हैं तो कई कूड़ा रखने के काम आ रहे हैं। कई में झाड़ियां उग आई हैं। सनीचरा पट्टी दूबे गांव की निर्मला पत्नी हरेंद्र कहती हैं कि हल्ला तो बहुत है लेकिन हमसे तो शौचालय के बारे में किसी ने नहीं पूछा। प्रधान ने जो शौचालय बनवाया है, वह उपयोग लायक ही नही। गांव की महिलाओं को शौच के लिए अंधेरे का इंतजार करना पड़ता है। गांव के ही हरिश्चंद्र दूबे, चौथीराम, दिनेश ने बताया कि महीनों से शौचालय की छत नहीं लग पाई। कई का तो सिर्फ गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है, जिसमें हर दूसरे-तीसरे दिन कोई गिरकर घायल हो जाता है। इसी तरह लखनौरी में शौचालयों का हाल बहुत खराब है। गांव की रिंकू देवी, संदीप के शौचालय में टूटी साइकिल और खर-पतवार तो गुड्डी देवी के शौचालय में गोइठा रखा मिला। उनका कहना है कि महीनों से अधूरे शौचालय का कोई कैसे इस्तेमाल करे।
(श्रीकांत शाही)
गोला: बारानगर में आधे शौचालय अधूरे
गोला ब्लॉक के बारानगर गांव में आधे से अधिक शौचालय अभी भी अधूरे हैं। करीब एक साल से शौचालय बन रहा है मगर अभी तक निर्माण नहीं पूरा हो सका। कई ग्रामीणों के घर के सामने महीनों से सोक पिट बनाने के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है।
(राजकुमार यादव)
विधायक के गांव में गड्ढा खोदकर छोड़ा
खजनी से भाजपा विधायक संत प्रसाद के गांव भदारखास (बड़यापार) में भी शौचालयों की स्थिति बेहद खराब मिली है। वहां कुछ लाभार्थियों के घर के सामने शौचालयों के लिए गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए। इनमें अभी तक बरसात का पानी भरा है। ग्रामीणों की मानें तो जल्द ही गड्ढे नहीं पाटे गए तो संतकबीरनगर जैसा हादसा (गड्ढे में गिरने से मासूम की मौत) हो सकता है। गांव के राजन कुमार का कहना है कि एसटी, एसटी से संबंधित बस्तियों में शौचालय बनाने व रकम वितरण में बड़ा खेल हुआ है। कहीं गड्ढा खुदा है तो शौचालय का निर्माण नहीं है तो कहीं लोगों को आज तक शौचालय नहीं मिल पाया।
(श्याम जी मद्धेशिया)
बेलीपार: कहीं गड्ढा खोदकर छोड़कर तो कहीं छत ही नदारद
कौड़ीराम ब्लॉक के बेलीपार क्षेत्र के देवकली, अईमा, करजही, कतरारी में कहीं गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं तो कहीं शौचालयों का छत ही गायब है। कई में दरवाजे ही नहीं लगे हैं। लाभार्थी वहां कपड़े का पर्दा लगाकर काम चला रहे। देवकली का कहना है कि शौचालय इस्तेमाल लायक ही नहीं है। बारिश में बहुत दिक्कत होती है। प्रधान से शिकायत की मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। राम लखन ने बताया कि उन्होंने अपने खर्च पर शौचालय बनवा लिया मगर अभी तक उन्हेें प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। चिनकू और सुरेंद्र कहते हैं कि शौचालय तो नहीं बना मगर गड्ढा मुसीबत जरूर बन गया। कई राहगीर गिरकर उसमें चोटिल हो चुके हैं।
(अवनीश त्रिपाठी)
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गोरखपुर। पंचायतीराज विभाग की अब तक की कार्रवाई भी यह बयां करती है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में सबसे ज्यादा गड़बड़ी और लूट बेलघाट, कैंपियरगंज, खजनी और खोराबार ब्लॉक में हुई है। इन ब्लॉकों के कई गांवों के प्रधान और सचिवों पर रकम वसूलने के साथ ही उनपर एफआईआर तक दर्ज कराई जा चुकी है।
पंचायतीराज विभाग पर अब भी लाभार्थियों की 24 करोड़ रुपये की देनदारी है। इनमें ज्यादा दूसरी किस्त का धन है, तो कुछ बेस लाइन सर्वे 2012 के आधार पर शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन अभियान के बाद छूटे रह गए लाभार्थियों के शौचालय निर्माण का। फंड नहीं होने पर विभाग ने लाभार्थियों को इस आश्वासन के साथ शौचालय निर्माण शुरू कराने के लिए प्रोत्साहित किया था कि फंड मिलते ही उन्हें प्रोत्साहन राशि की रकम दे दी जाएगी। डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर का कहना है कि अब कुछ ही लाभार्थियों के प्रोत्साहन राशि की रकम बाकी रह गई है। प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं। जैसे-जैसे फंड मिलता है, धनराशि जारी की जाती है।
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बेलघाट: शौचालयों के छत-दरवाजे गायब
शौचालय निर्माण की सबसे खराब स्थिति बेलघाट में हैं। तमाम गांवों में शौचालयों के प्रोत्साहन राशि की रकम सचिव और प्रधान खा गए तो कई गांवों में शौचालय जर्जर स्थिति में हैं। ब्लॉक के सिसवा बाबू गांव के अकाली बेबी, रमाक ांत चौधरी, शंभू शरण, रामाश्रय के शौचालयों में न तो फाटक है और न ही पक्की छत। लकड़ी और फूस से छत बनाई गई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो में तहसील स्तर अधिकारी यह स्वीकार कर रहे हैं कि सबसे खराब हालत बेलघाट ब्लॉक की है। वहां काम ही नहीं कराया गया और रुपये निकाल लिए गए।
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(धीरेंद्र दुबे)
खोराबार: ब्लॉक दफ्तर के सामने का गांव बदहाल
खोराबार ब्लॉक मुख्यालय के सामने का गांव जंगल सिकरी भी बदहाल है। गांव की सुदामी देवी पत्नी शम्भू गुप्ता, असरफ ी पत्नी पिन्टू, मिनातून, केतरी पत्नी गुड्डू के शौचालय 2017-2018 में प्रधान ने बनवाए गए थे। मगर अभी तक किसी के भी शौचालय में दरवाजा और टाइल्स नही लग सका। वहीं, अनीता पत्नी बिंदु ने अपने खर्च से दरवाजा लगवाया, मगर टाइल्स नही लगवा सकीं। गांव के ही दहलु ने पांच हजार रुपये कर्ज लेकर टाइल्स-दरवाजा लगाया। सभी का आरोप है कि खाते से उनके हक का रुपया प्रधान और सचिव ने निकाल लिया और काम भी पूरा नहीं कराया। इस संबंध में ग्राम प्रधान के पति मुन्ना का कहना हैं कि आरोप बेबुनियाद है। जल्द शौचालयों में दरवाजा लगवा दिया जाएगा। वहीं, ब्लॉक के ही डुमरी गांव के बखरिया टोले में कुछ लाभार्थियों के घर के सामने महीनों से सोकपिट के लिए गड्ढा खोद कर छोड़ा गया था जिसे बाद में उन्होंने गुस्से में पाट दिया। रायगंज के खखरा टोला आदि गांव में भी शौचालय का काम अधूरा है।
(गंगाशरण त्रिपाठी)
चिल्लूपार: शौचालयों के भीतर गोइठा, कूडा- झाड़ी
चिल्लूपार क्षेत्र के कई गांवों के शौचालयों से दरवाजे गायब हैं। कई बहुत जर्जर स्थिति में हैं तो कई कूड़ा रखने के काम आ रहे हैं। कई में झाड़ियां उग आई हैं। सनीचरा पट्टी दूबे गांव की निर्मला पत्नी हरेंद्र कहती हैं कि हल्ला तो बहुत है लेकिन हमसे तो शौचालय के बारे में किसी ने नहीं पूछा। प्रधान ने जो शौचालय बनवाया है, वह उपयोग लायक ही नही। गांव की महिलाओं को शौच के लिए अंधेरे का इंतजार करना पड़ता है। गांव के ही हरिश्चंद्र दूबे, चौथीराम, दिनेश ने बताया कि महीनों से शौचालय की छत नहीं लग पाई। कई का तो सिर्फ गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है, जिसमें हर दूसरे-तीसरे दिन कोई गिरकर घायल हो जाता है। इसी तरह लखनौरी में शौचालयों का हाल बहुत खराब है। गांव की रिंकू देवी, संदीप के शौचालय में टूटी साइकिल और खर-पतवार तो गुड्डी देवी के शौचालय में गोइठा रखा मिला। उनका कहना है कि महीनों से अधूरे शौचालय का कोई कैसे इस्तेमाल करे।
(श्रीकांत शाही)
गोला: बारानगर में आधे शौचालय अधूरे
गोला ब्लॉक के बारानगर गांव में आधे से अधिक शौचालय अभी भी अधूरे हैं। करीब एक साल से शौचालय बन रहा है मगर अभी तक निर्माण नहीं पूरा हो सका। कई ग्रामीणों के घर के सामने महीनों से सोक पिट बनाने के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है।
(राजकुमार यादव)
विधायक के गांव में गड्ढा खोदकर छोड़ा
खजनी से भाजपा विधायक संत प्रसाद के गांव भदारखास (बड़यापार) में भी शौचालयों की स्थिति बेहद खराब मिली है। वहां कुछ लाभार्थियों के घर के सामने शौचालयों के लिए गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए। इनमें अभी तक बरसात का पानी भरा है। ग्रामीणों की मानें तो जल्द ही गड्ढे नहीं पाटे गए तो संतकबीरनगर जैसा हादसा (गड्ढे में गिरने से मासूम की मौत) हो सकता है। गांव के राजन कुमार का कहना है कि एसटी, एसटी से संबंधित बस्तियों में शौचालय बनाने व रकम वितरण में बड़ा खेल हुआ है। कहीं गड्ढा खुदा है तो शौचालय का निर्माण नहीं है तो कहीं लोगों को आज तक शौचालय नहीं मिल पाया।
(श्याम जी मद्धेशिया)
बेलीपार: कहीं गड्ढा खोदकर छोड़कर तो कहीं छत ही नदारद
कौड़ीराम ब्लॉक के बेलीपार क्षेत्र के देवकली, अईमा, करजही, कतरारी में कहीं गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं तो कहीं शौचालयों का छत ही गायब है। कई में दरवाजे ही नहीं लगे हैं। लाभार्थी वहां कपड़े का पर्दा लगाकर काम चला रहे। देवकली का कहना है कि शौचालय इस्तेमाल लायक ही नहीं है। बारिश में बहुत दिक्कत होती है। प्रधान से शिकायत की मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। राम लखन ने बताया कि उन्होंने अपने खर्च पर शौचालय बनवा लिया मगर अभी तक उन्हेें प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। चिनकू और सुरेंद्र कहते हैं कि शौचालय तो नहीं बना मगर गड्ढा मुसीबत जरूर बन गया। कई राहगीर गिरकर उसमें चोटिल हो चुके हैं।
(अवनीश त्रिपाठी)