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फर्जी शिक्षक और अफसरों पर केस दर्ज
Fri, 21 Dec 2018 01:07 AM IST
ajay Kumar
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Published by: ajay Kumar
Updated Fri, 21 Dec 2018 01:07 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
गोरखपुर। फर्जी दस्तावेजों की मदद से 20 साल से शिक्षक के तौर पर नौकरी कर रहे एक शख्स और विभागीय अफसरों के खिलाफ पुलिस ने जालसाजी का केस दर्ज किया है। कोर्ट के आदेश पर झंगहा पुलिस ने यह कार्रवाई की है। आरोप है कि वह आजमगढ़ के तैनात एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अब्दुल रशीद के नाम पर फर्जी तरीके से नौकरी कर रहा था। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
तिवारीपुर के घोषीपुर निवासी डॉ. अब्दुल रशीद आजमगढ़ के माल्टारी स्थित गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। डॉ. रशीद के मुताबिक उन्होंने 3 मार्च 1994 से 16 दिसंबर 1996 तक बेलघाट के प्राथमिक विद्यालय राइपुर में बतौर सहायक अध्यापक नौकरी की। प्रवक्ता पद पर नियुक्ति होने के बाद सहायक अध्यापक पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मदद से एक अज्ञात व्यक्ति 20 साल से उनके नाम पर वेतन ले रहा था। कुछ दिन पहले तक वह ब्रह्मपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बेनीजोत, खरहरा में बतौर प्रधानाध्यापक तैनात था। डॉ. रशीद के मुताबिक शिकायत के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उन्होंने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। अब कोर्ट ने केस दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
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तिवारीपुर के घोषीपुर निवासी डॉ. अब्दुल रशीद आजमगढ़ के माल्टारी स्थित गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। डॉ. रशीद के मुताबिक उन्होंने 3 मार्च 1994 से 16 दिसंबर 1996 तक बेलघाट के प्राथमिक विद्यालय राइपुर में बतौर सहायक अध्यापक नौकरी की। प्रवक्ता पद पर नियुक्ति होने के बाद सहायक अध्यापक पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मदद से एक अज्ञात व्यक्ति 20 साल से उनके नाम पर वेतन ले रहा था। कुछ दिन पहले तक वह ब्रह्मपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बेनीजोत, खरहरा में बतौर प्रधानाध्यापक तैनात था। डॉ. रशीद के मुताबिक शिकायत के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उन्होंने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। अब कोर्ट ने केस दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
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