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गीताप्रेस का बाल साहित्य पढ़ सकते हैं स्कूली बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 23 Apr 2017 01:33 AM IST
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गीताप्रेस गोरखपुर।
- फोटो : Amar Ujala
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सूबे के स्कूलों के पाठ्यक्रम में गीताप्रेस का बाल साहित्य शामिल हो सकता है। इसे लेकर गीताप्रेस का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को शास्त्री भवन लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को गीताप्रेस से प्रकाशित बाल साहित्य की पुस्तकें भी भेंट कीं। साथ ही भरोसा दिलाया कि यदि इन पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाता है तो गीताप्रेस स्कूलों में इनकी व्यवस्था सुनिश्चित कराएगा।
हाल ही में सीएम ने पारंपरिक शिक्षा के साथ ही संस्कृति की शिक्षा भी देने की जरूरत बताई थी। गीताप्रेस प्रबंधन सीएम की बात से उत्साहित है। गीताप्रेस से बच्चों को भारतीय संस्कृति से रू-ब-रू कराने और उन्हें नैतिक शिक्षा देने के लिए कई पुस्तकें प्रकाशित होती हैं। ऐसे में गीताप्रेस प्रबंधन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल इन पुस्तकों के साथ शनिवार को 12 बजे सीएम से मिलने पहुंचा।
कल्याण के संपादक श्यामजी खेमका एवं व्यवस्थापक बैजनाथ अग्रवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में बच्चों को संस्कृति का पाठ पढ़ाने के लिए सीएम को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है। गीताप्रेस के बाल साहित्य को सीएम को दिखाया। कहा कि इन पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करके बच्चों को भारतीय संस्कृति का ज्ञान देने का लक्ष्य पाया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को गीताप्रेस आने का निमंत्रण भी दिया। इसे उन्होंने स्वीकार किया। ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल, नारायण प्रसाद अजीत सरिया, कृष्ण कुमार खेमका और उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।
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बच्चों को भाएंगीं सचित्र कथाएं
गीताप्रेस ने इसी साल से सचित्र बाल साहित्य का प्रकाशन शुरू किया है। आदर्श बाल कहानियां, आदर्श बाल कथाएं आदि नाम वाली 40,000 किताबें गीताप्रेस बाजार में उतार चुका है। आर्ट पेपर पर छपीं ये पुस्तकें काफी आकर्षक हैं। इनमें पौराणिक एवं प्रेरक कहानियों को आकर्षक चित्रों के साथ बयां किया गया है। इससे पहले भी गीताप्रेस बाल साहित्य छापता रहा है। तब इसे संस्कृति माला शीर्षक से प्रकाशित किया जाता था। इसके आठ भाग प्रकाशित किए गए थे। इन्हीं पुस्तकों को रंगीन चित्रों के साथ अलग-अलग नामों से छापा गया है।
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हाल ही में सीएम ने पारंपरिक शिक्षा के साथ ही संस्कृति की शिक्षा भी देने की जरूरत बताई थी। गीताप्रेस प्रबंधन सीएम की बात से उत्साहित है। गीताप्रेस से बच्चों को भारतीय संस्कृति से रू-ब-रू कराने और उन्हें नैतिक शिक्षा देने के लिए कई पुस्तकें प्रकाशित होती हैं। ऐसे में गीताप्रेस प्रबंधन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल इन पुस्तकों के साथ शनिवार को 12 बजे सीएम से मिलने पहुंचा।
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कल्याण के संपादक श्यामजी खेमका एवं व्यवस्थापक बैजनाथ अग्रवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में बच्चों को संस्कृति का पाठ पढ़ाने के लिए सीएम को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है। गीताप्रेस के बाल साहित्य को सीएम को दिखाया। कहा कि इन पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करके बच्चों को भारतीय संस्कृति का ज्ञान देने का लक्ष्य पाया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को गीताप्रेस आने का निमंत्रण भी दिया। इसे उन्होंने स्वीकार किया। ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल, नारायण प्रसाद अजीत सरिया, कृष्ण कुमार खेमका और उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।
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बच्चों को भाएंगीं सचित्र कथाएं
गीताप्रेस ने इसी साल से सचित्र बाल साहित्य का प्रकाशन शुरू किया है। आदर्श बाल कहानियां, आदर्श बाल कथाएं आदि नाम वाली 40,000 किताबें गीताप्रेस बाजार में उतार चुका है। आर्ट पेपर पर छपीं ये पुस्तकें काफी आकर्षक हैं। इनमें पौराणिक एवं प्रेरक कहानियों को आकर्षक चित्रों के साथ बयां किया गया है। इससे पहले भी गीताप्रेस बाल साहित्य छापता रहा है। तब इसे संस्कृति माला शीर्षक से प्रकाशित किया जाता था। इसके आठ भाग प्रकाशित किए गए थे। इन्हीं पुस्तकों को रंगीन चित्रों के साथ अलग-अलग नामों से छापा गया है।