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नबी-ए-पाक ने दुनिया को दिया बेटी बचाने का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 26 Nov 2017 07:08 PM IST
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नार्मल स्थित दरगाह।
- फोटो : Amar Ujala
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नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर 12 दिवसीय ‘महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ का सिलसिला छठवें दिन रविवार को भी जारी रहा। इस दौरान मिस्र की सूफी मस्जिद पर हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए मृतकों के लिए दुआ की गई।
मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि नबी-ए-पाक हजरत मुहम्मद ने फरमाया कि जो इस दुनिया में बच्चियों की खुशी-खुशी सही तालीम दिलाएगा और उनकी सही तरीके से परवरिश करेगा, उसे मैं जन्नत में लेकर जाऊंगा। नबी-ए-पाक ने 14 सौ साल पहले पूरी दुनिया को शिक्षा हासिल करने, बेटी बचाने व स्वच्छता का संदेश दिया। इसी वजह से इस्लाम में स्वच्छता को आधा ईमान करार दिया गया है। मजदूरों के हक की आवाज सबसे पहले नबी ने उठाई और पसीना सूखने से पहले मजदूरी देने का हुक्म दिया। विधवा से शादी करके महिलाओं का सम्मान बढ़ाया। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिया। पत्थर खाकर, जुल्म सहकर भी दुआएं दीं और अहिंसा का पैगाम दिया।
मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने भी दर्स को संबोधित किया। इस दौरान मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, कारी महबूब आल, अहमद फराज, दरगाह सदर इकरार अहमद, मंजूर आलम, शाह आलम, शहादत हुसैन आदि मौजूद रहे।
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मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि नबी-ए-पाक हजरत मुहम्मद ने फरमाया कि जो इस दुनिया में बच्चियों की खुशी-खुशी सही तालीम दिलाएगा और उनकी सही तरीके से परवरिश करेगा, उसे मैं जन्नत में लेकर जाऊंगा। नबी-ए-पाक ने 14 सौ साल पहले पूरी दुनिया को शिक्षा हासिल करने, बेटी बचाने व स्वच्छता का संदेश दिया। इसी वजह से इस्लाम में स्वच्छता को आधा ईमान करार दिया गया है। मजदूरों के हक की आवाज सबसे पहले नबी ने उठाई और पसीना सूखने से पहले मजदूरी देने का हुक्म दिया। विधवा से शादी करके महिलाओं का सम्मान बढ़ाया। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिया। पत्थर खाकर, जुल्म सहकर भी दुआएं दीं और अहिंसा का पैगाम दिया।
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मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने भी दर्स को संबोधित किया। इस दौरान मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, कारी महबूब आल, अहमद फराज, दरगाह सदर इकरार अहमद, मंजूर आलम, शाह आलम, शहादत हुसैन आदि मौजूद रहे।
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