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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे दिग्विजयनाथ : दीक्षित
Updated Sat, 09 Sep 2017 08:43 PM IST
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गोरखपुर।
विधानसभा अध्यक्ष हृदयनाथ दीक्षित ने कहा कि दुनिया के राजनीतिक इतिहास में गोरक्ष पीठ ने उस विशिष्ट परंपरा को प्रतिष्ठित किया जो धर्म राजनीति को सिक्के का एक पहलू मानती है। भारत की इस सनातन परंपरा के वैचारिक अधिष्ठान को इस पीठ ने व्यवहारिक धरातल पर प्रतिष्ठित किया है। ब्रह्मलीन महंत सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। जब सांस्कृतिक राष्टवाद को स्वीकार करने अथवा उस पर स्पष्ट मत रखने में शासन सत्ता संकोच कर रही थी उस समय दिग्विजयनाथ ने घोषणा की थी कि हिंदुत्व ही भारत की राष्ट्रीयता है।
दीक्षित शनिवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व अवेद्यनाथ के पुण्य स्मृति में आयोजि श्रद्धांजलि समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दिग्विजयनाथ ने कहा था कि आजाद भारत का पुनर्निर्माण उसकी सांस्कृतिक विरासत पर ही करना होगा तभी स्वाभिमानी व स्वावलंबी भारत खड़ा होगा। कहा कि दिग्वियनाथ के वैचारिक अधिष्ठान को अवेद्यनाथ ने जनांदोलन बना दिया। योगी आदित्यनाथ उसी जनांदोलन के प्रतिफल हैं।
इस मौके पर पूर्व गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि 118 साल पूर्व बाबा गंभीरनाथ ने जो दिया जलाया था उसका निर्माण मेवाड़ की स्वाभिमानी धरती में हुआ था। वह आगे चल कर सूर्य के समान प्रदीप्त हुआ। स्वतंत्रता संग्राम में आध्यात्मिक शक्ति का जागरण करने में महंत दिग्वियनाथ का महत्वपूर्ण योगदान था। उनके चलते आध्यात्मिक राष्ट्रवाद का आह्वान राष्ट्र धर्म बन गया। यद्यपि समाजवादियों , साम्यवादियों ने इस धारा को कमजोर करने का प्रयास किया फिर भी वह इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहे।
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आरएसएस के प्रांत प्रचारक मुकेश खांडेकर ने कहा कि शिक्षा, चिकित्सा, सेवा के क्षेत्र में गोरक्ष पीठ ने जो प्रतिमान खड़ा किया है वह पूरे देश में कही नहीं दिखाई पड़ता है। स्वामी राघवाचार्य महराज ने कहा कि गोरक्ष पीठ की यह श्रद्धांजलि सभा इस लिए विशिष्ट है कि संसद विधानसभाओं में जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा नहीं हो पाती उस पर इस श्रद्धांजलि सभा में विचार किए जाते हैं।
महाराणा शिक्षा परिषद के सभी संस्थाओं की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर केंद्रीय कृषिराज मंत्री कृष्णा राज, विधायक शीतल पांडेय, विपिन सिंह, विमलेश पासवान, संतप्रसाद , एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, महंत रविंद्र दास, विद्या चैतन्य महराज सहित अन्य बहुत से प्रमुख लोग उपस्थित थे।
विधानसभा अध्यक्ष हृदयनाथ दीक्षित ने कहा कि दुनिया के राजनीतिक इतिहास में गोरक्ष पीठ ने उस विशिष्ट परंपरा को प्रतिष्ठित किया जो धर्म राजनीति को सिक्के का एक पहलू मानती है। भारत की इस सनातन परंपरा के वैचारिक अधिष्ठान को इस पीठ ने व्यवहारिक धरातल पर प्रतिष्ठित किया है। ब्रह्मलीन महंत सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे। जब सांस्कृतिक राष्टवाद को स्वीकार करने अथवा उस पर स्पष्ट मत रखने में शासन सत्ता संकोच कर रही थी उस समय दिग्विजयनाथ ने घोषणा की थी कि हिंदुत्व ही भारत की राष्ट्रीयता है।
दीक्षित शनिवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व अवेद्यनाथ के पुण्य स्मृति में आयोजि श्रद्धांजलि समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दिग्विजयनाथ ने कहा था कि आजाद भारत का पुनर्निर्माण उसकी सांस्कृतिक विरासत पर ही करना होगा तभी स्वाभिमानी व स्वावलंबी भारत खड़ा होगा। कहा कि दिग्वियनाथ के वैचारिक अधिष्ठान को अवेद्यनाथ ने जनांदोलन बना दिया। योगी आदित्यनाथ उसी जनांदोलन के प्रतिफल हैं।
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इस मौके पर पूर्व गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि 118 साल पूर्व बाबा गंभीरनाथ ने जो दिया जलाया था उसका निर्माण मेवाड़ की स्वाभिमानी धरती में हुआ था। वह आगे चल कर सूर्य के समान प्रदीप्त हुआ। स्वतंत्रता संग्राम में आध्यात्मिक शक्ति का जागरण करने में महंत दिग्वियनाथ का महत्वपूर्ण योगदान था। उनके चलते आध्यात्मिक राष्ट्रवाद का आह्वान राष्ट्र धर्म बन गया। यद्यपि समाजवादियों , साम्यवादियों ने इस धारा को कमजोर करने का प्रयास किया फिर भी वह इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहे।
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आरएसएस के प्रांत प्रचारक मुकेश खांडेकर ने कहा कि शिक्षा, चिकित्सा, सेवा के क्षेत्र में गोरक्ष पीठ ने जो प्रतिमान खड़ा किया है वह पूरे देश में कही नहीं दिखाई पड़ता है। स्वामी राघवाचार्य महराज ने कहा कि गोरक्ष पीठ की यह श्रद्धांजलि सभा इस लिए विशिष्ट है कि संसद विधानसभाओं में जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा नहीं हो पाती उस पर इस श्रद्धांजलि सभा में विचार किए जाते हैं।
महाराणा शिक्षा परिषद के सभी संस्थाओं की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर केंद्रीय कृषिराज मंत्री कृष्णा राज, विधायक शीतल पांडेय, विपिन सिंह, विमलेश पासवान, संतप्रसाद , एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, महंत रविंद्र दास, विद्या चैतन्य महराज सहित अन्य बहुत से प्रमुख लोग उपस्थित थे।