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आयुष्मान योजना: नामुमकिन को मुमकिन किया

Sun, 15 Sep 2019 01:06 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2019 01:06 AM IST
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aayushman yojna, ramdas and radhika news
आयुष्मान योजना की खबरः कूल्हा बदलने के बाद रामदरश ने प्रधानमंत्री को दिया धन्यवाद
आयुष्मान योजना: नामुमकिन को किया मुमकिन
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गोरखपुर। हादसे में कूल्हा टूटने के बाद सारी उम्र अपाहिज की तरह गुजरने की आशंका से जूझ रही राधिका और राम दरश के लिए आयुष्मान योजना वरदान साबित हुई। गरीबी रेखा के निकट जीवन गुजार रहे इन दोनों के परिवारों को तो यह जानकारी भी नहीं थी कि टूटा हुआ कूल्हा बदला जा सकता है। जानकारी हुई तो कीमत जानकार दिल बैठ गया। नामुमकिन से लग रहे कूल्हा प्रत्यारोपण को आयुष्मान योजना ने मुमकिन बनाया।
प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख दीं दुआएं
जैतपुरा निवासी रामदरश (60) मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते थे। दिसंबर 2018 में गांव में ही बन रही सड़क के लिए मजदूरी कर रहे थे। वजन ढोते समय गड्ढे में पैर आने से गिर पड़े और कूल्हे की हड्डी टूट गई। ग्राम प्रधान ने उन्हें आयुष्मान योजना का लाभार्थी होने की जानकारी दी और बीआरडी मेडिकल कॉलेेज के नेहरू चिकित्सालय में भर्ती कराया। यहां गोल्डन कार्ड बनाने के साथ ही जनवरी 2019 में उनका कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया। गरीबी के कारण इलाज की आस छोड़ चुके राम दरश आयुष्मान योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुआएं दे रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को चिट्टी लिखी कि इस योजना का पूरा लाभ मिला है इसलिए यह योजना आगे भी चलती रहे, माननीय प्रधानमंत्री का कोटि कोटि अभिनंदन, इस योजना से बहुत खुश हूं।
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नौ महीने तक चारपाई पर पड़ी रहीं, आयुष्मान बना वरदान
ग्राम रमवांपुर निवासी राधिका (50) के पति की मौत चार साल पहले हो गई थी। तब से परिवार की देखभाल के साथ ही वही खेती किसानी संभाल रही थीं। अप्रैल 2018 में खेत में काम करने के दौरान गिरने से राधिका के कूल्हे की हड्डी टूट गई। बेटे सूरज ने बताया दर्द से कराहती मां को लोगों की सलाह पर एम्स, दिल्ली ले गए। एम्स में बताया गया कि कूल्हा बदला जाएगा, इसके लिए करीब ढाई लाख रुपये खर्च होंगे। इतना धन नहीं होने के कारण निराश हो मां को घर ले आए। वह करीब नौ माह तक चारपाई पर पड़े-पड़े ठीक होने की उम्मीद छोड़ चुकीं थी। नवंबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का पत्र मिला, इसमें आयुष्मान योजना का लाभार्थी होने की बात लिखी थी। ग्राम प्रधान की मदद से गोल्डन कार्ड बनवाया गया और गोरक्षनाथ चिकित्सालय में मां को दिखाया। यहां भी डाक्टरों ने कूल्हा प्रत्यारोपण बताया। जनवरी 2019 में आयुष्मान योजना के तहत कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया और एक रुपया भी नहीं लगा। कूल्हा प्रत्यारोपण के बाद राधिका फिर से घर के काम में बहुओं का हाथ बंटा रहीं हैं।
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