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जिला अस्पताल में झाड़-फूंक से उपचार
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Feb 2016 01:53 AM IST
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भले ही इलाज के नाम पर लोगों को भ्रमित करने वाले झोलाछापों के खिलाफ अभियान और कार्रवाई का जिम्मा स्वास्थ्य महकमे का है लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूरी से जहां गांव और अशिक्षित बस्तियों में अवैज्ञानिक तरीके से इलाज करने वालों का धंधा जमकर फल-फूल रहा है तो बुधवार को झाड़-फूंक से इलाज की कोशिश की एक दुकान जिला अस्पताल में ही सज गई। इमरजेंसी के सामने तंत्र-मंत्र से उपचार बाद सोखा ने मरीज को छु्ट्टी दिला दी और अस्पताल के अफसर से लेकर कर्मचारी तक सभी बेखबर रहे।
घटना के केंद्र में है चिलुआताल इलाके के रहने वाले रामभरोसे, जिन्हें तेज बुखार की चपेट में आने पर जिला अस्पताल लाया गया था। डॉक्टर ने मरीज को गंभीर मानते हुए इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करा दिया। मरीज के आसपास के बेड पर मौजूद रोगियों और उनके तीमारदारों ने बताया कि बुधवार की दोपहर में एक सोखा उनके घर वालों के संपर्क में आया। आपदा-विपदा का हवाला देकर बेहतर इलाज का ठेका लिया और इमरजेंसी के सामने ही ‘ठगी का क्लीनिक’ छोड़कर इलाज शुरू कर दिया। उपचार की अपनी विधि पूरी करने के बाद भविष्य में बरती जाने वाली सावधानी और सलाह देकर मरीज और उसके तीमारदारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
घर वालों ने डॉक्टर या मेडिकल कर्मचारी से राय लेने की भी जरूरत नहीं समझी तो खुलेआम चले सोखा के दरबार को रोकने या टोकने की कोशिश जिम्मेदारों की तरफ से नहीं हुई। मरीज गायब हो जाने पर अस्पताल प्रशासन ने मरीज का नाम लॉमा रजिस्टर में दर्ज कराके कागजी औपचारिकता पूरी कर ली।
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घटना के केंद्र में है चिलुआताल इलाके के रहने वाले रामभरोसे, जिन्हें तेज बुखार की चपेट में आने पर जिला अस्पताल लाया गया था। डॉक्टर ने मरीज को गंभीर मानते हुए इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करा दिया। मरीज के आसपास के बेड पर मौजूद रोगियों और उनके तीमारदारों ने बताया कि बुधवार की दोपहर में एक सोखा उनके घर वालों के संपर्क में आया। आपदा-विपदा का हवाला देकर बेहतर इलाज का ठेका लिया और इमरजेंसी के सामने ही ‘ठगी का क्लीनिक’ छोड़कर इलाज शुरू कर दिया। उपचार की अपनी विधि पूरी करने के बाद भविष्य में बरती जाने वाली सावधानी और सलाह देकर मरीज और उसके तीमारदारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
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घर वालों ने डॉक्टर या मेडिकल कर्मचारी से राय लेने की भी जरूरत नहीं समझी तो खुलेआम चले सोखा के दरबार को रोकने या टोकने की कोशिश जिम्मेदारों की तरफ से नहीं हुई। मरीज गायब हो जाने पर अस्पताल प्रशासन ने मरीज का नाम लॉमा रजिस्टर में दर्ज कराके कागजी औपचारिकता पूरी कर ली।
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