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युवाओं ने फिर छोड़ा छपरामगर्वी
Updated Fri, 11 Aug 2017 11:32 PM IST
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हैंसर(संतकबीरनगर)। घाघरा की तलहटी में बालू खनन का ठेका छपरामगर्वी के लोगों को इतना भारी पड़ेगा, शायद गांव के किसी भी शख्स ने ऐसा नहीं सोचा होगा। खनन के प्रस्ताव से शुरू हुए विवाद में प्रधान समेत अब तक 25 लोग जेल जा चुके हैं। करीब डेढ़ महीने पुलिस फिर सक्रिय हो गई है। ऐसे में अधिकांश युवाओं ने फिर गांव छोड़ दिया है। वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार अभी कई वांछितों का पकड़ा जाना बाकी है। नाम न छापने की शर्त पर गांव लोगों ने बताया कि खनन का प्रस्ताव किए जाने से प्रधान बराबर इंकार कर रहे थे, लेकिन जब दो जून को पुलिस और गांव के लोगों के बीच हुए विवाद के बाद डीएम यहां आए तो गांव के लोगों के सामने प्रधान ने सफाई पेश की कि उन्होंने कोई प्रस्ताव नहीं किया है। उन्हें झूठ बोलकर बदनाम किया जा रहा है। इस डीएम ने जवाब दिया, प्रस्ताव तो प्रधान द्वारा किया गया है, आप कहें तो गांव में उसकी कॉपी बंटवा दें। इस पर प्रधान मौन हो गए। तभी से गांव में चर्चा का विषय बन गया कि प्रधान कहीं न कहीं डबल गेम खेल रहे हैं। पुलिस सूत्रों की माने तो पुलिस की जांच करने का दायरा जब बढ़ा तो सच्चाई परत दर परत खुलने लगी। इस पूरे मामले में पूर्व एसओ सबाहुद्दीन घायल हो गए थे और घटना के दूसरे दिन जेल भेजे गए निरीह लोग तो केवल उकसावे का शिकार हुए। असली खिलाड़ी पर्दे के पीछे रहकर खनन का खेल खेलकर विरोधियों को पस्त करने में लगे हुए थे। मंगलवार को पुलिस ने प्रधान गयासुदीन के सामने प्रधानी का चुनाव लड़ चुके देवेंद्र यादव को गिरफ्तार किया तो बुधवार को प्रधान गयासुद्दीन को थाने पर बुलाकर जेल भेज दिया। दोनो के जेल जाने के बाद गांव में तरह- तरह की चर्चा के साथ भय का माहौल कायम हो गया है। गांव से एक बार फिर अधिकांश युवा पलायन कर चुके हैं। विवेचक बिडहरघाट चौकी इंचार्ज राकेश कुमार ने बताया कि विवेचना जारी है। 25 लोग जेल भेजे जा चुके हैं। अभी कई लोगों को भी जेल जाना पड़ सकता है। एसओ प्रदीप सिंह ने बताया कि मामले में जो निर्दोष हैं, उन्हें पुलिस कत्तई परेशान नहीं करेगी, लेकिन विवेचना के दौरान प्रकाश में आने वाले आरोपी या फिर नामजद आरोपी तो जेल भेजे ही जाएंगे।
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