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एकाउंट कर्मियों ने सिक्योरिटी कंपनी के 80 लाख हड़पे

Sat, 14 Sep 2019 01:42 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 01:42 AM IST
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80 laks fraud in gorakhpur
एकाउंट कर्मियों ने सिक्योरिटी कंपनी के 80 लाख हड़पे
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गोरखपुर। कैंट के छात्रसंघ चौराहा स्थित जीआईएस गोरखपुर एंटीलिजेंस नाम की कंपनी के 80 लाख रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एकाउंट कर्मचारी ऋषभ श्रीवास्तव व रंजू शर्मा ने मिलकर गबन किया है। जिन तीन लोगों के खाते में रुपये भेजे गए हैं उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। कंपनी के संचालक लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण मुरारी राय की तहरीर पर पुलिस ने दो एकाउंटेंट समेत पांच लोगों के खिलाफ विश्वास हनन कर आपराधिक कृत्य करने की धारा में केस दर्ज किया है। शुक्रवार को संचालक कर्नल और उनकी बेटी ने एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई है।
खोराबार के भरवलिया स्थित विक्रमपुर निवासी कृष्ण मुरारी राय सेना से लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायर हैं। वह छात्रसंघ के शांति कांप्लेक्स में जीआईएस गोरखपुर एंटीलिजेंस सिक्योरिटी नाम से कंपनी चलाते हैं। वहां से विभिन्न कंपनियों में प्राइवेट सुरक्षाकर्मी मुहैया कराए जाते हैं। कंपनी में 70 से अधिक लोग काम करते हैं। तहरीर के मुताबिक कंपनी में गोरखनाथ के राजेंद्र नगर निवासी दीनानाथ की बेटी रंजू शर्मा एकाउंट कर्मचारी थीं। उन्होंने अक्तूबर 2016 से जून 2019 तक काम किया। इस बीच उनसे मिलने बिलंदपुर के डीआईजी बंग्ला निवासी ऋषभ श्रीवास्तव आता था। जनवरी 2019 से ऋषभ भी बतौर एकाउंट काम करने लगा। थाने में दर्ज केस के मुताबिक कंपनी का खाता एसबीआई की मुख्य ब्रांच में है, जिससे कर्मचारियों के खाते में सैलरी भेजी जाती है। आरोप है कि एक वर्ष से रंजू और ऋषभ मिलकर अपने रिश्तेदारों के नाम से बिल बनाकर कंपनी के खाते से रुपये निकालते रहे। एक वर्ष में 80 लाख से अधिक रुपये निकाले गए हैं। संचालक का कहना है कि 11 सितंबर को बैलेंस सीट चेक करते समय गबन का पता चला। पुलिस ने तहरीर के आधार पर एकाउंट कर्मचारी रंजू शर्मा, ऋषभ शर्मा, प्रेरणा श्रीवास्तव, परमेश्वर और लक्ष्मी प्रजापति के खिलाफ केस दर्ज किया है। कैंट इंस्पेक्टर रवि राय ने बताया कि छानबीन की जा रही है।
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ऐसे की धोखाधड़ी
कंपनी संचालक ने बताया कि हर महीने वेतन के अलावा अन्य मदों में रुपये मेरे खाते से भेजे जाते हैं। दोनों एकाउंटेंट वेतन बिल की सूची में हर महीने दो से चार लोगों के नाम बढ़ा देते थे। बैंक जाने के बाद रुपये उनके खाते में भेज दिए जाते रहे। सालाना बैलेंस सीट चेक करने पर चोरी पकड़ में आई। दोनों एकाउंट कर्मचारी ने खुद के खाते के अलावा, अपने रिश्तेदार व परिचितों प्रेरणा, परमेश्वर, लक्ष्मी के छह खातों में रुपये भेजे हैं।
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