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‘दुष्कर्मियों को 24 घंटे में ऐसी सजा मिले, जो नजीर बने’

Tue, 03 Dec 2019 02:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2019 02:33 AM IST
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amar ujala samwad event
महिलाएं बोलीं, दुष्कर्मियों को 24 घंटे में ऐसी सजा मिले, जो नजीर बने
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गोरखपुर। देखिए, जब तक भय नहीं होगा, तब तक बेटियों के साथ नाइंसाफी होती रहेगी। अब जरूरत, जैसे के साथ तैसे व्यवहार की है। रेप, हत्या के मामलों में सिर्फ 24 घंटे में सजा दी जानी चाहिए। आरोपियों को बालिग, नाबालिग श्रेणी में रखने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में फांसी की सजा ही काफी नहीं है, जरूरत आरोपियों को नपुंसक बनाने की है, तभी महिला अपराध रुकेगा। महिला अपराध में लिप्त लोगों में भय पैदा होगा। ये विचार शहर की महिलाओं ने सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी मुहिम अपराजिता के तहत रुस्तमपुर देवरिया बाईपास स्थित सिटी ऑफिस में आयोजित संवाद में रखे।
हैदराबाद में महिला चिकित्सक के साथ हुई घटना को लेकर महिलाओं के चेहरे पर गुस्सा साफ दिखा। सबने कहा कि सख्त कानून तो है लेकिन अनुपालन 100 फीसदी सुनिश्चित नहीं है। ऐसे मामलों में न्यायपालिका को तेजी दिखाने की जरूरत है। कुछ महिलाओं ने सऊदी अरब जैसे कानून की वकालत की और कहा कि सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाए तो कोई बेटी को छूने का दुस्साहस नहीं करेगा।
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महिलाओं को ही आत्मरक्षा के गुर क्यों सिखाए जाते हैं? अब जरूरत बेटों को संस्कारवान बनाने की है। मां-बाप अपने बेटे को ऐसी शिक्षा दें कि वह हर बेटी को बहन जैसी समझे, फिर आत्मरक्षा के गुर सिखने की नौबत नहीं आएगी। एक बात और। सजा देने में तत्परता दिखानी होगी। संदेश देना होगा कि बेटियों के साथ बर्बरता करने वालों के साथ कानून सख्ती से पेश आएगा।
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तनु शर्मा, प्रबंधक, सनराइज संस्थान
टीवी पर आने वाले अश्लील विज्ञापनों का दायरा तय होना चाहिए। माता-पिता के साथ बच्चे बैठकर टीवी देखते हैं, तभी कंडोम का प्रचार आता है। कहा जाता है कि चरम सुख की प्राप्ति होगी। आप लोग ही बताएं, यह उचित है। केंद्र और राज्य सरकार ने कई बड़े काम किए हैं। उम्मीद है कि अश्लील विज्ञापनों पर रोक लगाएंगे। जैसा दर्द दुष्कर्म पीड़िता को होता है, वैसा ही दर्द दुष्कर्मी को दिया जाना चाहिए। ज्यादा अच्छा रहेगा, उसे नपुसंक बना दें। फांसी भर देने से सजा पूरी नहीं होगी। शाहीन शेख, कथक नृत्यांगना
हैदराबाद की घटना ने मन में डर भर दिया है। कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि देने से कुछ नहीं होगा। अब जरूरत बेटी के साथ हैवानियत करने वालों में डर पैदा करने की है। ऐसी सजा देने की है, जो नजीर बने। सिर्फ और सिर्फ 24 घंटे में सजा का प्रावधान होना चाहिए। सब कुछ हमारे सामने है, फिर सजा में इतनी देर क्यूं? आपको बताएं, महिला सुरक्षा ने मां-बाप को डरा दिया है। मुझे तो लगता है कि बेटियों की सुरक्षा से चिंतित मां-बाप भ्रूण हत्या से भी गुरेज नहीं करते हैं।
डॉ. चारु शीला सिंह, कवयित्री
बच्चों में नैतिक शिक्षा की कमी भी दुष्कर्म की घटनाओं का बड़ा कारण है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को संस्कारवान बनाएं। बचपन से ही बताएं कि महिलाओं के साथ मां, बहन और बेटी जैसा व्यवहार करें। सारे नियम लड़कियों के लिए होते हैं। अब जरूरत लड़कों के लिए भी नियम बनाने की है। जैसे लड़कियों के लिए तय है कि देरशाम तक घर से बाहर नहीं रह सकती हैं, उसी तरह का नियम लड़कों के लिए होना चाहिए, तभी सुधार आएगा। कानून का भय बनाना होगा।
डॉ. शुभ्रा सिंह, शिक्षिका, एडी गर्ल्स इंटर कॉलेज
दुष्कर्म की घटनाओं की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए। दोषियों पर तत्काल एक्शन हो और जल्द से जल्द सजा मिले, तभी कोई नतीजा सामने आएगा। हैदराबाद की घटना भयावह है। इस घटना ने मां-बाप को डरा दिया है। सब बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। देश में सख्त कानून है लेकिन सजा मिलने की प्रक्रिया बहुत कठिन है। आप दिल्ली के निर्भया कांड को ही देखिए। तमाम आरोपियों ने आत्महत्या कर ली। अब दया याचिका लगाई गई है। मेरा मानना है कि मुकदमा दर्ज करने के साथ ही सजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए।
यशा श्रीवास्तव, प्रिंसिपल, आरपीएम एकेडमी
हैदराबाद की घटना विचलित करने वाली है। ऐसा लगता है कि देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। हम घर से निकलते तो हैं लेकिन शाम को जल्दी घर पहुंच जाएं, यही कोशिश रहती है। देर शाम घर से अकेले निकलने की हिम्मत नहीं पड़ती है। यह कैसा समाज है, जो बेटियों को खुले तौर पर जीने भी नहीं दे रहा है। अब समय आ गया है। हैदराबाद की घटना के आरोपियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जो नजीर बने। एक बात और। अब महिलाओं को जागरूक होना होगा। कहीं फंस जाएं तो पुलिस हेल्पलाइन का 112 नंबर डायल करना न भूलें। निश्चित मदद मिलेगी।
डॉ. सुनीत कोहली, एकेडमिक डायरेक्टर एएसपीएम पब्लिक स्कूल
हैदराबाद में जो घटना हुई है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। जिस तरह अयोध्या मामले में हर दिन सुनवाई केे बाद फैसला आया, उसी तरह दुष्कर्म के मामलों में भी फैसला आना चाहिए। थाना, कोर्ट स्तर पर बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। यह महिला अपराध में संलिप्त लोगों का मनोबल बढ़ाता है। दुष्कर्म के हर मामले में जल्दी सजा होने लगे तो बड़ा बदलाव आएगा। आपको बताएं, अब जरूरत जैसे के साथ तैसे व्यवहार की है। तभी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, महिलाएं सुरक्षित रहेंगी।
नीलम वासनीवाल, समाजसेविका
बच्चों की आजादी, अय्यासी में नहीं बदलनी चाहिए, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मां-बाप की होती है। बच्चों की देखरेख जरूरी है। एक बार रोज चेक करें कि आप का बच्चा कहां आता-जाता है। किस तरह के लोगों से मिलता है और क्या करता है। गलत संगत मिलते ही बर्बादी शुरू होती है। जिनके पास बेटियां हैं, वह उन्हें गुड टच, बैड टच की जानकारी जरूर दें। बेटियों के उत्पीड़न की शुरूआत इसी से होती है।
रेशमा जैन, समाज सेविका
हैदराबाद की घटना से काफी दुख हुआ। इसका इजहार सोशल मीडिया पर भी किया था। अब दरिंदगी करने वालों को कड़ा जवाब देने का वक्त आ गया है। बलात्कार व हत्या से जुड़े आरोपियों को ऐसी सजा देने की जरूरत है ताकि रूह कांप जाए। ऐसा हुआ तो बड़ा बदलाव आएगा। बेटियां जब चाहें, घर से निकल सकेंगी। दरिंदगी करने वाले भी घबराएंगे। देश में सख्त कानून की दरकार है, जिसका अनुपालन तत्काल सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। -शालिनी मिश्रा, प्रिंसिपल ओसवर्ल्ड प्ले वे स्कूल
सतर्क रहने, अच्छे-बुरे की समझ रखने और आत्मरक्षा के गुर सीखने की सलाह सिर्फ महिलाओं को दी जाती है। इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार पुरुषों पर कोई उंगली नहीं उठाता और न ही उन्हें किसी तरह की सलाह देता है। दुष्कर्म की घटनाओं में न्याय पालिका को 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करनी चाहिए। जिस दिन ऐसा हुआ, उसी दिन से दुष्कर्मियों में भय होगा। एक कहावत आप सबको पता है कि भय बिन न होय प्रीत। - डॉ. मेनका, रिसर्च स्कॉलर
हैदराबाद जैसी घटना महिलाओं की आजादी छीनने वाली होती है। अब महिलाओं पर तमाम पाबंदियां लगेंगी। माता-पिता कहेंगे कि देररात तक घर से बाहर नहीं रहना है। सुबह 10 बजे निकलो तो शाम छह बजे तक घर जरूर आ जाओ, इस सोच को बदलने की जरूरत है। अपराध पुरुष करते हैं लेकिन प्रताड़ित महिलाएं होती हैं। अब ऐसा नहीं चलेगा। जो दोषी हो, उसे ही प्रताड़ित होना पड़ेगा। कैंडल जलाने से दुष्कर्म पीड़िता या फिर उसके परिवार को न्याय नहीं मिलेगा। अब जरूरत कड़ी कार्रवाई की है। - मोनिका श्रीनेत, गायिका

महिला डॉक्टर के साथ हुई घटना शर्मसार करने वाली है। अब महिलाओं को हक की लड़ाई लड़नी पड़ेगी। ऐसा हुआ तो सरकारें आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने को विवश होंगी। हैदराबाद में जो घटना हुई, उसके आरोपियों को फांसी की सजा देनी चाहिए। इसमें किसी तरह की हीलाहवाली हुई तो मृत डॉक्टर व उसके परिजनों को न्याय नहीं मिल पाएगा। - शिवांगी, ताइक्वांडो खिलाड़ी
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