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सीवर लाइन डालने की कार्यप्रणाली की होगी जांच

Wed, 18 Dec 2019 01:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2019 01:12 AM IST
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city shevar line gorakhpur
सीवर लाइन डालने की कार्यप्रणाली की होगी जांच
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गोरखपुर। शहर में सीवर लाइन डालने की खराब प्रणाली की जांच होगी। नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के विधानसभा में मामला उठाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार को इस मामले में जवाब देने का निर्देश दिया है।
नगर विधायक ने विधानसभा में मामला उठाते हुए कहा कि जल निगम की ओर से डाली जा रही सीवर लाइन की वजह से मालवीयनगर, गोरक्षनगर, दिव्यनगर, अभिषेकनगर, पीपलडाढ़ा, गिरधरगंज, आवास विकास झारखंडी, कूड़ाघाट, आदर्शनगर, सिंघडिंया, झरनाटोला, दरगहिया, नंदानगर, सैनिककुंज आदि मोहल्लों के करीब पचास हजार नागरिकों का जीवन नारकीय बना हुआ है। पिछले डेढ़ साल में ठेकेदारों ने 140 किमी की अधिकांश सड़कें खोद डालीं। उन्होंने कहा कि उनकी विधायक निधि से बनाई गई बेहतर गुणवत्ता की सीसी रोड भी तोड़ डाली गई। इससे इन सभी क्षेत्रों की सड़कों पर कीचड़ फैला हुआ है। आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं।
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अब तक यह तय नहीं है कि इन टूटी सड़कों की मरम्मत कौन कराएगा। सरकार को इस संबंध में जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों का गुस्सा भीतर ही भीतर सुलग रहा है। यदि समय रहते शासन नहीं चेता तो किसी दिन भी लोगों का गुस्सा फूट पड़ेगा।
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ट्रेंचलेस विधि से डाली जा सकती है सीवर लाइन
नगर विधायक ने कहा कि दुनिया के तमाम देशों में बिना सड़क काटे ट्रेंचलेस पद्धति से सीवर लाईन डाली जाती है। प्रदेश के कई शहरों में इस पद्धति से मेट्रो लाईन बनाई गई। लेकिन न जाने कौन सा ठेकेदारी का खेल है कि जल निगम पुरातन तरीके से सड़कों को खोद-खोदकर सीवर लाइन डाल रहा है।

मंत्री के आदेश को प्रबंध निदेशक ने डस्टबिन में डाला
नगर विधायक ने कहा कि जुलाई में विधानसभा में मामला उठाए जाने पर नगर विकास मंत्री के आदेश पर जलनिगम के प्रबंध निदेशक को बुलाकर बैठक की और उन्हें स्वयं गोरखपुर जाकर जांच करने के लिए निर्देशित किया। एक सप्ताह में मंत्री बदल गये और प्रबंध निदेशक ने उनका आदेश डस्टबिन में डाल दिया।
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