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10 हजार से अधिक जाति -आय सर्टिफिकेट फंसे
Gorakhpur
Updated Wed, 29 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। लेखपालों की लंबी खिंच रही हड़ताल से प्रशासन की बेचैनी बढ़ने लगी है। जाति-आय और निवास प्रमाणपत्र, तहसील दिवस, समाधान दिवस समेत तमाम अफसरों से संबंधित हजारों मामले लंबित हैं। जाति-आय और निवास प्रमाण पत्रों को लेकर ज्यादा मारामारी है। जिले में 10 हजार से अधिक प्रमाण पत्रों के आवेदन लटके पड़े हैं, जिससे विशिष्ट बीटीसी की काउंसिंलिंग, वजीफा आदि को लेकर अभ्यर्थी परेशान हैं।
इन दिक्कतों को देखते हुए ही प्रमुख सचिव राजस्व ने निर्देश दिया है कि जाति-आय आदि प्रमाणपत्रों के आवेदनों के सत्यापन का काम लेखपालों की बजाय संबंधित कानूनगो से कराया जाए। यही नहीं सर्वर में खराबी के मद्देनजर शासन ने सर्वर दुरुस्त होने तक मैन्युअली प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है। उधर, विशिष्ट बीटीसी काउंसिंलिंग के कई अभ्यर्थियों ने मंगलवार को डीएम से मिलकर जल्द प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की सिफारिश की।
पूरे जिले में जाति, आय और निवास आदि के 10 हजार से अधिक प्रमाणपत्रों के आवेदन लंबित हैं। सिर्फ सदर तहसील में ही आय के दो हजार, जाति के करीब 1500 तथा निवास प्रमाण पत्र के करीब 1800 आवेदन पत्र लंबित पड़े हैं। तहसील प्रशासन के मुताबिक यह आंकड़ा करीब 10 दिन पहले का है। हड़ताल की वजह से लेखपालों की यूजर आईडी नहीं खुलने से इस दरम्यान आए आवेदनों की वास्तविक संख्या के बारे में अभी जानकारी ही नहीं हो पाई है।
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यूजर आईडी का इंतजार
आवेदन पत्रों की सत्यापन रिपोर्ट को ऑनलाइन फीड करने के लिए सभी कानूनगो को यूजर आईडी की आवश्यकता है। डीएम ने बताया कि इसके लिए एनआईसी प्रभारी को निर्देश दे दिए गए हैं। मंगलवार को ही सभी कानूनगो को आईडी मिल गई होती लेकिन सर्वर खराब होने की वजह से उन्हें आईडी नहीं मिल सकी।
तीन दिनों से खराब है सर्वर
आवेदकों को समय से जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र नहीं मिल पाने के लिए लेखपालों की हड़ताल ही एकमात्र वजह नहीं है। बीते तीन दिनों से ई-डिस्ट्रिक्ट के सर्वर में खराबी की वजह से भी प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा सके। मंगलवार को भी पूरे दिन सर्वर ठप रहा, जिसकी वजह से न कोई प्रमाणपत्र जारी हो सक ा और न ही कानूनगो की यूजर आईडी बन सकी। सर्वर खराब होने की घटना नई नहीं है। सप्ताह में एक-दो दिन सर्वर में खराबी आम बात हो गई है।
कानूनगो के सामने भी चुनौती
लेखपालों के काम निपटाने में कानूनगो को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जिले में कानूनगो के 22 स्वीकृत पदाें में से 13 खाली हैं। सदर तहसील क्षेत्र में पांच में से सिर्फ तीन काननूगो ही कार्यरत हैं। इसी तरह चौरीचौरा, सहजनवां और कैंपियरगंज में दो में से एक-एक, खजनी में चार में से दो, बांसगांव में तीन में से दो तथा गोला में चार में से तीन पदों पर ही काननूगो तैनात हैं। यही नहीं लेखपालों की तुलना में कानूनगो को क्षेत्र की जानकारी भी कम है। ऐसे में कम समय में इतनी बड़ी संख्या में लंबित आवेदनों का निस्तारण आसान नहीं होगा।
अभ्यर्थियों को नहीं होगी दिक्कत: डीएम
डीएम रंजन कुमार का कहना है कि किसी भी अभ्यर्थी को प्रमाणपत्र को लेकर दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। लेखपालों की हड़ताल की वजह से समय पर प्रमाणपत्र न मिल पाने को लेकर शासन भी गंभीर है। प्रमुख सचिव राजस्व के निर्देश पर लेखपालों की हड़ताल खत्म होने तक कानूनगो से प्रमाणपत्रों के आवेदनों के सत्यापन का काम कराया जाएगा। सर्वर दुरुस्त होने तक मैनुअल तरीके से प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। इसके लिए संबंधित तहसील प्रशासन को निर्देश दे दिए गए हैं। बुधवार से मैनुअल सर्टिफिकेट जारी होने लगेंगे।
शपथ पत्र का विकल्प
एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सुरेश चंद्र सिंह ने बताया कि विशिष्ट बीटीसी की काउंसिलिंग में अभ्यर्थियों को कोई दिक्कत न हो इसलिए उन्होंने डायट के प्राचार्य को आय-जाति या निवास सर्टिफिकेट बनने तक अभ्यर्थियों से विकल्प के तौर पर शपथपत्र लेने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह समस्या प्रदेश स्तर पर बनी हुई है लिहाजा सभी को इसमें सहयोग करना होगा।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल: केश्वर
जिला लेखपाल संघ के अध्यक्ष केश्वर यादव का कहना है कि लेखपाल अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत है। हर बार कोई न कोई आश्वासन देकर छला जाता है। इस बार आर-पार की लड़ाई होगी। जब तक शासन हमारी मांगे नहीं मान लेता, हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि लेखपालों की कोई भी मांग बेजा नहीं है। जब एक लेखपाल से दो-दो लेखपालों का काम कराया जा रहा है तो शासन को भी उनका मेहनताना बढ़ाना चाहिए। इसी तरह लेखपालों की अन्य मांगे भी वाजिब हैं। कानूनगो से जाति-आय और निवास आदि प्रमाणपत्रों के आवेदनों के सत्यापन कराने की वैकल्पिक व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि लेखपाल का काम सिर्फ लेखपाल कर सकेंगे, कानूनगो को न तो क्षेत्र की जानकारी है और न ही विभिन्न जातियों से जुड़ी बारीकियां।
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इन दिक्कतों को देखते हुए ही प्रमुख सचिव राजस्व ने निर्देश दिया है कि जाति-आय आदि प्रमाणपत्रों के आवेदनों के सत्यापन का काम लेखपालों की बजाय संबंधित कानूनगो से कराया जाए। यही नहीं सर्वर में खराबी के मद्देनजर शासन ने सर्वर दुरुस्त होने तक मैन्युअली प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है। उधर, विशिष्ट बीटीसी काउंसिंलिंग के कई अभ्यर्थियों ने मंगलवार को डीएम से मिलकर जल्द प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की सिफारिश की।
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पूरे जिले में जाति, आय और निवास आदि के 10 हजार से अधिक प्रमाणपत्रों के आवेदन लंबित हैं। सिर्फ सदर तहसील में ही आय के दो हजार, जाति के करीब 1500 तथा निवास प्रमाण पत्र के करीब 1800 आवेदन पत्र लंबित पड़े हैं। तहसील प्रशासन के मुताबिक यह आंकड़ा करीब 10 दिन पहले का है। हड़ताल की वजह से लेखपालों की यूजर आईडी नहीं खुलने से इस दरम्यान आए आवेदनों की वास्तविक संख्या के बारे में अभी जानकारी ही नहीं हो पाई है।
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यूजर आईडी का इंतजार
आवेदन पत्रों की सत्यापन रिपोर्ट को ऑनलाइन फीड करने के लिए सभी कानूनगो को यूजर आईडी की आवश्यकता है। डीएम ने बताया कि इसके लिए एनआईसी प्रभारी को निर्देश दे दिए गए हैं। मंगलवार को ही सभी कानूनगो को आईडी मिल गई होती लेकिन सर्वर खराब होने की वजह से उन्हें आईडी नहीं मिल सकी।
तीन दिनों से खराब है सर्वर
आवेदकों को समय से जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र नहीं मिल पाने के लिए लेखपालों की हड़ताल ही एकमात्र वजह नहीं है। बीते तीन दिनों से ई-डिस्ट्रिक्ट के सर्वर में खराबी की वजह से भी प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा सके। मंगलवार को भी पूरे दिन सर्वर ठप रहा, जिसकी वजह से न कोई प्रमाणपत्र जारी हो सक ा और न ही कानूनगो की यूजर आईडी बन सकी। सर्वर खराब होने की घटना नई नहीं है। सप्ताह में एक-दो दिन सर्वर में खराबी आम बात हो गई है।
कानूनगो के सामने भी चुनौती
लेखपालों के काम निपटाने में कानूनगो को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जिले में कानूनगो के 22 स्वीकृत पदाें में से 13 खाली हैं। सदर तहसील क्षेत्र में पांच में से सिर्फ तीन काननूगो ही कार्यरत हैं। इसी तरह चौरीचौरा, सहजनवां और कैंपियरगंज में दो में से एक-एक, खजनी में चार में से दो, बांसगांव में तीन में से दो तथा गोला में चार में से तीन पदों पर ही काननूगो तैनात हैं। यही नहीं लेखपालों की तुलना में कानूनगो को क्षेत्र की जानकारी भी कम है। ऐसे में कम समय में इतनी बड़ी संख्या में लंबित आवेदनों का निस्तारण आसान नहीं होगा।
अभ्यर्थियों को नहीं होगी दिक्कत: डीएम
डीएम रंजन कुमार का कहना है कि किसी भी अभ्यर्थी को प्रमाणपत्र को लेकर दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। लेखपालों की हड़ताल की वजह से समय पर प्रमाणपत्र न मिल पाने को लेकर शासन भी गंभीर है। प्रमुख सचिव राजस्व के निर्देश पर लेखपालों की हड़ताल खत्म होने तक कानूनगो से प्रमाणपत्रों के आवेदनों के सत्यापन का काम कराया जाएगा। सर्वर दुरुस्त होने तक मैनुअल तरीके से प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। इसके लिए संबंधित तहसील प्रशासन को निर्देश दे दिए गए हैं। बुधवार से मैनुअल सर्टिफिकेट जारी होने लगेंगे।
शपथ पत्र का विकल्प
एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सुरेश चंद्र सिंह ने बताया कि विशिष्ट बीटीसी की काउंसिलिंग में अभ्यर्थियों को कोई दिक्कत न हो इसलिए उन्होंने डायट के प्राचार्य को आय-जाति या निवास सर्टिफिकेट बनने तक अभ्यर्थियों से विकल्प के तौर पर शपथपत्र लेने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह समस्या प्रदेश स्तर पर बनी हुई है लिहाजा सभी को इसमें सहयोग करना होगा।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल: केश्वर
जिला लेखपाल संघ के अध्यक्ष केश्वर यादव का कहना है कि लेखपाल अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत है। हर बार कोई न कोई आश्वासन देकर छला जाता है। इस बार आर-पार की लड़ाई होगी। जब तक शासन हमारी मांगे नहीं मान लेता, हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि लेखपालों की कोई भी मांग बेजा नहीं है। जब एक लेखपाल से दो-दो लेखपालों का काम कराया जा रहा है तो शासन को भी उनका मेहनताना बढ़ाना चाहिए। इसी तरह लेखपालों की अन्य मांगे भी वाजिब हैं। कानूनगो से जाति-आय और निवास आदि प्रमाणपत्रों के आवेदनों के सत्यापन कराने की वैकल्पिक व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि लेखपाल का काम सिर्फ लेखपाल कर सकेंगे, कानूनगो को न तो क्षेत्र की जानकारी है और न ही विभिन्न जातियों से जुड़ी बारीकियां।