{"_id":"5a1457d94f1c1b156b8b756f","slug":"81511282649-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महफिल-ए-सीरतुन्नबी में बयां की नबी-ए-पाक की शख्सियत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महफिल-ए-सीरतुन्नबी में बयां की नबी-ए-पाक की शख्सियत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 22 Nov 2017 01:35 AM IST
विज्ञापन
हजरत मोहम्मद की यौम-ए-पैदाइश के उपलक्ष्य में 12 दिवसीय कार्यक्रम शुरू हुआ।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर 12 दिवसीय ‘महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ दर्स का आगाज मंगलवार को जोहर की नमाज के बाद हुआ।
मुफ्ती अख्तर हुसैन ने नबी-ए-पाक हजरत मुहम्मद की जिंदगी व सीरत पर रोशनी डाली। कहा कि जब-जब दुनिया में बुराइयां बढ़ती हैं तब-तब खुदा इंसानों की रहनुमाई के लिए नबी व रसूल को भेजता है। नबी-ए-पाक ने ऐसे जमाने में जन्म लिया, जब अरब के हालात बेहद खराब थे। बच्चियों को जिंदा दफन कर दिया जाता था। बेवाओं पर अत्याचार होता था। छोटी-छोटी बात पर तलवारें चल जाती थीं। इंसानियत शर्मसार हो रही थी। ऐसे समय में इंसानों की रहनुमाई के लिए इस्लामी तारीख 12 रबीउल अव्वल शरीफ को अरब के मक्का शहर में नबी-ए-पाक का जन्म हुआ। उन्होंने हमेशा यही शिक्षा दी कि हम सभी एक खुदा के बंदे हैं।
मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि उस दौर में हजरत मोहम्मद साहब का विरोध भी हुआ। उन्हें तरह-तरह की तकलीफें दी गईं, मगर उन्होंने इनका हंसकर सामना किया। इतनी परेशानियों के बाद भी उन्होंने खुदा के पैगाम को पूरी दुनिया में पहुंचाया। इस मौके पर दरगाह सदर इकरार अहमद, कारी महबूब आलम, शाह आलम, शहादत हुसैन, रमजान, कुतबुद्दीन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
मुफ्ती अख्तर हुसैन ने नबी-ए-पाक हजरत मुहम्मद की जिंदगी व सीरत पर रोशनी डाली। कहा कि जब-जब दुनिया में बुराइयां बढ़ती हैं तब-तब खुदा इंसानों की रहनुमाई के लिए नबी व रसूल को भेजता है। नबी-ए-पाक ने ऐसे जमाने में जन्म लिया, जब अरब के हालात बेहद खराब थे। बच्चियों को जिंदा दफन कर दिया जाता था। बेवाओं पर अत्याचार होता था। छोटी-छोटी बात पर तलवारें चल जाती थीं। इंसानियत शर्मसार हो रही थी। ऐसे समय में इंसानों की रहनुमाई के लिए इस्लामी तारीख 12 रबीउल अव्वल शरीफ को अरब के मक्का शहर में नबी-ए-पाक का जन्म हुआ। उन्होंने हमेशा यही शिक्षा दी कि हम सभी एक खुदा के बंदे हैं।
मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि उस दौर में हजरत मोहम्मद साहब का विरोध भी हुआ। उन्हें तरह-तरह की तकलीफें दी गईं, मगर उन्होंने इनका हंसकर सामना किया। इतनी परेशानियों के बाद भी उन्होंने खुदा के पैगाम को पूरी दुनिया में पहुंचाया। इस मौके पर दरगाह सदर इकरार अहमद, कारी महबूब आलम, शाह आलम, शहादत हुसैन, रमजान, कुतबुद्दीन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन