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कागजों में दौड़ रहे ईटीसी सेंटर
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:39 AM IST
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आशुतोष मिश्र/गोरखपुर।
‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है।’ जिले के इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटरों (ईटीसी) का हाल देखकर अदम गोंडवी का यह शेर याद आ जाता है। सरकारी फाइलों में हर सीएचसी और पीएचसी पर इंसेफेलाइटिस मरीजों के इलाज के लिए ईटीसी आबाद हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी उलट है। तमाम अस्पतालों में अब तक यह शुरू नहीं हो पाया है तो कई जगहों पर शुरू होने के बाद निष्क्रिय है। कहीं बिना डॉक्टर मरीजों को ईटीसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है तो कहीं दवाओं के अभाव में मरीज रेफर कर दिए जा रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने जिले के ईटीसी की पड़ताल की तो हकीकत स्वास्थ्य विभाग के दावों से बिल्कुल जुदा मिली।
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इस व्यवस्था में तो काबू होने से रही इंसेफेलाइटिस
‘अमर उजाला’ की पड़ताल में ईटीसी का जो हाल सामने आया उससे तो इंसेफेलाइटिस काबू पाना लगभग असंभव सा है। जिले के कई अस्पतालों पर अब तक ईटीसी खोले ही नहीं गए। वहीं जिन अस्पतालों में ईटीसी संचालित हो रहे हैं उनमें अधिकतर बिना डॉक्टर के चल रहे हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रौलिया, महाराजगंज, सरहरी, पीपीगंज और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ढे़बरा बाजार में ईटीसी नहीं बना है। न्यू पीएचसी छपिया में तैनात डॉक्टर ईटीसी सेंटर के बारे में कुछ भी नहीं बता सके। कहा कि इसकी जानकारी एमओआईसी को होगी। बांसगांव, कौड़ीराम, हरनहीं सीएचसी और जंगल धूसड़ पीएचसी की बदहाल व्यवस्था मरीजों को इलाज के नाम पर सिर्फ रेफर करने का काम कर रही है।
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बंद मिला बांसगांव का ईटीसी
बांसगाव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार बेड वाला ईटीसी शुक्रवार को बंद था। पूछने पर पता चला कि गुरुवार को बहीडारि के राजेश का 8 वर्षीय पुत्र विवेक यहां भर्ती था। उसे बाद में मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
गगहा में इस साल भर्ती हुए छह मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गगहा में प्रभारी चिकित्साधिकारी बृजेश कुमार बर्नवाल ने बताया कि इस साल अब तक इंसेफेलाइटिस के छह मरीज भर्ती हुए। तीन स्वस्थ होकर घर लौट गए, जबकि तीन गोरखपुर रेफर किए गए।
नहीं खुला हरनही में ईटीसी का ताला
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरनही में बने ईटीसी का ताला आज तक नहीं खुला। तैनात डॉक्टर बीके मल्ल ने बताया कि इंसेफेलाइटिस के कुछ मरीज बीते दिनों यहां आए थे, उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
सहजनवां में इस माह भर्ती हुए 22 मरीज
सहजनवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच बेड का ईटीसी शुक्रवार को खाली था। गुरुवार को पाली के आनंद, हरपुर-बुदहट के आजाद, बसिया की इंद्रावती भर्ती थीं। इसमें इंद्रावती को जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया। यहां इस माह कुल 22 मरीज भर्ती हुए।
एक स्टाफ नर्स के भरोसे चल रहा था इलाज
चौरीचौरा सीएचसी में छह बेड का इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर है। इसमें एक स्टाफ नर्स की ड्यूटी रहती है। शुक्रवार को इंसेफेलाइटिस वार्ड में तेज बुखार से पीड़ित तीन मरीज आए, जिन्हें भर्ती किया गया। इलाज के बाद इन्हें छुट्टी दे दी गई। भटहट सामुदायिक केंद्र पर भी ईटीसी दुरुस्त मिला।
एएनएम के भरोसे मिला ईटीसी
कैंपियरगंज सीएचसी के ईटीसी में चार वर्षीय शिवा भर्ती था। मौके पर सिर्फ एएनएम मीनाक्षी मौजूद थीं। बताया कि फॉर्मासिस्ट डीडी मद्धेशिया जिला मुख्यालय पर कुछ सामान लेने गए हैं।
एक साल में एक भी मरीज नहीं पहुंचा
बडहलगंज सीएचसी पर बने ईटीसी में एक साल के भीतर एक भी मरीज नहीं आए। डॉ. शैलेश पांडेय ने बताया कि मरीजों के लिए वार्ड में भले ही ऑक्सीजन व सेक्सन पाइप उपलब्ध हैं, मगर जांच किट न होने से तेज बुखार के मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जा रहा है।
सभी ब्लॉक मुख्यालयों के अस्पतालों में ईटीसी संचालित की जा रही है। शुक्रवार को विभागीय मीटिंग के लिए डॉक्टरों को मुख्यालय बुलाया गया था। इसलिए डॉक्टर नहीं मिले होंगे। सभी सेंटर्स पर दवाएं एवं जांच किट मौजूद है। स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित इनकी जांच कर रही है, जहां गड़बड़ी मिल रही है, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।
- डॉ. रवींद्र कुमार, सीएमओ
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‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है।’ जिले के इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटरों (ईटीसी) का हाल देखकर अदम गोंडवी का यह शेर याद आ जाता है। सरकारी फाइलों में हर सीएचसी और पीएचसी पर इंसेफेलाइटिस मरीजों के इलाज के लिए ईटीसी आबाद हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी उलट है। तमाम अस्पतालों में अब तक यह शुरू नहीं हो पाया है तो कई जगहों पर शुरू होने के बाद निष्क्रिय है। कहीं बिना डॉक्टर मरीजों को ईटीसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है तो कहीं दवाओं के अभाव में मरीज रेफर कर दिए जा रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने जिले के ईटीसी की पड़ताल की तो हकीकत स्वास्थ्य विभाग के दावों से बिल्कुल जुदा मिली।
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इस व्यवस्था में तो काबू होने से रही इंसेफेलाइटिस
‘अमर उजाला’ की पड़ताल में ईटीसी का जो हाल सामने आया उससे तो इंसेफेलाइटिस काबू पाना लगभग असंभव सा है। जिले के कई अस्पतालों पर अब तक ईटीसी खोले ही नहीं गए। वहीं जिन अस्पतालों में ईटीसी संचालित हो रहे हैं उनमें अधिकतर बिना डॉक्टर के चल रहे हैं।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रौलिया, महाराजगंज, सरहरी, पीपीगंज और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ढे़बरा बाजार में ईटीसी नहीं बना है। न्यू पीएचसी छपिया में तैनात डॉक्टर ईटीसी सेंटर के बारे में कुछ भी नहीं बता सके। कहा कि इसकी जानकारी एमओआईसी को होगी। बांसगांव, कौड़ीराम, हरनहीं सीएचसी और जंगल धूसड़ पीएचसी की बदहाल व्यवस्था मरीजों को इलाज के नाम पर सिर्फ रेफर करने का काम कर रही है।
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बंद मिला बांसगांव का ईटीसी
बांसगाव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार बेड वाला ईटीसी शुक्रवार को बंद था। पूछने पर पता चला कि गुरुवार को बहीडारि के राजेश का 8 वर्षीय पुत्र विवेक यहां भर्ती था। उसे बाद में मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
गगहा में इस साल भर्ती हुए छह मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गगहा में प्रभारी चिकित्साधिकारी बृजेश कुमार बर्नवाल ने बताया कि इस साल अब तक इंसेफेलाइटिस के छह मरीज भर्ती हुए। तीन स्वस्थ होकर घर लौट गए, जबकि तीन गोरखपुर रेफर किए गए।
नहीं खुला हरनही में ईटीसी का ताला
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरनही में बने ईटीसी का ताला आज तक नहीं खुला। तैनात डॉक्टर बीके मल्ल ने बताया कि इंसेफेलाइटिस के कुछ मरीज बीते दिनों यहां आए थे, उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
सहजनवां में इस माह भर्ती हुए 22 मरीज
सहजनवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच बेड का ईटीसी शुक्रवार को खाली था। गुरुवार को पाली के आनंद, हरपुर-बुदहट के आजाद, बसिया की इंद्रावती भर्ती थीं। इसमें इंद्रावती को जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया। यहां इस माह कुल 22 मरीज भर्ती हुए।
एक स्टाफ नर्स के भरोसे चल रहा था इलाज
चौरीचौरा सीएचसी में छह बेड का इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर है। इसमें एक स्टाफ नर्स की ड्यूटी रहती है। शुक्रवार को इंसेफेलाइटिस वार्ड में तेज बुखार से पीड़ित तीन मरीज आए, जिन्हें भर्ती किया गया। इलाज के बाद इन्हें छुट्टी दे दी गई। भटहट सामुदायिक केंद्र पर भी ईटीसी दुरुस्त मिला।
एएनएम के भरोसे मिला ईटीसी
कैंपियरगंज सीएचसी के ईटीसी में चार वर्षीय शिवा भर्ती था। मौके पर सिर्फ एएनएम मीनाक्षी मौजूद थीं। बताया कि फॉर्मासिस्ट डीडी मद्धेशिया जिला मुख्यालय पर कुछ सामान लेने गए हैं।
एक साल में एक भी मरीज नहीं पहुंचा
बडहलगंज सीएचसी पर बने ईटीसी में एक साल के भीतर एक भी मरीज नहीं आए। डॉ. शैलेश पांडेय ने बताया कि मरीजों के लिए वार्ड में भले ही ऑक्सीजन व सेक्सन पाइप उपलब्ध हैं, मगर जांच किट न होने से तेज बुखार के मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जा रहा है।
सभी ब्लॉक मुख्यालयों के अस्पतालों में ईटीसी संचालित की जा रही है। शुक्रवार को विभागीय मीटिंग के लिए डॉक्टरों को मुख्यालय बुलाया गया था। इसलिए डॉक्टर नहीं मिले होंगे। सभी सेंटर्स पर दवाएं एवं जांच किट मौजूद है। स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित इनकी जांच कर रही है, जहां गड़बड़ी मिल रही है, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।
- डॉ. रवींद्र कुमार, सीएमओ