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निरस्त होगा गीडा के 83 प्लाट का आवंटन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 22 Jun 2016 08:49 PM IST
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गीडा
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नियम-कानून की परवाह किए बिना गीडा में आवंटित किए गए प्लाटों के मामले में पूर्व सीईओ ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी के साथ ही आवंटियों की भी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। गलत तरीके से आवंटित इन सभी 83 प्लाट का आवंटन निरस्त होने जा रहा है। कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद की सख्ती के बाद गीडा बोर्ड ने इन प्लाटों को निरस्त करने का निर्णय लिया है।
कमिश्नर ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि हाल ही में हुई बोर्ड की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया है। कार्रवाई को लेकर अगर टाल-मटोल होती है तो संबंधित की जवाबदेही बनेगी। यही नहीं, पार्क और ग्रीन बेल्ट का ले-आउट बदलकर जो प्लाट आवंटित कर दिए गए, उनका भी आवंटन निरस्त किया जाएगा।
गीडा के 25 प्लाट के आवंटन के लिए महकमे की तरफ से विज्ञापन निकाला गया था, मगर पूर्व सीईओ ने 83 प्लाट आवंटित कर दिए। कमिश्नर से इसकी शिकायत हुई थी जिसपर उन्होंने पूर्व सीडीओ कुमार प्रशांत और अपर आयुक्त बसंत राम से जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए जिसपर कमिश्नर ने पूर्व सीईओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति की थी।
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इसपर पूर्व सीईओ हाईकोर्ट चले गए और यह हवाला देते हुए इस जांच को गलत बताया कि जिन्होंने उनकी जांच की वे उनसे जूनियर हैं जो नियमसंगत नहीं है। इसपर कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए उनके खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि अगर शासन चाहे तो उनपर लगे आरोपों की जांच उनसे वरिष्ठ अधिकारी से करा सकता है।
इसके बाद शासन ने चकबंदी आयुक्त डॉ हरिओम को इस मामले की जांच सौंप दी। हरिओम गोरखपुर के डीएम भी रह चुके हैं और उनकी गिनती तेज तर्रार अफसरों में होती है। 18 जून को हुई गीडा बोर्ड बैठक में जब आवंटित प्लाटों को निरस्त करने का मामला उठा तो सीईओ देव कृष्ण तिवारी समेत बोर्ड के कुछ सदस्यों ने यह कहते हुए इसपर एतराज जताया कि मामला कोर्ट का है और इसपर जांच चल रही है।
इसपर कमिश्नर और डीएम ओएन सिंह ने कहा कि अभी इस मामले में कोई आदेश नहीं आया है और महकमे की सबसे बड़ी अथारिटी होने की वजह से गीडा बोर्ड प्लाट निरस्त कर सकता है क्योंकि स्थानीय स्तर पर हुई जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद निरस्तीकरण की कार्रवाई पर बोर्ड के सभी सदस्यों ने भी सहमति जताई।
पूर्व सीईओ की जांच शुरू, मांगे गए दस्तावेज
गीडा के पूर्व सीईओ ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। उन पर लगे चार्ज से जुड़ी फाइलें जांच अधिकारी व चकबंदी आयुक्त डॉ हरिओम ने गीडा से मांगी हैं। बकौल कमिश्नर, गीडा के सीईओ देव कृष्ण तिवारी ने चार दिन पहले हुई बोर्ड बैठक में इसकी पुष्टि की।
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कमिश्नर ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि हाल ही में हुई बोर्ड की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया है। कार्रवाई को लेकर अगर टाल-मटोल होती है तो संबंधित की जवाबदेही बनेगी। यही नहीं, पार्क और ग्रीन बेल्ट का ले-आउट बदलकर जो प्लाट आवंटित कर दिए गए, उनका भी आवंटन निरस्त किया जाएगा।
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गीडा के 25 प्लाट के आवंटन के लिए महकमे की तरफ से विज्ञापन निकाला गया था, मगर पूर्व सीईओ ने 83 प्लाट आवंटित कर दिए। कमिश्नर से इसकी शिकायत हुई थी जिसपर उन्होंने पूर्व सीडीओ कुमार प्रशांत और अपर आयुक्त बसंत राम से जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए जिसपर कमिश्नर ने पूर्व सीईओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति की थी।
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इसपर पूर्व सीईओ हाईकोर्ट चले गए और यह हवाला देते हुए इस जांच को गलत बताया कि जिन्होंने उनकी जांच की वे उनसे जूनियर हैं जो नियमसंगत नहीं है। इसपर कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए उनके खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि अगर शासन चाहे तो उनपर लगे आरोपों की जांच उनसे वरिष्ठ अधिकारी से करा सकता है।
इसके बाद शासन ने चकबंदी आयुक्त डॉ हरिओम को इस मामले की जांच सौंप दी। हरिओम गोरखपुर के डीएम भी रह चुके हैं और उनकी गिनती तेज तर्रार अफसरों में होती है। 18 जून को हुई गीडा बोर्ड बैठक में जब आवंटित प्लाटों को निरस्त करने का मामला उठा तो सीईओ देव कृष्ण तिवारी समेत बोर्ड के कुछ सदस्यों ने यह कहते हुए इसपर एतराज जताया कि मामला कोर्ट का है और इसपर जांच चल रही है।
इसपर कमिश्नर और डीएम ओएन सिंह ने कहा कि अभी इस मामले में कोई आदेश नहीं आया है और महकमे की सबसे बड़ी अथारिटी होने की वजह से गीडा बोर्ड प्लाट निरस्त कर सकता है क्योंकि स्थानीय स्तर पर हुई जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद निरस्तीकरण की कार्रवाई पर बोर्ड के सभी सदस्यों ने भी सहमति जताई।
पूर्व सीईओ की जांच शुरू, मांगे गए दस्तावेज
गीडा के पूर्व सीईओ ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। उन पर लगे चार्ज से जुड़ी फाइलें जांच अधिकारी व चकबंदी आयुक्त डॉ हरिओम ने गीडा से मांगी हैं। बकौल कमिश्नर, गीडा के सीईओ देव कृष्ण तिवारी ने चार दिन पहले हुई बोर्ड बैठक में इसकी पुष्टि की।