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खाली रह गईं कॉलेजों की 643 सीटें

Fri, 15 Jul 2016 08:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Fri, 15 Jul 2016 08:01 PM IST
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643 seats of B.Ed. colleges are still vaccent
दाखिला - फोटो : demo pic
बीएड की सीटों को भरने के लिए पूल काउंसिलिंग से लेकर सीधे प्रवेश तक की तरकीब कामयाब नहीं हुई है। प्रवेश परीक्षा देने वाले सभी अभ्यर्थियों को बुलाने की कवायद के बावजूद गोरखपुर यूनिवर्सिटी से जुड़े स्व-वित्तपोषित कॉलेजों की 643 सीटें खाली रह गईं। उधर, लखनऊ यूनिवर्सिटी ने शुक्रवार की शाम चार बजे बीएड 2016-18 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया बंद कर दी। पिछले चार दिनों से चल रही सीधे प्रवेश की छूट के बावजूद कॉलेजों को महज 413 अभ्यर्थी ही मिल सके।
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बीएड को लेकर अभ्यर्थियों का रुझान इस बार की प्रवेश प्रक्रिया में शुरू से ही कम दिखा। पहले चरण की काउंसिलिंग के दौरान ही माइनस अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश का न्यौता दिया गया, बावजूद इसके 25 फीसदी सीटें खाली रह गईं। खाली सीटों की स्थिति को देखते हुए आयोजक लखनऊ यूनिवर्सिटी ने तीन दिन की पूल काउंसिलिंग प्रक्रिया आयोजित की, लेकिन सीटों को भरने में इसमें भी कामयाबी नहीं मिली।
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पूल काउंसिलिंग के बाद भी 4075 के मुकाबले 1056 सीटें खाली रह गईं। फिर शुरू हुई सीधे प्रवेश की कवायद। इसके लिए लखनऊ यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों को चार दिन का वक्त दिया। कॉलेजों ने इन दिनों में हर जतन किए, लेकिन 413 सीटों पर ही प्रवेश लेने कामयाब हो सके। 643 सीटें फिर भी खाली रह गईं। अगर जिलावार कॉलेज में बीएड सीटों पर गौर करें तो गोरखपुर में 652 सीटों के लिए सीधे प्रवेश की प्रक्रिया अपनाई गई लेकिन केवल 236 प्रवेश हो सके। 416 सीटें खाली रह गईं। देवरिया में 224 में 112 सीटों को भरने में सफलता मिल सकी, 112 सीटें नहीं भर सकीं। कुशीनगर में 180 के मुकाबले 65 प्रवेश ही हुए, 115 सीटों पर प्रवेश नहीं हो सका। 
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13 कॉलेजों को मिली सौ फीसदी सफलता
बीएड के प्रति अभ्यर्थियों के घटते रुझान के बीच यूनिवर्सिटी के अलावा उससे संबद्ध कुल 51 कॉलेज सीटों को भरने की दौड़ में शामिल थे, लेकिन 13 कॉलेजों को ही अपनी सीटों को भरने में सफलता मिल सकी। यूनिवर्सिटी और अनुदानित कॉलेजों की सीटें पहले दौर की काउंसिलिंग में ही भर गईं, लेकिन 48 स्व-वित्तपोषित कॉलेजों को पूल काउंसिलिंग की राह देखनी पड़ी। पूल काउंसिलिंग में प्रवेश परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों को बुलाया गया पर दिग्विजयनाथ एलटी कॉलेज के अलावा किसी भी कॉलेज की सीटें नहीं भर सकीं। इसके बाद जब 47 कॉलेजों को सीधे प्रवेश की इजाजत दी गई तो इसमें शहर के सरस्वती विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय समेत केवल नौ कॉलेज ही अपनी सीटों को भर सके। इनमें गोरखपुर के पांच, देवरिया के तीन और कुशीनगर का एक कॉलेज शामिल है। 31 कॉलेजों की सीटें सारी कवायद के बाद भी नहीं भर सकीं।
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