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जेल में जिंदगी तलाश रही डॉ. पू र्णिमा
Updated Wed, 06 Sep 2017 01:55 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रकरण में गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला ने बहुत जल्द हालात से तालमेल कर लिया है। वे सच का सामना करने को तैयार दिख रही हैं। गिरफ्तारी के बाद डॉ राजीव मिश्र कई बार भावुक हो चुके हैं लेकिन वे शुरूआत से ही मजबूत दिख रही हैं। जेल पहुंचने के बाद डॉ. पूर्णिमा ने पति डॉ. राजीव को बेस्ट ऑफ लक कहा था। जेल प्रशासन की मानें तो यह भी कहते सुना गया कि घबराने की जरूरत नहीं है। सब ठीक हो जाएगा।
डॉ पूर्णिमा को इस बात का आभास हो गया है कि उनपर जिस तरह के आरोप हैं उसमें ेउन्हें काफी वक्त जेल में गुजारना पड़ सकता है। यही वजह है कि उन्होंने जेल में सजायाफ्ता कैदी मधुमणि की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। उनकी ओर से पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की पत्नी की बैरक में शिफ्ट किए जाने की अर्जी भी लगाई है। हालांकि वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी का कहना है कि जेल मैनुअल के हिसाब से यह मुमकिन नहीं है। इस तरह की अर्जी पर विचार नहीं किया जाएगा। डॉ. पूर्णिमा को महिला बैरक में ही रखा जाएगा। कुछ कारणों से डॉ. कफील का बैरक जरूर बदला गया है। लेकिन डॉ. राजीव या फिर डॉ. पूर्णिमा के बैरक में कोई बदलाव नहीं होगा।
जेल सूत्रों की माने तो डॉ पूर्णिमा फिलहाल थाईलैंड की महिला बंदी से बात करके समय गुजार रही हैं। इसके अलावा कुछ और महिला बंदियों से भी उनकी दोस्ती की चर्चा है। जेल जाने के बाद से डॉ. पूर्णिमा के व्यवहार में तब्दीली आई है। वह खुद को मजबूत महिला के तौर पर पेश करने का प्रयास कर रही हैं।
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डॉ. पूर्णिमा को मधुमणि जैसी सुविधा की चाह
पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की पत्नी मधुमणि को जेल में ही तमाम सुविधाएं मिलने की चर्चा है। कहा जाता है कि मधुमणि को महिलाओं के मिलेनियम बैरक में रखा गया है। यह बैरक अपेक्षाकृत ज्यादा सुविधा-संसाधनों से लैस मानी जाती है। वहीं डॉ. पूर्णिमा जिस बैरक में हैं, उसमें 39 और महिला बंदियों को रखा गया है। बैरक में शोरगुल, आपाधापी का माहौल रहता है। नियम, कानून और निर्धारित मानक का अनुपालन करना पड़ता है। यही डॉ. पूर्णिमा को पसंद नहीं आ रहा है। वह जेल में ही अच्छी जिंदगी जीना चाह रही हैं और इसकी तलाश में हाथ-पांव भी मार रही हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रकरण में गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला ने बहुत जल्द हालात से तालमेल कर लिया है। वे सच का सामना करने को तैयार दिख रही हैं। गिरफ्तारी के बाद डॉ राजीव मिश्र कई बार भावुक हो चुके हैं लेकिन वे शुरूआत से ही मजबूत दिख रही हैं। जेल पहुंचने के बाद डॉ. पूर्णिमा ने पति डॉ. राजीव को बेस्ट ऑफ लक कहा था। जेल प्रशासन की मानें तो यह भी कहते सुना गया कि घबराने की जरूरत नहीं है। सब ठीक हो जाएगा।
डॉ पूर्णिमा को इस बात का आभास हो गया है कि उनपर जिस तरह के आरोप हैं उसमें ेउन्हें काफी वक्त जेल में गुजारना पड़ सकता है। यही वजह है कि उन्होंने जेल में सजायाफ्ता कैदी मधुमणि की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। उनकी ओर से पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की पत्नी की बैरक में शिफ्ट किए जाने की अर्जी भी लगाई है। हालांकि वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी का कहना है कि जेल मैनुअल के हिसाब से यह मुमकिन नहीं है। इस तरह की अर्जी पर विचार नहीं किया जाएगा। डॉ. पूर्णिमा को महिला बैरक में ही रखा जाएगा। कुछ कारणों से डॉ. कफील का बैरक जरूर बदला गया है। लेकिन डॉ. राजीव या फिर डॉ. पूर्णिमा के बैरक में कोई बदलाव नहीं होगा।
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जेल सूत्रों की माने तो डॉ पूर्णिमा फिलहाल थाईलैंड की महिला बंदी से बात करके समय गुजार रही हैं। इसके अलावा कुछ और महिला बंदियों से भी उनकी दोस्ती की चर्चा है। जेल जाने के बाद से डॉ. पूर्णिमा के व्यवहार में तब्दीली आई है। वह खुद को मजबूत महिला के तौर पर पेश करने का प्रयास कर रही हैं।
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डॉ. पूर्णिमा को मधुमणि जैसी सुविधा की चाह
पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की पत्नी मधुमणि को जेल में ही तमाम सुविधाएं मिलने की चर्चा है। कहा जाता है कि मधुमणि को महिलाओं के मिलेनियम बैरक में रखा गया है। यह बैरक अपेक्षाकृत ज्यादा सुविधा-संसाधनों से लैस मानी जाती है। वहीं डॉ. पूर्णिमा जिस बैरक में हैं, उसमें 39 और महिला बंदियों को रखा गया है। बैरक में शोरगुल, आपाधापी का माहौल रहता है। नियम, कानून और निर्धारित मानक का अनुपालन करना पड़ता है। यही डॉ. पूर्णिमा को पसंद नहीं आ रहा है। वह जेल में ही अच्छी जिंदगी जीना चाह रही हैं और इसकी तलाश में हाथ-पांव भी मार रही हैं।