{"_id":"5d48e43fe59d47316dd91ff7ce33ce87","slug":"chauri-chaura-film-festival-ends-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल की गहराइयों में उतर गई ‘चिल्ड्रन ऑफ हैवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल की गहराइयों में उतर गई ‘चिल्ड्रन ऑफ हैवन
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2016 01:59 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डुमरी खुर्द गांव में चल रहे फि ल्म फेस्टिवल अवाम का सिनेमा के दूसरे व अंतिम दिन की शुरुआत शहीदों के परिवारों के सम्मान से हुई। इसके बाद का सत्र फिल्मों के प्रदर्शन का रहा। इस दौरान ‘इन्कलाब’ ने 1857 के गदर से लेकर 1947 तक आजादी की जंग की दास्तां बताई, वहीं ईरानी फिल्म ‘चिल्ड्रन ऑफ हैवन’ के जरिए लोग बहन-भाई की उस कहानी से रूबरू हुए, जिसमें संघर्षों के बीच से गुजरते बच्चों की जूते की ललक थी तो एक जोड़ी जूते के साथ दोनों के स्कूली पढ़ाई जारी रखने की कोशिश। दो बच्चों पर आधारित यह फिल्म बड़ों को जज्बाती कर गई।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि बलिया के भूमि अधिकार आंदोलन के संयोजक राघवेंद्र कुमार ने फिल्म फेस्टिवल को मकसद में कामयाब बताया। चौरीचौरा के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि कई क्रांति वीरों को जन्म से जुड़ी इस भूमि ने देश की आजादी में बड़ी भूमिका निभाई। गौरवशाली अतीत को याद रखते हुए युवाओं को देश और समाज की बेहतरी के लिए संघर्ष करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डुमरी खुर्द के ग्राम प्रधान चंद्रशेखर सिंह ने की, जबकि संचालन अरविंद मूर्ति ने किया। इस दौरान आयोजन समिति के संयोजक शाह आलम, विनय कुमार सिंह विन्नू, अविनाश गुप्ता, पारस नाथ चौहान, सुरेंद्र कुमार, धनंजय सिंह कौशिक, राजकुमार व्यास, प्रकाश चंद्र नन्हे, रामभवन, विजय कुमार, महेंद्र, रामकृष्ण मणि त्रिपाठी, दीपक शर्मा, धीरेंद्र प्रताप आदि मौजूद रहे। इस दौरान चौरीचौरा कांड के शहीदों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले पारस नाथ, कमला प्रसाद, धुपई प्रजापति, केदार कपूर, शंकर, गुलाब मोहन, बंधन, कलावती, भालचंद्र आदि को सम्मनित किया गया गया।
विज्ञापन
‘समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जरिया है सिनेमा’
फिल्म फेस्टिवल के संयोजक शाह आलम के मुताबिक गुजरे वक्त की अहम यादें और विरासत के महत्वपूर्ण पहलुओं को अगली पीढ़ी तक ले जाने में सिनेमा का बड़ा योगदान है। चौरीचौरा में अवाम का सिनेमा के जरिए यही कोशिश की जाती है। कोशिश रहती है कि सरोकारों और जीवन की हकीकत बताने वाली नई रिलीज को भी फेस्टिवल के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके।
विज्ञापन
समापन समारोह के मुख्य अतिथि बलिया के भूमि अधिकार आंदोलन के संयोजक राघवेंद्र कुमार ने फिल्म फेस्टिवल को मकसद में कामयाब बताया। चौरीचौरा के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि कई क्रांति वीरों को जन्म से जुड़ी इस भूमि ने देश की आजादी में बड़ी भूमिका निभाई। गौरवशाली अतीत को याद रखते हुए युवाओं को देश और समाज की बेहतरी के लिए संघर्ष करना चाहिए।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता डुमरी खुर्द के ग्राम प्रधान चंद्रशेखर सिंह ने की, जबकि संचालन अरविंद मूर्ति ने किया। इस दौरान आयोजन समिति के संयोजक शाह आलम, विनय कुमार सिंह विन्नू, अविनाश गुप्ता, पारस नाथ चौहान, सुरेंद्र कुमार, धनंजय सिंह कौशिक, राजकुमार व्यास, प्रकाश चंद्र नन्हे, रामभवन, विजय कुमार, महेंद्र, रामकृष्ण मणि त्रिपाठी, दीपक शर्मा, धीरेंद्र प्रताप आदि मौजूद रहे। इस दौरान चौरीचौरा कांड के शहीदों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले पारस नाथ, कमला प्रसाद, धुपई प्रजापति, केदार कपूर, शंकर, गुलाब मोहन, बंधन, कलावती, भालचंद्र आदि को सम्मनित किया गया गया।
विज्ञापन
‘समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जरिया है सिनेमा’
फिल्म फेस्टिवल के संयोजक शाह आलम के मुताबिक गुजरे वक्त की अहम यादें और विरासत के महत्वपूर्ण पहलुओं को अगली पीढ़ी तक ले जाने में सिनेमा का बड़ा योगदान है। चौरीचौरा में अवाम का सिनेमा के जरिए यही कोशिश की जाती है। कोशिश रहती है कि सरोकारों और जीवन की हकीकत बताने वाली नई रिलीज को भी फेस्टिवल के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके।