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महिला की बेबसी पर एजीएम की दरियादिली

Sun, 20 Nov 2016 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sun, 20 Nov 2016 01:37 AM IST
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AGM shows mercy exchanging money of a woman
परेशान महिला, जिसके रूपये एजीएम ने बदले। - फोटो : Amar Ujala
नोटबंदी के इस दौर में जहां अधिकांश बैंककर्मी तनाव से जूझ रहे हैं और उनका तनाव लोगों पर झुंझलाहट की शक्ल में झलक भी जा रहा है। ऐसे में बैंक रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के एजीएम ने शनिवार को ऐसा काम किया जो तमाम बैंककर्मियों के लिए मिसाल है।
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दरअसल, शनिवार की दोपहर रसूलपुर निवासी मालती देवी का 10 साल का बेटा आशीष घर से जैसे ही बाहर निकला, एक टैंपो ने उसे टक्कर मार दी। इसमें आशीष का कूल्हा टूट गया। बेटे के इलाज के लिए मालती के पास पैसे नहीं थे। पास के किसी पड़ोसी ने सहायता के नाम पर 500 रुपये के दो नोट थमा दिए। पैसे लेकर वह किसी तरह बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, जहां इलाज के लिए उसे बाहर से दवा खरीदने की जरूरत पड़ी। दवा की दुकान पर पहुंचने पर दुकानदार ने 500 के नोट लेने से मना कर दिया।
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इस पर मालती के सामने परेशानी आ गई। किसी के सुझाव के बाद वो एसबीआई की मेन ब्रांच पहुंची। वहां नोट बदलने की कोशिश की तो शनिवार को सिर्फ सीनियर सिटीजन के लिए प्रावधान होने का हवाला देते हुए नोट बदलने से इंकार कर दिया गया। इसके बाद वो रोती हुई एजीएम अमर सिंह के कक्ष में जा पहुंची और उन्हें अपना दुखड़ा सुनाया। साथ ही अपना आधार कार्ड और वोटर आईडी भी दिखाया। मालती की बेबसी देखकर अमर सिंह ने उसे सोफे पर बिठाया। एक कर्मचारी से निकासी फॉर्म मंगवाया और अपने खाते से 1000 रुपये निकालकर मालती के नोट से बदला।
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