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निषादों ने मांगा अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र
Gorakhpur
Updated Sun, 07 Sep 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। समाधान निषाद और लोचन निषाद की पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद ने समाज के लोगों को अनुसूचित जाति मझवार का प्रमाणपत्र दिए जाने की मांग को लेकर डीएम दफ्तर पर धरना दिया। धरने की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने की। इससे पहले विभिन्न तहसीलों से आए निषाद समाज के लोगों ने अपनी मांग को लेकर जुलूस निकाला। जुलूस कलेक्ट्रेट से निकल कर चेतना तिराहा, गोलघर होते हुए वापस डीएम दफ्तर पहुंचा जहां धरने में तब्दील हो गया।
डॉ. निषाद ने कहा कि निषादों का इतिहास गौरवशाली रहा है। देश की आजादी के लिए छह सितंबर 1857 को समाधान निषाद, लोचन निषाद आदि नाविकों ने कई अंग्रेजों को कानपुर में गंगा नदी के घाट पर डुबोकर मार दिया था। इसके खिलाफ अंग्रेजों ने क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 1871 लागू करके निषादों को अपराधी जनजाति घोषित करके अधिकारों से वंचित कर दिया। 1871 और 1924 में अंग्रेजों ने जिस समाज को अपराधी बताते हुए उजाड़ा, उसे आजादी के बाद संविधान में जगह मिली। इसका लाभ 1952 से समाज के लोगों को छह जून 2013 तक मिला। लेकिन उप सचिव समाज कल्याण के एक शासनादेश के कारण समाज को विमुक्ति जनजाति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से लोकसभा चुनाव से पूर्व वार्ता हुई। तब उन्होंने आश्वासन दिया, मगर हुआ कुछ नहीं। निषाद समाज अब अपना हक हासिल करने के लिए संगठित हो चुका है। समय रहते अगर प्रदेश सरकार नहीं चेती तो उसे इसका खामियाजा उठाना होगा। धरना संयोजक मुरलीधर निषाद, मंडल अध्यक्ष रघुराई निषाद, राष्ट्रीय प्रचारक डॉ. अनिल कुमार निषाद, जिला प्रभारी देवमणी निषाद, जिला अध्यक्ष आल्हा निषाद ने भी धरने को संबोधित किया। इस दौरान विनोद निषाद, रामभोग निषाद, कमलेश निषाद, रविंद्र निषाद, रामकिशोर निषाद आदि मौजूद रहे।
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डॉ. निषाद ने कहा कि निषादों का इतिहास गौरवशाली रहा है। देश की आजादी के लिए छह सितंबर 1857 को समाधान निषाद, लोचन निषाद आदि नाविकों ने कई अंग्रेजों को कानपुर में गंगा नदी के घाट पर डुबोकर मार दिया था। इसके खिलाफ अंग्रेजों ने क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 1871 लागू करके निषादों को अपराधी जनजाति घोषित करके अधिकारों से वंचित कर दिया। 1871 और 1924 में अंग्रेजों ने जिस समाज को अपराधी बताते हुए उजाड़ा, उसे आजादी के बाद संविधान में जगह मिली। इसका लाभ 1952 से समाज के लोगों को छह जून 2013 तक मिला। लेकिन उप सचिव समाज कल्याण के एक शासनादेश के कारण समाज को विमुक्ति जनजाति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से लोकसभा चुनाव से पूर्व वार्ता हुई। तब उन्होंने आश्वासन दिया, मगर हुआ कुछ नहीं। निषाद समाज अब अपना हक हासिल करने के लिए संगठित हो चुका है। समय रहते अगर प्रदेश सरकार नहीं चेती तो उसे इसका खामियाजा उठाना होगा। धरना संयोजक मुरलीधर निषाद, मंडल अध्यक्ष रघुराई निषाद, राष्ट्रीय प्रचारक डॉ. अनिल कुमार निषाद, जिला प्रभारी देवमणी निषाद, जिला अध्यक्ष आल्हा निषाद ने भी धरने को संबोधित किया। इस दौरान विनोद निषाद, रामभोग निषाद, कमलेश निषाद, रविंद्र निषाद, रामकिशोर निषाद आदि मौजूद रहे।
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