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जांच की जद में बीआरडी के दोषियों की संपति
Updated Wed, 30 Aug 2017 02:08 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट के दौरान हुई मौतों के आरोपियों में से कई ने आय से ज्यादा संपत्ति जुटाई है। इसे लेकर भी इनके खिलाफ शिकंजा कसे जाने के संकेत मिले हैं। इन आरोपियों की संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की संपत्ति का ब्यौरा शासन ने मांगा है। प्रारंभिक सूचना के हिसाब से डॉक्टर दंपति के पास शहर में नर्सिंग होम, दो फ्लैट और एक मकान हैं। लखनऊ के लालकुआं इलाके में भी एक मकान बताया जा रहा है। शहर के जिस जेमिनी पैराडाइज में डॉ. राजीव और पूर्णिमा के फ्लैट हैं उसी में एक अन्य आरोपी डॉ. सतीश कुमार का भी फ्लैट हैं। डॉ. कफील खान के पास अपना आधुनिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर है। सबके अकाउंट भी खंगाले जा रहे हैं। आशंका है कि कमीशन की धनराशि बैंक या फिर संपत्ति खरीदने में खपाई जा सकती है। इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा भी लगाई गई है।
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छोटे कर्मचारी भी बड़े ‘खेल’ में शामिल
चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल समेत लिपिक उदय, सुधीर और संजय के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई थीं। शासन ने अपनी जांच में इन कर्मचारियों को जानबूझकर ऑक्सीजन का भुगतान रोकने का दोषी माना था। बताया जाता है कि इन कर्मचारियों ने भी मेडिकल कॉलेज में नौकरी के दौरान अच्छी खासी संपत्ति अर्जित की है।
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जमकर होती रही है धांधली
मेडिकल कॉलेज में पर्ची पर दवा एवं अन्य सामान की खरीद से लेकर भुगतान तक होते रहे। नए प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए बिना व्यवस्थित फाइल के किसी तरह के खरीद और भुगतान को रोक दिया है। मेडिकल कॉलेज में डीएम की जांच के दौरान चार माह नौ दिन के दौरान हुई ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई का रिकॉर्ड नहीं मिला था।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट के दौरान हुई मौतों के आरोपियों में से कई ने आय से ज्यादा संपत्ति जुटाई है। इसे लेकर भी इनके खिलाफ शिकंजा कसे जाने के संकेत मिले हैं। इन आरोपियों की संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की संपत्ति का ब्यौरा शासन ने मांगा है। प्रारंभिक सूचना के हिसाब से डॉक्टर दंपति के पास शहर में नर्सिंग होम, दो फ्लैट और एक मकान हैं। लखनऊ के लालकुआं इलाके में भी एक मकान बताया जा रहा है। शहर के जिस जेमिनी पैराडाइज में डॉ. राजीव और पूर्णिमा के फ्लैट हैं उसी में एक अन्य आरोपी डॉ. सतीश कुमार का भी फ्लैट हैं। डॉ. कफील खान के पास अपना आधुनिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर है। सबके अकाउंट भी खंगाले जा रहे हैं। आशंका है कि कमीशन की धनराशि बैंक या फिर संपत्ति खरीदने में खपाई जा सकती है। इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा भी लगाई गई है।
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छोटे कर्मचारी भी बड़े ‘खेल’ में शामिल
चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल समेत लिपिक उदय, सुधीर और संजय के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई थीं। शासन ने अपनी जांच में इन कर्मचारियों को जानबूझकर ऑक्सीजन का भुगतान रोकने का दोषी माना था। बताया जाता है कि इन कर्मचारियों ने भी मेडिकल कॉलेज में नौकरी के दौरान अच्छी खासी संपत्ति अर्जित की है।
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जमकर होती रही है धांधली
मेडिकल कॉलेज में पर्ची पर दवा एवं अन्य सामान की खरीद से लेकर भुगतान तक होते रहे। नए प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए बिना व्यवस्थित फाइल के किसी तरह के खरीद और भुगतान को रोक दिया है। मेडिकल कॉलेज में डीएम की जांच के दौरान चार माह नौ दिन के दौरान हुई ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई का रिकॉर्ड नहीं मिला था।
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