{"_id":"5d7e97a28ebc3e016d630a00","slug":"bsnl-gorakhpur-news-gkp3217406117","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली गुल होते ही मोबाइल से गायब हो जाता है बीएसएनएल नेटवर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली गुल होते ही मोबाइल से गायब हो जाता है बीएसएनएल नेटवर्क
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजली गुल होते ही मोबाइल से गायब हो जाता है बीएसएनएल नेटवर्क
रोहित सिंह
गोरखपुर। बिजली गुल होने से रोशनी-पानी की आपूर्ति प्रभावित होते तो सुना है, लेकिन फुल चार्ज मोबाइल से नेटवर्क गायब होना शायद नहीं सुना होगा। यकीन मानिए गोरखपुर महाराजगंज के बीएसएनएल के करीब 2.75 लाख ग्राहकों के सामने बिजली जाते ही नेटवर्क का संकट हो जाता है। जितनी देर बिजली गुल रहेगी उनके मोबाइल पूरी तरह से अनुपयोगी हो जाते हैं। अभी तक यह समस्या कुछ इलाकों में थी, लेकिन धीरे-धीरे गोरखपुर-महाराजगंज के सभी ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ताओं के सामने यह समस्या खड़ी होती जा रही है।
जानकारी के मुताबिक गोरखपुर-महाराजगंज में बीएसएनएल ने बड़ी संख्या में अपने टावर लगाए थे। इनमें बाकायदा बीटीएस लगाकर क्षेत्र में नेटवर्क का विस्तार किया गया था। इन टावरों के संचालन के लिए बिजली कनेक्शन के साथ जेनरेटर की व्यवस्था की गई थी। फिलहाल, बीएसएनएल की बदहाली का आलम यह है कि बिजली गुल होते ही बीटीएस बंद हो जाते हैं। आर्थिक तंगी की वजह से डीजल खरीद नहीं पा रहे कि जेनरेटर चला सके, नतीजा, बिजली गुल रहने तक मोबाइल में नेटवर्क गायब रहता है। इसका सीधा प्रभाव ग्राहकों पर पड़ता है। पनियरा के अरविंद बीते दिनों बीएसएनएल दफ्तर अपना नंबर सरेंडर करने आए थे। बताया कि इलाके में लोकल फाल्ट या आपूर्ति प्रभावित होने पर बिजली का संकट दो-दो दिन तक रहता है। ऐसे में मोबाइल का नेटवर्क गायब हो जाता। जरूरत पड़ने पर दूसरे से फोन मांगकर काम चलाना पड़ता है। बीएसएनएल सूत्रों की मानें तो इधर ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में लोगों ने नंबर बंद करने का आवेदन दिया है।
गोरखपुर और महराजगंज में मोबाइल कंपनियों के टावरों की स्थिति
कुल टावरों की संख्या : 425
बीएसएनएल के टावर - 273
प्राइवेट कंपनियों के टावर - 152
बैटरियां भी हो गई खराब
बीएसएनएल ने अपने टावरों में विकल्प के रुप में बैटरी भी रखी थी। बिजली से चार्ज होने के बाद जरूरत पड़ने पर इनसे बैकअप लिया जाता था। लेकिन, सालों से बैटरी की मरम्मत नहीं होने से लगभग सभी खराब हो गई हैं। जहां कुछ सही भी हैं, तो उनसे थोड़ी देर तक ही बैकअप मिलता है।
विज्ञापन
अधिक प्रभावित इलाके
सहजनवां, कौड़ीराम, गोला, खजनी, बांसगांव, सरदारनगर, कैंपियरगंज, पिपराइच, पीपीगंज, चौरीचौरा, पनियरा, निचलौल, ठूठीबारी, सिकरीगंज, बड़हलगंज समेत कुछ अन्य ग्रामीण इलाके प्रभावित हो रहे हैं।
कोट
बिजली कटौती होने से बीटीएस प्रभावित होते हैं। जहां बैटरी लगी हैं वहां काम तो करते हैं, लेकिन पूरी क्षमता से नहीं। फंड की कमी से डीजल का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। उम्मीद है जल्द ही सभी समस्याओं का निदान हो जाएगा।
देवेंद्र सिंह, प्रधान महाप्रबंधक
विज्ञापन
रोहित सिंह
गोरखपुर। बिजली गुल होने से रोशनी-पानी की आपूर्ति प्रभावित होते तो सुना है, लेकिन फुल चार्ज मोबाइल से नेटवर्क गायब होना शायद नहीं सुना होगा। यकीन मानिए गोरखपुर महाराजगंज के बीएसएनएल के करीब 2.75 लाख ग्राहकों के सामने बिजली जाते ही नेटवर्क का संकट हो जाता है। जितनी देर बिजली गुल रहेगी उनके मोबाइल पूरी तरह से अनुपयोगी हो जाते हैं। अभी तक यह समस्या कुछ इलाकों में थी, लेकिन धीरे-धीरे गोरखपुर-महाराजगंज के सभी ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ताओं के सामने यह समस्या खड़ी होती जा रही है।
जानकारी के मुताबिक गोरखपुर-महाराजगंज में बीएसएनएल ने बड़ी संख्या में अपने टावर लगाए थे। इनमें बाकायदा बीटीएस लगाकर क्षेत्र में नेटवर्क का विस्तार किया गया था। इन टावरों के संचालन के लिए बिजली कनेक्शन के साथ जेनरेटर की व्यवस्था की गई थी। फिलहाल, बीएसएनएल की बदहाली का आलम यह है कि बिजली गुल होते ही बीटीएस बंद हो जाते हैं। आर्थिक तंगी की वजह से डीजल खरीद नहीं पा रहे कि जेनरेटर चला सके, नतीजा, बिजली गुल रहने तक मोबाइल में नेटवर्क गायब रहता है। इसका सीधा प्रभाव ग्राहकों पर पड़ता है। पनियरा के अरविंद बीते दिनों बीएसएनएल दफ्तर अपना नंबर सरेंडर करने आए थे। बताया कि इलाके में लोकल फाल्ट या आपूर्ति प्रभावित होने पर बिजली का संकट दो-दो दिन तक रहता है। ऐसे में मोबाइल का नेटवर्क गायब हो जाता। जरूरत पड़ने पर दूसरे से फोन मांगकर काम चलाना पड़ता है। बीएसएनएल सूत्रों की मानें तो इधर ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में लोगों ने नंबर बंद करने का आवेदन दिया है।
विज्ञापन
गोरखपुर और महराजगंज में मोबाइल कंपनियों के टावरों की स्थिति
कुल टावरों की संख्या : 425
बीएसएनएल के टावर - 273
प्राइवेट कंपनियों के टावर - 152
बैटरियां भी हो गई खराब
बीएसएनएल ने अपने टावरों में विकल्प के रुप में बैटरी भी रखी थी। बिजली से चार्ज होने के बाद जरूरत पड़ने पर इनसे बैकअप लिया जाता था। लेकिन, सालों से बैटरी की मरम्मत नहीं होने से लगभग सभी खराब हो गई हैं। जहां कुछ सही भी हैं, तो उनसे थोड़ी देर तक ही बैकअप मिलता है।
विज्ञापन
अधिक प्रभावित इलाके
सहजनवां, कौड़ीराम, गोला, खजनी, बांसगांव, सरदारनगर, कैंपियरगंज, पिपराइच, पीपीगंज, चौरीचौरा, पनियरा, निचलौल, ठूठीबारी, सिकरीगंज, बड़हलगंज समेत कुछ अन्य ग्रामीण इलाके प्रभावित हो रहे हैं।
कोट
बिजली कटौती होने से बीटीएस प्रभावित होते हैं। जहां बैटरी लगी हैं वहां काम तो करते हैं, लेकिन पूरी क्षमता से नहीं। फंड की कमी से डीजल का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। उम्मीद है जल्द ही सभी समस्याओं का निदान हो जाएगा।
देवेंद्र सिंह, प्रधान महाप्रबंधक