फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   उत्कृष्ट शोध के लिए वैज्ञानिकों को मिली फेलोशिप

उत्कृष्ट शोध के लिए वैज्ञानिकों को मिली फेलोशिप

Wed, 13 Nov 2013 05:40 AM IST
Gorakhpur
Gorakhpur Updated Wed, 13 Nov 2013 05:40 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर। उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए तीन वैज्ञानिकों को नेशनल एनवायरमेंटलिस्ट एसोसिएशन क ी ओर से फेलोशिप प्रदान कर सम्मानित किया गया। मौका था गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का। सम्मानित होने वाले वैज्ञानिक में प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय, कोलकाता के प्रो. टी मिद्या को जीनोटाक्सिसिटी पर किए गए शोध के लिए गुवाहाटी विश्वविद्यालय के प्रो. टीसी शर्मा को आसाम की माइक्रो फंजाई पर विस्तृत अध्ययन के लिए तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रो. जीसी पांडेय को पारिस्थितिकी पर विशिष्ट अध्ययन के लिए मंगलवार को यह फेलोशिप दी गई। इसके अलावा गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग के अवकाश प्राप्त शिक्षक प्रो. आरए अग्रवाल, प्रो. आरएस भट्ट और प्रो. आरपी सिंह को भी सम्मानित किया गया। संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में जीव और वनस्पतियों में हो रहे परिवर्तन और उसकी काट के लिए किए जा रहे शोध पर विशेष चर्चा हुई। भागलपुर विश्वविद्यालय के डॉ. कृष्ण मुरारी ने उत्तर पूर्वी बिहार में सरसों के माहो के पोषी पौधों और उनके प्राकृतिक शत्रुओं पर आधारित शोध पत्र का वाचन किया। कमला नेहरू संस्थान, सुल्तानपुर के डॉ. आरएन सिंह ने मत्स्य के अंडाशय पर जाइमेथोएट नामक कीटनाशक के प्रभाव का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे मत्स्य प्रजनन प्रभावित होता है। इसी संस्थान के डॉ. राकेश कुमार पांडेय ने डाइमेथोएट कीटनाशक के प्रभाव को सिंगी मछली के रक्त सीरम में कैल्सियम की मात्रा में परिवर्तन की जानकारी दी। मराठवाड़ा विश्वविद्यालय औरंगाबाद के प्रो.जीके कुलकर्णी ने झींगा मछली के प्रजनन और संवर्धन के बारे में बताया तो केंद्रीय रेशम बोर्ड बहरामपुर के प्रो. एमजी माझी ने पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में शहतूत के पौधों पर लगने वाली बीमारियों की जानकारी दी। पालमपुर, हिमाचल प्रदेश के डॉ. ए कन्नन ने बताया कि सैपोनिन और टैनिन नामक पादप उत्पादों को खाद्य सामग्री के साथ मवेशियों को खिलाने पर मीथेन के उत्सर्जन में भारी कमी पाई गई। तकनीकी सत्र को वर्दवान विश्वविद्यालय के डॉ. एआर घोष, भरथियार विश्वविद्यालय के डॉ. एलए पपागसन, नई दिल्ली के डॉ. एस तिवारी, राष्ट्रीय हाईड्रोलॉजी संस्थान रुड़की के डॉ.एमके शर्मा, प्रो.बीएन दुबे, डॉ. मनोज त्रिपाठी, प्रो. बीके सारंगी, डॉ. अयमन तनवीर, डॉ. एके पांडेय, बायरोलॉजी गोरखपुर के निदेशक डॉ. मिलिंद गोरे ने भी शोध पत्र पढ़े। इस मौके पर बायोटेक्नॉलजी के अध्यक्ष प्रो. सीपीएम त्रिपाठी, प्राणि विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीबी उपाध्याय आदि मौजूद थे। देर शाम दीक्षा भवन में कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी का अभिनंदन किया गया। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed