{"_id":"5ab658744f1c1b00768b7690","slug":"91521899636-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन की मंगलकामना के लिए मां कालरात्रि की हुई उपासना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन की मंगलकामना के लिए मां कालरात्रि की हुई उपासना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 24 Mar 2018 07:56 PM IST
विज्ञापन
पूजा के लिए बुढ़िया माई मंदिर में जुटे श्रद्धालु।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वासंतिक नवरात्र की सप्तमी तिथि पर शनिवार को शहरवासियों ने श्रद्धा के साथ मां कालरात्रि की उपासना की। इस बीच सुबह से ही शहर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। तड़के ही देवी मंदिरों में गूंजते घंटे-घड़ियालों की ध्वनि शहर के माहौल को भक्तिमय कर गए। दिन चढ़ने के साथ भक्तों की भीड़ बढ़ती गई। दोपहर में भीड़ थोड़ी कम हुई, लेकिन शाम होते ही मंदिर फिर श्रद्धा से खचाखच हो उठे।
शास्त्रों के अनुसार, मां का कालरात्रि स्वरूप अकाल मृत्यु से बचाकर काल का नाश करने वाला है। इनकी उपासना जीवन को मंगलकारी बनाती है। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों ने घरों में भी मां की आराधना की। सुबह स्नान के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लोगों ने मां को प्रसन्न करने का प्रयास किया। रात में महानिशा की उपासना की। पूरा नवरात्र व्रत रखने वाले लोग तो व्रत थे ही कुछ लोगों ने अष्टमी-नवमी एक ही दिन पड़ने से भ्रमवश सप्तमी को ही अष्टमी मानकर व्रत रखा।
आज महागौरी व सिद्धिदात्री होगी पूजा
महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के अनुसार भगवान शिव ने माता के इस रूप को महागौरी कहकर संबोधित किया और आशीर्वाद दिया कि मेरे साधक आपकी पूजा-अर्चना करके ही मेरे कृपापात्र हो सकते हैं। नवरात्र में आठवें दिन इन्हीं माता की पूजा की जाती है। इससे मां प्रसन्न होकर इहलौकिक व पारलौकिक सुख का आशीष देती हैं। ज्योतिषाचार्य शरद चंद मिश्र के अनुसार, मां दुर्गा के नौवीं शक्ति को सिद्धिदात्री नाम से जाना जाता है। ये अपने साधकों को सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। इन्हीं की कृपा से भगवन शिव में 18 सिद्धियां और नव निधियां विद्यमान हैं। इनकी अनुकंपा से ही भगवान शिव अर्धनारीश्वर हुए। नौवें दिन साधक सभी सिद्धियों को पाने के लिए मां के सिद्धिदात्री रूप की उपासना करते हैं।
विज्ञापन
पूर्णाहुति सुबह 7:04 बजे के बाद
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के मुताबिक आठ दिनों के नवरात्र व्रत की पूर्णाहुति रविवार सुबह 7:04 के बाद पूरे दिन की जा सकती है। विशेष पूर्णाहुति के पश्चात कन्याओं का पूजन होगा। तीन कन्याओं के पूजन से धन-यश की प्राप्ति, सात कन्या पूजन से राज्य प्राप्ति, आठ कन्या पूजन से संपदा व वैभव और नौ कुमारी पूजन से पृथ्वी व प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। कन्या पूजन में कन्याओं को मधुर भोजन ही कराएं, तीखा भोजन कदापि न कराएं।
विज्ञापन
शास्त्रों के अनुसार, मां का कालरात्रि स्वरूप अकाल मृत्यु से बचाकर काल का नाश करने वाला है। इनकी उपासना जीवन को मंगलकारी बनाती है। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों ने घरों में भी मां की आराधना की। सुबह स्नान के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लोगों ने मां को प्रसन्न करने का प्रयास किया। रात में महानिशा की उपासना की। पूरा नवरात्र व्रत रखने वाले लोग तो व्रत थे ही कुछ लोगों ने अष्टमी-नवमी एक ही दिन पड़ने से भ्रमवश सप्तमी को ही अष्टमी मानकर व्रत रखा।
विज्ञापन
आज महागौरी व सिद्धिदात्री होगी पूजा
महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के अनुसार भगवान शिव ने माता के इस रूप को महागौरी कहकर संबोधित किया और आशीर्वाद दिया कि मेरे साधक आपकी पूजा-अर्चना करके ही मेरे कृपापात्र हो सकते हैं। नवरात्र में आठवें दिन इन्हीं माता की पूजा की जाती है। इससे मां प्रसन्न होकर इहलौकिक व पारलौकिक सुख का आशीष देती हैं। ज्योतिषाचार्य शरद चंद मिश्र के अनुसार, मां दुर्गा के नौवीं शक्ति को सिद्धिदात्री नाम से जाना जाता है। ये अपने साधकों को सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। इन्हीं की कृपा से भगवन शिव में 18 सिद्धियां और नव निधियां विद्यमान हैं। इनकी अनुकंपा से ही भगवान शिव अर्धनारीश्वर हुए। नौवें दिन साधक सभी सिद्धियों को पाने के लिए मां के सिद्धिदात्री रूप की उपासना करते हैं।
विज्ञापन
पूर्णाहुति सुबह 7:04 बजे के बाद
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के मुताबिक आठ दिनों के नवरात्र व्रत की पूर्णाहुति रविवार सुबह 7:04 के बाद पूरे दिन की जा सकती है। विशेष पूर्णाहुति के पश्चात कन्याओं का पूजन होगा। तीन कन्याओं के पूजन से धन-यश की प्राप्ति, सात कन्या पूजन से राज्य प्राप्ति, आठ कन्या पूजन से संपदा व वैभव और नौ कुमारी पूजन से पृथ्वी व प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। कन्या पूजन में कन्याओं को मधुर भोजन ही कराएं, तीखा भोजन कदापि न कराएं।