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बीआरडी में असाध्य रोग का खाता खाली, बढ़ी मुश्किलें

Sun, 31 Jul 2016 08:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Sun, 31 Jul 2016 08:27 PM IST
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Account of insubstantial desease is vaccent in medical college
मेड‌िकल कालेज
एक ओर जहां बरसात के साथ ही इंसेफेलाइटिस का कहर शुरू हो गया है तो वहीं मेडिकल कॉलेज में असाध्य रोग के खाते में रकम ही नहीं है। ऐसे में न तो दवाएं मंगाई जा पा रही हैं और न ही इलाज के लिए जरूरी उपकरण। लोकल स्तर पर मरीजों के लिए कुछ दवाएं जरूर खरीदी गई थीं, मगर अब वह भी खत्म होने के कगार पर है। इसे लेकर प्राचार्य ने शासन में पत्र लिखा है और एक करोड़ रुपये की मांग की है।
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असाध्य रोग में पहले 3.60 करोड़ रुपये थे मगर तब इंसेफेलाइटिस इसमें शामिल नहीं था। 31 मार्च को यह रकम शासन को वापस कर दी गई। अब जब बीमारी इस श्रेणी में शामिल हो चुका है तब से बजट ही नहीं आ रहा है। इससे अस्पताल प्रशासन को मुश्किलें बढ़ गई हैं। कॉलेज के आंकड़ों पर नजर डालेें तो एक हफ्ते में करीब दर्जन भर मासूमों की जान इंसेफेलाइटिस से जा चुकी है। शासन से लेकर आला अफसर तक व्यवस्था को दुरुस्त करने के आदेश दे रहे हैं। मगर कॉलेज के पास दवाओं की खरीदारी के लिए रकम ही नहीं है। 100 बेड वाले इंसेफेलाइटिस वार्ड के एसआईसी ने पिछले शुक्रवार को नेहरू चिकित्सालय के एसआईसी से दवाइयां, 80 अंबू बैग और लेरेंगोस्कोप की डिमांड की थी, लेकिन इसकी पूर्ति नहीं हो पाई, जिससे वार्ड में भर्ती मासूमों के इलाज में दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि लोकल स्तर से दवाओं की खरीदारी की जा रही है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।
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असाध्य में शामिल रोग
कैंसर, किडनी, हार्र्ट, इंसेफेलाइटिस, प्लास्टिक एनिमिया, थैलीसीमिया

पिछले साल असाध्य रोगियों के इलाज के लिए जो धन आया था, वह वापस चला गया। अब एक करोड़ रुपये की मांग की गई है। इस संबंध में शासन से बात की गई है, जल्द ही बजट खाते में आ जाएगा।
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- डॉ. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज 
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