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‘थोड़ी सजगता से बचा सकते हैं सड़क हादसे में घायल की जान’
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 02 Jul 2018 01:58 AM IST
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डॉक्टर डे पर स्थानीय होटल में गोष्ठी का आयोजन हुआ।
गोरखपुर। डॉक्टरर्स डे पर जनरल प्रैक्टिनर्स (जीपी) एसोसिएशन की ओर से वार्षिक वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान शहर के चिकित्सक किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से आए डॉक्टरों की टीम से सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने का गुर सीखे। केजीएमयू में एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (एटीएलएस) के प्रभारी डॉ. विनोद जैन ने बताया कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजह दम घुटना है। सांस की नली के मुड़ने से ऐसा होता है। केजीएमयू के डॉ. समीर मिश्र ने बताया कि दुर्घटनास्थल पर पहले पहुंचने वाले व्यक्ति की सजगता से कई घायलों को बचाया जा सकता है। इसमें कुछ खास नहीं करना होता है। बस घायल को पीठ के बल सीधा लिटा देना चाहिए।
लखनऊ के सिप्स हॉस्पिटल के संचालक डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि देश में टीबी, एचआईवी और मलेरिया को सर्वाधिक जानलेवा बीमारी माना जाता है। देश में इन तीनों से होने वाली कुल मौतों से अधिक मौतें सिर्फ सड़क हादसे में मौके पर ही हो जा रही हैं।
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लखनऊ के सिप्स हॉस्पिटल के संचालक डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि देश में टीबी, एचआईवी और मलेरिया को सर्वाधिक जानलेवा बीमारी माना जाता है। देश में इन तीनों से होने वाली कुल मौतों से अधिक मौतें सिर्फ सड़क हादसे में मौके पर ही हो जा रही हैं।
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लापता हैं 12 लाख टीबी के मरीज
क्षय रोग रोग उन्मूलन कार्यक्रम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी वार्षिक वैज्ञानिक संगोष्ठी को संबोधित किया। कहा कि देश में टीबी के करीब 28 लाख मरीज हैं। इनमें से 12 लाख मरीजों का पता नहीं है। ये कहां और किस डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, इसकी कोई सूचना सरकार के पास नहीं है। इसमें मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) के मरीज भी हैं। टीबी का इलाज अब बेहद सरल है। जीन एक्सपर्ट मशीन के कारण एमडीआर की पहचान में सिर्फ 90 मिनट लगते हैं।
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