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सांप के जहर को बेअसर करने की दवा जल्द
Gorakhpur
Updated Sun, 11 Aug 2013 05:34 AM IST
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गोरखपुर। अभी केवल सांप के जहर के असर को कम करने की दवा मिलती है, लेकिन आने वाले दिनों में ‘रसेल वाइपर’, गेहुंअन, करैत जैसे जहरीले सांपों के जहर को बेअसर किया जा सकेगा। यह दावा है गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रवक्ता डॉ. उमेश यादव का। यादव ने ऐसा रासायनिक मिश्रण तैयार किया है, जो ‘रसेल वाइपर’ के जहर को बेअसर करने में कारगर साबित हुआ है। इसे परीक्षण के लिए सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई), लखनऊ भेजा गया है। यदि सीडीआआई की लैब में यह केमिकल कंपाउंड खरा उतरा तो जहर को बेअसर करने की दवा सस्ती हो सकती है। साथ ही सांप के डंसने से होने वाली मौत पर नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। डॉ. यादव बताते हैं कि सांप के डंसने के बाद मिचली, उल्टी और घबराहट होने लगती है। साथ ही ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, डंसने के स्थान पर सूजन आ जाती है और खून के थक्का बनने की प्रक्रिया थम जाती है। हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लक्षण विष के एंजाइम ‘फास्को लिपेस ए-2’ के चलते सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि दो वर्षों के दौरान प्रयोगों से पता चला है कि ‘पायराजोलो(3,4-डी) पिरीमिडीन’ नामक रसायन सर्प दंश से होने वाली जलन को कम करने और खून का थक्का बनाने में कारगर है। डॉ. यादव ने बताया कि दो पायरोजोलो 3, 4-डी पिरीमिडीन को ट्राई मेथिलीन लिंकर से मिलाया गया तो पता चला कि यह मिश्रण सांप के जहर को फैलने से रोक देता है। बायो फिजिक्स के वैज्ञानिक ने बताया कि ‘रसेल वाइपर’ के अलावा गेहुंअन और करैत पर भी इस मिश्रण का प्रयोग सफल रहा है। अब तक सांप के विष को बेअसर करने की दवा नहीं बनी है। विष के असर को कम करने के लिए एंटी स्नैक वेनम का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए घोड़े के सीरम को सांप के विष में डाल कर एंटीबॉडी तैयार किया जाता है। इसे तैयार करने में दिक्कत आती है और महंगा भी होता है। उनका शोध नीदरलैंड की पत्रिका बायोलॉजिकल फिजिक्स में प्रकाशित हुआ है। भौतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. मिहिर राय चौधरी के निर्देशन में डॉ. यादव ने यह शोध किया है। उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग नई दिल्ली द्वारा वित्तीय मदद भी मिली है।
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