{"_id":"59d7da954f1c1b87698b4715","slug":"91507318421-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में आएंगी किताबें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में आएंगी किताबें
Updated Sat, 07 Oct 2017 01:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में और किताबें आएंगी। विभागाध्यक्षों से फीडबैक लेने के बाद किताबें मंगाने का टेंडर निकाल दिया गया है। पहले चरण में 10 लाख रुपये कीमत की किताबें खरीदी जा रही हैं। यह खरीद चार साल बाद होने जा रही है। इससे पहले 2013 में कुछ किताबें खरीदी गई थीं।
यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में चार लाख टेक्स्ट और रिफरेंस बुक हैं। लाइब्रेरी प्रभारी प्रो. हर्ष सिन्हा ने बताया कि लाइब्रेरी का सालाना बजट 40 लाख रुपये का है। पहले चरण में टेक्स्ट बुक मंगाई जाएंगी। दूसरे चरण में रिफरेंस बुक खरीदी जाएंगी। यह सिलसिला आगे भी चलेगा। वर्ष 2016 के बाद की किताबें ही मंगाई जा रही हैं। शैक्षिक सत्र 2017-18 में अब तक चार हजार छात्र-छात्राओं ने लाइब्रेरी कार्ड बनवाए हैं। बीए, बीएससी और बीकॉम के हर छात्र-छात्रा को एक बार में दो-दो किताबें दी जाती हैं। एमए, एमएससी और एमकॉम के छात्र-छात्रा को तीन-तीन किताबें इश्यू होती हैं। लाइब्रेरी को आटोमेशन करने का काम भी चल रहा है। यह प्रयोग सफल रहा तो ई-बुक्स भी उपलब्ध हो जाएंगी। लाइब्रेरी के एप भी लांच होंगे। मोबाइल और लैपटॉप पर किताबें उपलब्ध कराने की योजना है।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में और किताबें आएंगी। विभागाध्यक्षों से फीडबैक लेने के बाद किताबें मंगाने का टेंडर निकाल दिया गया है। पहले चरण में 10 लाख रुपये कीमत की किताबें खरीदी जा रही हैं। यह खरीद चार साल बाद होने जा रही है। इससे पहले 2013 में कुछ किताबें खरीदी गई थीं।
यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में चार लाख टेक्स्ट और रिफरेंस बुक हैं। लाइब्रेरी प्रभारी प्रो. हर्ष सिन्हा ने बताया कि लाइब्रेरी का सालाना बजट 40 लाख रुपये का है। पहले चरण में टेक्स्ट बुक मंगाई जाएंगी। दूसरे चरण में रिफरेंस बुक खरीदी जाएंगी। यह सिलसिला आगे भी चलेगा। वर्ष 2016 के बाद की किताबें ही मंगाई जा रही हैं। शैक्षिक सत्र 2017-18 में अब तक चार हजार छात्र-छात्राओं ने लाइब्रेरी कार्ड बनवाए हैं। बीए, बीएससी और बीकॉम के हर छात्र-छात्रा को एक बार में दो-दो किताबें दी जाती हैं। एमए, एमएससी और एमकॉम के छात्र-छात्रा को तीन-तीन किताबें इश्यू होती हैं। लाइब्रेरी को आटोमेशन करने का काम भी चल रहा है। यह प्रयोग सफल रहा तो ई-बुक्स भी उपलब्ध हो जाएंगी। लाइब्रेरी के एप भी लांच होंगे। मोबाइल और लैपटॉप पर किताबें उपलब्ध कराने की योजना है।
विज्ञापन